बिहार विधान परिषद चुनाव: कांग्रेस ने 5 उम्मीदवार घोषित, डॉ. मदन मोहन झा दरभंगा शिक्षक सीट से मैदान में
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के द्विवार्षिक चुनाव के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने 2 अक्टूबर 2026 को अपने उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक कर दी। पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को प्रत्याशी घोषित किया है। कुल 8 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में मतदान 23 अक्टूबर और परिणाम 27 अक्टूबर को आएंगे।
कांग्रेस के उम्मीदवारों की पूरी सूची
पार्टी द्वारा जारी सूची के अनुसार पाँच सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए गए हैं। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. मदन मोहन झा, कोसी स्नातक से मनोज कुमार जायसवाल, दरभंगा स्नातक से रजनीकांत पाठक, पटना शिक्षक से डॉ. संजय यादव और पटना स्नातक से डॉ. असदुल्लाह खान को टिकट दिया गया है।
डॉ. मदन मोहन झा की प्रतिक्रिया
उम्मीदवारी मिलने पर डॉ. मदन मोहन झा ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और पदाधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा, 'पार्टी के शीर्ष नेताओं और पदाधिकारियों ने उन पर विश्वास जताते हुए उन्हें टिकट दिया है।' झा ने यह भी कहा कि वे पार्टी के इस भरोसे पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले चुनाव में सहयोगी दलों का सहयोग मिला था और इस बार भी उसी समर्थन की उम्मीद है। हालाँकि, झा ने स्पष्ट किया कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनावी समीकरण की वास्तविक तस्वीर उभर पाएगी।
चुनाव की संरचना और सीटें
बिहार विधान परिषद की कुल 8 सीटों पर यह चुनाव होगा, जिनमें 4 स्नातक और 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। स्नातक सीटें पटना, तिरहुत, दरभंगा और कोसी हैं, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, सारण, तिरहुत और दरभंगा शामिल हैं।
नामांकन और मतदान की प्रमुख तिथियाँ
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर 2026 है। इसके बाद नामांकन पत्रों की जाँच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी। 23 अक्टूबर को मतदान होगा और 27 अक्टूबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे।
एनडीए की स्थिति और आगे की तस्वीर
गौरतलब है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से अभी तक उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। डॉ. झा के अनुसार, सभी प्रत्याशियों की स्थिति नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटें परंपरागत रूप से गठबंधन की परीक्षा का मंच बनती रही हैं। नामांकन के बाद बनने वाला चुनावी समीकरण इन सीटों के भविष्य की दिशा तय करेगा।