नीतीश-आरसीपी मुलाकात के बाद जदयू का पलटवार: नीरज कुमार बोले — 'गलतियाँ कीं, अब वापस लौटे'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की हालिया मुलाकात ने पटना के राजनीतिक गलियारों में सुलह की अटकलों को जन्म दे दिया है। इस मुलाकात के बाद जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने आरसीपी सिंह पर तीखा हमला बोला और उनकी वापसी की संभावनाओं को लेकर स्पष्ट शब्दों में अपनी राय रखी।
मुलाकात का संदर्भ और राजनीतिक महत्व
यह बैठक 27 जून 2026 की सुबह करीब 8 बजे हुई। नीरज कुमार ने इसका महत्व कम करते हुए कहा कि नीतीश कुमार प्रतिदिन सुबह आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलते हैं, इसलिए इस बैठक को स्वतः ही राजनीतिक पुनर्वास का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। हालाँकि, राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र में यह मुलाकात महत्वहीन नहीं है, क्योंकि आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार के बीच वर्षों से तनाव चला आ रहा है।
नीरज कुमार का तीखा हमला
जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि आरसीपी सिंह ने राजनीतिक जीवन में गलतियाँ कीं और बार-बार दल बदला। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि 'जगह-जगह भटकने के बाद आखिरकार वे उसी राजनीतिक दरवाजे पर लौट आए हैं जिसने उनके करियर को आकार दिया था।' नीरज कुमार के अनुसार, आरसीपी सिंह को अब एहसास हो गया है कि उनका राजनीतिक भविष्य नीतीश कुमार के नेतृत्व से ही जुड़ा हुआ है।
उन्होंने आरसीपी सिंह के पूर्व बयानों को भी याद दिलाया, जिनमें नीतीश कुमार की राजनीतिक प्रासंगिकता पर सवाल उठाना और उन्हें 'इतिहास का हिस्सा' बताना शामिल था। जदयू ने इन पुराने बयानों को उजागर कर पार्टी में वफादारी और विश्वास के महत्व को रेखांकित करने का प्रयास किया।
विडंबना और भूमिकाओं का उलटफेर
नीरज कुमार ने एक दिलचस्प विडंबना की ओर इशारा किया — आरसीपी सिंह कभी वे शख्स थे जो नीतीश कुमार तक पहुँच को नियंत्रित करते थे और दूसरों के लिए बैठकें आयोजित करते थे। अब स्थिति यह है कि उन्हें स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री से मिलने के अवसर का इंतजार करना पड़ रहा है। जदयू प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि आरसीपी सिंह ने पार्टी छोड़ते समय संगठन को कमज़ोर करने की कोशिश की, फिर भी जदयू नीतीश कुमार के नेतृत्व और मूल्यों के कारण टिकी रही।
आरसीपी सिंह का राजनीतिक सफर
आरसीपी सिंह कभी नीतीश कुमार के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के रूप में कार्य किया, फिर राजनीति में कदम रखा, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, और राज्यसभा सदस्य एवं केंद्रीय मंत्री के पद तक पहुँचे। दोनों नेताओं के बीच मतभेद बढ़ते गए और अंततः आरसीपी सिंह ने जदयू छोड़ दी। इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए और बाद में जन सुराज से जुड़ गए।
वापसी पर फैसला किसका?
नीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि आरसीपी सिंह की जदयू में संभावित वापसी के संबंध में कोई भी निर्णय केवल पार्टी नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा। यह बयान इस बात का संकेत है कि जदयू फिलहाल किसी भी राजनीतिक पुनर्मिलन की पुष्टि करने की स्थिति में नहीं है। बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में क्या रूप लेता है, यह देखना दिलचस्प होगा।