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सोनिया गांधी की आत्मकथा विवाद: भाजपा बोली — 'किताब में देशहित के खिलाफ बातें थीं'

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सोनिया गांधी की आत्मकथा विवाद: भाजपा बोली — 'किताब में देशहित के खिलाफ बातें थीं'

सारांश

सोनिया गांधी की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग' को पेंगुइन इंडिया द्वारा प्रकाशित न किए जाने का विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। भाजपा ने इसे किताब की सामग्री की तथ्यात्मक खामियों से जोड़ा, जबकि हार्परकॉलीन्स भारतीय प्रकाशन अधिकार के करीब बताई जा रही है और अंतरराष्ट्रीय संस्करण 10 नवंबर को आएगा।

मुख्य बातें

तमिलनाडु भाजपा प्रवक्ता नारायणन तिरुपथी ने 1 सितंबर को कहा कि सोनिया गांधी की किताब में 'देश के हित में नहीं' और 'तथ्यों पर आधारित नहीं' बातें थीं।
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने 28 अगस्त को पुष्टि की कि वह 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' का भारत में प्रकाशक नहीं है।
प्रकाशक ने यह दावा खारिज किया कि किताब इसलिए नहीं छपी क्योंकि सोनिया गांधी ने संपादकीय बदलाव नहीं माने।
रिपोर्टों के अनुसार, हार्परकॉलीन्स भारत में किताब के प्रकाशन अधिकार के करीब है।
अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए.
नॉप्फ ने घोषणा की है कि आत्मकथा का अंतरराष्ट्रीय संस्करण 10 नवंबर को आएगा।

कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' को लेकर छिड़े विवाद में तमिलनाडु भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपथी ने मंगलवार, 1 सितंबर को कहा कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा किताब प्रकाशित न करने के फैसले के पीछे किताब की सामग्री में मौजूद तथ्यात्मक खामियाँ और देशहित के विरुद्ध बातें जिम्मेदार हैं। उनका यह बयान 28 अगस्त को प्रकाशक के उस आधिकारिक ऐलान के बाद आया है, जिसमें उसने भारत में इस किताब को प्रकाशित न करने की पुष्टि की थी।

भाजपा का आरोप: तथ्य-जांच में नहीं टिकी किताब

नारायणन तिरुपथी ने कहा, 'उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि किताब में कई बातें ऐसी थीं जो सही नहीं थीं, देश के हित में नहीं थीं और तथ्यों पर आधारित नहीं थीं। आमतौर पर कोई भी प्रकाशक ऐसे दावों की जांच करता है क्योंकि जो कुछ भी प्रकाशित होता है, उसकी जिम्मेदारी उसी की होती है। इसलिए जाहिर है कि उन्होंने तथ्यों की जांच की होगी। फैक्ट-चेकिंग की गई होगी और इसी वजह से उन्होंने उस पर आपत्ति जताई।'

उन्होंने आगे कहा, 'अगर उन्होंने तथ्यों पर आपत्ति जताई है, तो उन्हें हटाने का साहस भी होना चाहिए। वे ऐसा किसी राजनीतिक कारण से नहीं कर रहे थे — इसी वजह से उन्होंने किताब प्रकाशित करने से इनकार किया।'

पेंगुइन का पक्ष: संपादकीय बदलाव वाली बात गलत

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने 28 अगस्त को एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया था, 'पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया, 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' का भारत में प्रकाशक नहीं है। यह कहना सही नहीं है कि हमने किताब इसलिए प्रकाशित नहीं की क्योंकि लेखक ने संपादकीय बदलाव स्वीकार नहीं किए।'

हालाँकि, प्रकाशक ने यह भी स्वीकार किया कि वह पहले इस किताब को प्रकाशित करने का इच्छुक था और लेखकों द्वारा किए गए दावों की तथ्य-जांच करना तथा आवश्यक सुझाव देना उसकी संपादकीय जिम्मेदारी है। गौरतलब है कि इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में कथित तौर पर कहा गया था कि सोनिया गांधी ने संपादकीय बदलाव स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसके कारण प्रकाशक ने पीछे हटने का फैसला किया।

अब किताब कहाँ छपेगी

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के हटने के बाद भारत के कई प्रमुख प्रकाशन संस्थान इस किताब के अधिकार हासिल करने की दौड़ में बताए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हार्परकॉलीन्स भारत में इस किताब को प्रकाशित और वितरित करने के लिए समझौते के करीब है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, अल्फ्रेड ए. नॉप्फ — जो अमेरिका का एक प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान और पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक इम्प्रिंट है — ने घोषणा की है कि यह आत्मकथा 10 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।

विवाद का राजनीतिक संदर्भ

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। भाजपा के लिए यह किताब-विवाद कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाने का एक और अवसर बन गया है, जबकि कांग्रेस की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि हार्परकॉलीन्स के साथ अनुबंध की पुष्टि होती है या नहीं, और 10 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन के बाद भारत में यह किताब किस रूप में पाठकों तक पहुँचती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक अधिक लगता है — क्योंकि पेंगुइन ने खुद स्पष्ट किया कि प्रकाशन न होने का कारण 'संपादकीय बदलाव न मानना' नहीं था, और असली वजह सार्वजनिक नहीं की। भाजपा प्रवक्ता ने प्रकाशक की आंतरिक प्रक्रिया को 'देशहित की जांच' के रूप में पेश किया — जो एक व्याख्या है, तथ्य नहीं। असली सवाल यह है कि एक लोकतंत्र में किसी पूर्व सत्ताधारी नेता की आत्मकथा के प्रकाशन को लेकर इतना राजनीतिक तापमान क्यों है, और क्या प्रकाशन उद्योग पर अघोषित दबाव काम कर रहा है — यह जाँच का विषय बनना चाहिए।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनिया गांधी की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग' क्या है?
'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की आत्मकथा है। इसका अंतरराष्ट्रीय संस्करण अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉप्फ द्वारा 10 नवंबर को प्रकाशित किया जाना है।
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने यह किताब क्यों नहीं छापी?
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने 28 अगस्त को स्पष्ट किया कि वह इस किताब का भारतीय प्रकाशक नहीं है। प्रकाशक ने यह भी कहा कि किताब इसलिए नहीं रोकी गई क्योंकि लेखक ने संपादकीय बदलाव नहीं माने — हालाँकि असली कारण सार्वजनिक नहीं किया गया।
भाजपा ने इस विवाद पर क्या कहा?
तमिलनाडु भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपथी ने 1 सितंबर को कहा कि किताब में कई बातें 'देश के हित में नहीं थीं' और 'तथ्यों पर आधारित नहीं थीं'। उन्होंने तर्क दिया कि प्रकाशक ने फैक्ट-चेकिंग के बाद ही आपत्ति जताई होगी।
भारत में अब यह किताब कौन प्रकाशित करेगा?
रिपोर्टों के अनुसार, हार्परकॉलीन्स भारत में इस किताब को प्रकाशित और वितरित करने के लिए समझौते के करीब है। हालाँकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सोनिया गांधी की किताब का अंतरराष्ट्रीय संस्करण कब आएगा?
अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉप्फ ने घोषणा की है कि 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' का अंतरराष्ट्रीय संस्करण 10 नवंबर को प्रकाशित किया जाएगा। नॉप्फ, पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक प्रकाशन ब्रांड है।
राष्ट्र प्रेस
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