22 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

'बिस्पोकन' पुस्तक लोकार्पण: लेखक अशोक कुमार बाल ने सुनाई एंड्रयू रामरूप तक पहुँचने की अनोखी कहानी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
'बिस्पोकन' पुस्तक लोकार्पण: लेखक अशोक कुमार बाल ने सुनाई एंड्रयू रामरूप तक पहुँचने की अनोखी कहानी

सारांश

मुंबई के काला घोड़ा की एक टेलरिंग दुकान में दीवार पर टँगे एक प्रमाणपत्र ने लेखक अशोक कुमार बाल को 'बिस्पोकन' लिखने पर मजबूर किया — एंड्रयू रामरूप की वह कहानी जो शिल्प, पहचान और भारतीय जड़ों को एक साथ बुनती है।

मुख्य बातें

'बिस्पोकन' पुस्तक का लोकार्पण 22 अगस्त 2026 को इंडिया हैबिटैट सेंटर, नई दिल्ली में हुआ।
राज्यसभा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह विशेष अतिथि और FDCI चेयरमैन सुनील सेठी कार्यक्रम के अध्यक्ष रहे।
लेखक अशोक कुमार बाल को प्रेरणा मुंबई के काला घोड़ा की एक टेलरिंग दुकान में सैविले रो बिस्पोक एकेडमी के प्रमाणपत्र से मिली।
पुस्तक का पहला अध्याय एंड्रयू एम रामरूप की भारतीय पैतृक जड़ों पर केंद्रित है, जो उनकी पहचान का अनदेखा पहलू है।
एंड्रयू रामरूप को सैविले रो के असाधारण कारीगर और इनोवेशन के प्रतीक के रूप में चित्रित किया गया है।

नई दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर स्थित सिल्वर ओक हॉल एंड पैटियो में 22 अगस्त 2026 को पुस्तक 'बिस्पोकन' का लोकार्पण समारोह आयोजित हुआ, जिसमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। फैशन डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया (FDCI) के चेयरमैन सुनील सेठी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर पुस्तक के लेखक अशोक कुमार बाल ने किताब के केंद्रीय व्यक्तित्व एंड्रयू एम रामरूप तक पहुँचने की अपनी असाधारण यात्रा साझा की।

एक साधारण दुकान से हुई असाधारण कहानी की शुरुआत

लेखक अशोक कुमार बाल ने बताया कि इस पुस्तक की प्रेरणा किसी सुनियोजित शोध-परियोजना से नहीं, बल्कि एक बेहद सहज घटनाक्रम से मिली। एक दिन वे अपने बेटे के साथ मुंबई के प्रतिष्ठित काला घोड़ा इलाके में एक टेलरिंग की दुकान पर गए, जहाँ युवा दुकानदार मोहित बेलानी से बातचीत शुरू हुई। इसी दौरान उनकी नज़र दीवार पर लगे एक फ्रेम किए हुए प्रमाणपत्र पर पड़ी।

उस प्रमाणपत्र पर 'सैविले रो बिस्पोक एकेडमी' का नाम अंकित था और नीचे एंड्रयू एम रामरूप के हस्ताक्षर थे। यही नाम आगे चलकर पूरी किताब की नींव बन गया।

मोहित बेलानी ने जगाई जिज्ञासा

बाल ने बताया कि जब उन्होंने मोहित बेलानी से उस प्रमाणपत्र के बारे में पूछा, तो बातचीत धीरे-धीरे एंड्रयू एम रामरूप की ओर मुड़ती गई। मोहित ने उन्हें बताया कि एंड्रयू एक 'लीजेंड' हैं — असाधारण कौशल के धनी कारीगर, जिनकी साख पूरी दुनिया में है। इस बातचीत ने बाल के मन पर गहरी छाप छोड़ी और वे उस नाम को अपने साथ घर लेकर लौटे।

इंटरनेट रिसर्च से खुला एक नया संसार

घर लौटने के बाद लेखक ने इंटरनेट पर एंड्रयू रामरूप के बारे में विस्तृत शोध किया। उन्होंने बताया कि रिसर्च के दौरान एंड्रयू के जीवन, उनके काम और उनकी उपलब्धियों से जुड़ी इतनी सामग्री सामने आई कि उन्हें महसूस हुआ — यह कहानी किसी आधुनिक महाकाव्य से कम नहीं है। बाल के अनुसार, एंड्रयू उन्हें केवल एक बेहतरीन दर्जी के रूप में नहीं, बल्कि इनोवेशन, कला, शिल्पकारिता और ज्ञान के असाधारण स्रोत के रूप में दिखे।

भारतीय जड़ों ने बदल दी किताब की दिशा

लेखक ने बताया कि शुरुआत में एंड्रयू रामरूप किताब के प्रस्ताव को लेकर थोड़े हिचकिचाए। लेकिन जब बाल ने उन्हें बताया कि पहला अध्याय उनकी भारतीय पैतृक जड़ों पर केंद्रित होगा, तो एंड्रयू भावुक हो उठे। उन्होंने साझा किया कि अनेक लोग उनके रूप-रंग को देखकर उन्हें अफ्रीकी मूल का समझ लेते हैं और उनकी भारतीय विरासत से अनजान रहते हैं। यह प्रस्ताव सुनकर वे उत्साहित हुए और किताब लिखे जाने पर अपनी सहमति दे दी।

गौरतलब है कि 'बिस्पोकन' केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं है — यह शिल्प, पहचान और विरासत की एक व्यापक गाथा है, जो एक फ्रेम किए हुए प्रमाणपत्र से शुरू होकर सैविले रो की गलियों तक फैली है। आने वाले समय में यह पुस्तक भारतीय पाठकों के बीच फैशन और दस्तकारी की दुनिया को एक नए नज़रिए से समझने का अवसर देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनकी भारतीय जड़ें उनके रूप-रंग के कारण अनदेखी रह जाती हैं, यह दर्शाते हैं कि पहचान की राजनीति फैशन जगत में भी उतनी ही प्रासंगिक है। यह पुस्तक उस खाई को पाटने का प्रयास है जो 'विश्वस्तरीय शिल्प' और 'भारतीय मूल' के बीच अक्सर मान ली जाती है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'बिस्पोकन' पुस्तक किसके बारे में है?
'बिस्पोकन' लेखक अशोक कुमार बाल द्वारा लिखी गई पुस्तक है, जो सैविले रो के विख्यात कारीगर एंड्रयू एम रामरूप के जीवन, शिल्प और भारतीय पैतृक जड़ों पर केंद्रित है। यह केवल जीवनी नहीं, बल्कि इनोवेशन, कला और विरासत की एक व्यापक गाथा है।
लेखक अशोक कुमार बाल को 'बिस्पोकन' लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिली?
प्रेरणा मुंबई के काला घोड़ा इलाके की एक टेलरिंग दुकान से मिली, जहाँ दीवार पर लगे 'सैविले रो बिस्पोक एकेडमी' के प्रमाणपत्र पर एंड्रयू रामरूप के हस्ताक्षर देखकर बाल की जिज्ञासा जागी। दुकानदार मोहित बेलानी से हुई बातचीत ने उन्हें एंड्रयू की कहानी गहराई से जानने पर प्रेरित किया।
पुस्तक लोकार्पण समारोह में कौन उपस्थित थे?
22 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर में हुए इस समारोह में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह विशेष अतिथि रहे। FDCI के चेयरमैन सुनील सेठी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
एंड्रयू रामरूप की भारतीय जड़ें पुस्तक में क्यों महत्वपूर्ण हैं?
लेखक के अनुसार, कई लोग एंड्रयू के रूप-रंग को देखकर उन्हें अफ्रीकी मूल का समझ लेते हैं और उनकी भारतीय विरासत से अनजान रहते हैं। इसीलिए पुस्तक का पहला अध्याय उनकी भारतीय वंशावली पर केंद्रित रखा गया, जिसे सुनकर एंड्रयू स्वयं भावुक हो गए और किताब के लिए सहमत हुए।
एंड्रयू एम रामरूप कौन हैं?
एंड्रयू एम रामरूप सैविले रो बिस्पोक एकेडमी से जुड़े विश्वस्तरीय कारीगर हैं, जिन्हें उनके असाधारण टेलरिंग कौशल और इनोवेशन के लिए जाना जाता है। लेखक अशोक कुमार बाल उन्हें कला, शिल्पकारिता और ज्ञान के असाधारण स्रोत के रूप में वर्णित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले