रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक' का विमोचन, PM मोदी बोले — 'उनका स्नेह मेरी बड़ी पूंजी'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन के सेंट्रल हॉल में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स' का विमोचन किया। इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल सहित राजनीति, धर्म और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। पुस्तक में कानपुर के एक साधारण गाँव से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक की कोविंद की जीवन-यात्रा का विवरण है।
PM मोदी ने क्या कहा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आज हमें पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन का अवसर मिला है। मुझे खुशी है कि इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है। रामनाथ कोविंद से बहुत लंबा परिचय रहा है। उन्हें करीब से जानने का भी अवसर मिला है। राष्ट्रपति के रूप में उनके मार्गदर्शन के साथ-साथ उनका मेरे प्रति विशेष स्नेह और आत्मीयता, यह मेरी बहुत बड़ी पूंजी रही है।' यह टिप्पणी दोनों नेताओं के बीच दशकों पुराने व्यक्तिगत और संस्थागत संबंध को रेखांकित करती है।
नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा, 'रामनाथ कोविंद भारत के राष्ट्रपति होने के साथ-साथ एक ऐसे व्यक्ति भी रहे हैं जो जमीन से जुड़े रहे और संघर्षों के रास्ते आगे बढ़े। जब उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी है, तो हम कह सकते हैं कि इस आत्मकथा में भारत की आत्मा दिखाई देगी।'
BJP सांसद महेश शर्मा ने पुस्तक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, 'इस किताब में उनके जीवन के कुछ कम जाने-पहचाने पहलू मिलेंगे, जिससे पता चलता है कि वह कानपुर के एक छोटे से गांव के एक साधारण परिवार से आए और इतनी ऊंचाइयों तक पहुंचे। सादगी और विनम्रता के साथ, जिसका जिक्र उन्होंने खुद भी किया है और जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने भी किया।'
कोश्यारी और लोकेश मुनि के विचार
राज्यसभा के पूर्व सदस्य भगत सिंह कोश्यारी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा, 'रामनाथ कोविंद भारत के राष्ट्रपति रहे। उनके कार्यकाल के दौरान मैं राज्यपाल था लेकिन मेरा जुड़ाव उनसे इससे भी पहले का है। सबसे बड़ी बात यह है कि इतने ऊंचे पद पर पहुंचने के बाद भी रामनाथ कोविंद ने अपनी सादगी, शालीनता और विनम्रता नहीं छोड़ी और एक आम आदमी की तरह अपना जीवन जीते रहे।'
जैन धर्मगुरु आचार्य डॉ. लोकेश मुनि ने भी कार्यक्रम में उपस्थित रहकर पूर्व राष्ट्रपति की जीवन-यात्रा को प्रेरणादायक बताया।
पुस्तक का महत्व और संदर्भ
गौरतलब है कि रामनाथ कोविंद भारत के 14वें राष्ट्रपति रहे और उन्होंने 2017 से 2022 तक इस सर्वोच्च संवैधानिक पद पर अपनी सेवाएँ दीं। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के एक दलित परिवार से आकर राष्ट्रपति भवन तक की उनकी यात्रा भारतीय लोकतंत्र की समावेशी शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व की बहस राष्ट्रीय विमर्श में केंद्रीय स्थान रखती है।
आगे क्या
पुस्तक के व्यापक वितरण की योजना बताई जा रही है और इसे हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है। यह आत्मकथा आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष और सेवा का एक दस्तावेज़ बनने की ओर अग्रसर है।