आरसीपी सिंह की नीतीश कुमार से मुलाकात, JDU में वापसी की अटकलें तेज़
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व केंद्रीय मंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने 27 जून 2026 को पटना स्थित सरकारी आवास पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की — दोनों नेताओं के बीच वर्षों की राजनीतिक दूरी के बाद यह पहली सार्वजनिक भेंट है। इस बैठक के बाद JDU में आरसीपी सिंह की संभावित वापसी को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज़ हो गई हैं।
मुलाकात का घटनाक्रम
आरसीपी सिंह अपने समर्थकों के साथ नीतीश कुमार के आवास के बाहर प्रतीक्षा करते रहे। जब नीतीश कुमार बाहर आए तो आरसीपी सिंह ने सम्मानपूर्वक उनका अभिवादन किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार ने अन्य कार्यकर्ताओं और नेताओं से बातचीत करने से पहले कुछ देर आरसीपी सिंह से भी बात की।
आरसीपी सिंह ने शनिवार को सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए इस मुलाकात को 'सौहार्दपूर्ण' बताया। तस्वीरों में दोनों नेता एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
आरसीपी सिंह को कभी नीतीश कुमार के सबसे विश्वस्त सहयोगियों में गिना जाता था। IAS अधिकारी के रूप में सेवा के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर JDU के ज़रिए सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। नीतीश कुमार ने उन्हें JDU के राष्ट्रीय महासचिव, JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दो बार राज्यसभा सदस्य की ज़िम्मेदारी सौंपी। बाद में वे केंद्रीय मंत्री भी बने।
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री के कार्यकाल के दौरान दोनों नेताओं के बीच संबंध बिगड़ने लगे, जिसके चलते आरसीपी सिंह को अंततः JDU छोड़नी पड़ी। इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए, लेकिन वहाँ कोई उल्लेखनीय राजनीतिक भूमिका नहीं मिली। बाद में वे प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाले जन सुराज अभियान से जुड़ गए।
परिवार की राजनीतिक भागीदारी
आरसीपी सिंह की बेटी ने हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में किस्मत आज़माई, लेकिन वे सफल नहीं हो पाईं। यह घटनाक्रम बताता है कि सिंह परिवार राजनीतिक रूप से सक्रिय बना हुआ है।
अटकलें और आधिकारिक स्थिति
राजनीतिक हलकों में कथित तौर पर यह चर्चा है कि नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने इस मुलाकात को कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई, हालाँकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न तो आरसीपी सिंह और न ही JDU नेतृत्व ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई औपचारिक घोषणा की है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब बिहार की राजनीति में गठबंधन और दलबदल के समीकरण लगातार बदल रहे हैं — और आने वाले महीनों में इस मुलाकात के राजनीतिक निहितार्थ और स्पष्ट होंगे।