12 अगस्त 2026
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रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक' का विमोचन, PM मोदी और ओम बिरला रहे मौजूद

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रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक' का विमोचन, PM मोदी और ओम बिरला रहे मौजूद

सारांश

एक साधारण कोली परिवार से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक — पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक' का विमोचन PM मोदी ने 12 अगस्त को विज्ञान भवन में किया। यह पुस्तक संघर्ष, संकल्प और सार्वजनिक सेवा की असाधारण गाथा है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया।
पुस्तक का शीर्षक 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स' है।
समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी उपस्थित रहे और उन्होंने कोविंद की संकल्प शक्ति को 'प्रेरणा का स्रोत' बताया।
कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को कानपुर देहात के परौंख गाँव में हुआ; वे 2017 से 2022 तक भारत के राष्ट्रपति रहे।
वे उत्तर प्रदेश और BJP से आने वाले पहले व्यक्ति थे जिन्होंने राष्ट्रपति पद संभाला।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स' का औपचारिक विमोचन किया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

पुस्तक और कार्यक्रम का विवरण

यह आत्मकथा उन मूल्यों, अनुभवों और परिस्थितियों का लेखा-जोखा है जिन्होंने रामनाथ कोविंद की जीवन-यात्रा और जनसेवा को आकार दिया। पुस्तक विमोचन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व राष्ट्रपति कोविंद और लोकसभा अध्यक्ष बिरला तीनों ने सभा को संबोधित किया।

विमोचन से एक दिन पूर्व, मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'यह पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा है। यह किताब उनके प्रेरणादायक जीवन और समाज की सेवा के प्रयासों के बारे में है।'

ओम बिरला और कोविंद के उद्गार

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, 'रामनाथ कोविंद जी एक साधारण परिवार में जन्मे हैं। शुरुआती जीवन में कई चुनौतियाँ थीं। स्कूल जाने के लिए भी इन्हें कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी, लेकिन बाधाओं के बावजूद आपका संकल्प कभी कमज़ोर नहीं पड़ा। यह पुस्तक आपकी उस असाधारण संकल्प शक्ति की जीवन चित्रण है, जो हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।'

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा, 'आज का यह अवसर मेरे लिए अलग है, क्योंकि आज की चर्चा का विषय मेरा अपना निजी जीवन है।' उन्होंने समारोह में उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

कोविंद की नज़र में प्रधानमंत्री मोदी

पूर्व राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने दीर्घकालिक संबंधों को याद करते हुए कहा, 'सार्वजनिक जीवन में एक कार्यकर्ता के तौर पर मेरी मुलाकात मोदी जी से हुई। उस समय वे पार्टी में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। मुझे संगठन के कार्यक्रमों में उनके साथ काम करने का अवसर मिला। इस दौरान उनकी जिस बात ने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया, वह थी उनकी दूरदर्शिता, विकास के प्रति प्रतिबद्धता और साधारण कार्यकर्ताओं से सहज जुड़ने की उनकी क्षमता।'

कोविंद ने आगे कहा कि उन्होंने मोदी के भीतर 'संगठनात्मक दक्षता और दूरदर्शी सोच का अद्वितीय संगम' देखा। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा के संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुनने के कारण भी स्पष्ट किए — 'इस पार्टी में 'राष्ट्र सर्वोपरि' की बात चरितार्थ की जाती है। यहाँ वंशवाद, परिवारवाद, जातिवाद और क्षेत्रवाद जैसी सामाजिक विकृतियों से ऊपर उठकर देश के समावेशी विकास पर बल दिया जाता है।'

रामनाथ कोविंद: एक परिचय

रामनाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के परौंख गाँव में एक कोली परिवार में हुआ था। वे 1991 में BJP में शामिल हुए और 1998 से 2002 के बीच पार्टी के दलित मोर्चा के प्रमुख तथा अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष रहे।

वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में लगातार दो कार्यकाल के लिए सदस्य रहे, 2015 से 2017 तक बिहार के राज्यपाल रहे और 2017 से 2022 तक भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में सेवा दी। गौरतलब है कि वे उत्तर प्रदेश और BJP से आने वाले पहले व्यक्ति थे जिन्होंने देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद संभाला।

आगे क्या

यह आत्मकथा उन पाठकों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है जो भारत के संवैधानिक इतिहास, दलित नेतृत्व की यात्रा और राजनीतिक जीवन की जटिलताओं को समझना चाहते हैं। पुस्तक के विमोचन के बाद इसकी व्यापक उपलब्धता की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह प्रश्न छोड़ देती है कि क्या संवैधानिक पद पर दलित प्रतिनिधित्व नीतिगत बदलावों में भी परिलक्षित हुआ। पुस्तक में कोविंद के अपने शब्दों में जो विवरण है, वह इतिहासकारों और नागरिकों दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत बन सकता है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का शीर्षक क्या है?
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का शीर्षक 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स' है। यह पुस्तक उनके जीवन-मूल्यों, संघर्षों और जनसेवा की यात्रा का विवरण देती है।
कोविंद की आत्मकथा का विमोचन कब और कहाँ हुआ?
पुस्तक का विमोचन 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस अवसर पर उपस्थित रहे।
रामनाथ कोविंद कब से कब तक भारत के राष्ट्रपति रहे?
रामनाथ कोविंद 2017 से 2022 तक भारत के 14वें राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति बनने से पहले वे 2015 से 2017 तक बिहार के राज्यपाल और उत्तर प्रदेश से दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके थे।
रामनाथ कोविंद का प्रारंभिक जीवन कैसा था?
रामनाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के परौंख गाँव में एक कोली परिवार में हुआ था। बचपन में उन्हें स्कूल जाने के लिए कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी, फिर भी उन्होंने हर चुनौती पार कर देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद हासिल किया।
कोविंद BJP में कब शामिल हुए और पार्टी में उनकी क्या भूमिका रही?
रामनाथ कोविंद 1991 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए। 1998 से 2002 के बीच वे पार्टी के दलित मोर्चा के प्रमुख और अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष रहे। वे उत्तर प्रदेश और BJP से आने वाले पहले व्यक्ति थे जिन्होंने राष्ट्रपति पद संभाला।
राष्ट्र प्रेस
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