आरसीपी सिंह की नीतीश कुमार से मुलाकात, बोले — 'आने वाले दिनों में बहुत कुछ हो सकता है'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने 27 जून 2026 को पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाज़ार गर्म हो गया है। सिंह ने इस भेंट को 'बेहद सकारात्मक और सुखद' बताया और संकेत दिया कि आने वाले समय में कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है।
मुलाकात की पुष्टि और प्रतिक्रिया
आरसीपी सिंह ने मुलाकात की पुष्टि करते हुए कहा, 'जो अफवाह उड़ रही है कि हमारी नीतीश कुमार से मुलाकात नहीं हुई, वह गलत है। हम उनसे मिले थे और बातचीत भी हुई।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इतने वर्षों बाद यह भेंट उनके लिए स्वाभाविक अनुभव था, क्योंकि दोनों नेताओं ने लंबे समय तक कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है।
सिंह ने कहा, 'आपको इंतजार करना चाहिए। इतने सालों बाद मैं उनसे मिला। यह एक अच्छी मुलाकात थी। मैं जेडीयू का कोई छोटा-मोटा नेता नहीं हूँ। हम सबने साथियों की तरह मिलकर काम किया है — इसलिए आने वाले दिनों में बहुत कुछ हो सकता है।'
निशांत कुमार पर आरसीपी का रुख
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की राजनीति में सक्रियता पर आरसीपी सिंह ने सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'हम पहले भी कह रहे थे कि निशांत कुमार की एंट्री होनी चाहिए। निशांत अच्छा काम कर रहे हैं। उनके पास जो विभाग है, उसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बिहार के लोगों को बेहतर हेल्थकेयर सेवाएँ मिलें और वह इसी दिशा में काम कर रहे हैं।'
परिवारवाद के आरोपों पर पूछे गए सवाल को उन्होंने सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'यह कोई नई बात नहीं है। बिहार को उनकी जरूरत है।'
जेडीयू में वापसी की अटकलें
जनता दल (यूनाइटेड) में पुनः शामिल होने की संभावनाओं पर आरसीपी सिंह ने सीधा जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने कहा, 'मैं अभी कुछ नहीं कह सकता। आने वाले समय में सब पता चल जाएगा।' गौरतलब है कि सिंह कभी नीतीश कुमार के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद तक पहुँचे थे, लेकिन बाद में दोनों के बीच दूरियाँ बढ़ गई थीं।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की सरगर्मियाँ धीरे-धीरे तेज हो रही हैं और सत्तारूढ़ गठबंधन में नए समीकरणों की चर्चा जोर पकड़ रही है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
आरसीपी सिंह केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं और जेडीयू के भीतर उनकी पहुँच और प्रभाव को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस मुलाकात के समय और सिंह के संकेत-भरे बयानों को देखते हुए यह महज़ एक शिष्टाचार भेंट नहीं लगती।
आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि यह पुनर्मिलन बिहार की राजनीति में किस दिशा में जाता है — क्या यह जेडीयू में वापसी की शुरुआत है या किसी नए राजनीतिक गठजोड़ की नींव।