सोनिया गांधी की किताब 'बिनालॉन्गिंग' पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, 10 नवंबर को होगी प्रकाशित
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की चेयरपर्सन सोनिया गांधी की आत्मकथात्मक किताब 'बिनालॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' के 10 नवंबर को प्रकाशित होने की घोषणा के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। गुरुवार, 20 अगस्त को BJP ने किताब का सशर्त स्वागत किया, जबकि कांग्रेस ने इसे एक ऐतिहासिक जीवन-यात्रा का दस्तावेज़ बताया।
भाजपा का सशर्त स्वागत
BJP नेता राम कदम ने किताब के प्रकाशन पर सोनिया गांधी को शुभकामनाएं देते हुए कहा, 'मैं सोनिया गांधी को उनकी आने वाली किताब — जो एक आत्मकथा है — के लिए शुभकामनाएं देता हूं। हालांकि, मुझे उम्मीद है कि वह इसमें सच भी लिखें कि उनके कार्यकाल के दौरान, प्रधानमंत्री एक कठपुतली की तरह काम करते थे और रिमोट कंट्रोल 10 जनपथ से चलता था।'
कदम ने 2004 से 2014 के बीच पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए यह भी माँग की कि किताब में उस दौर के कथित भ्रष्टाचार का ज़िक्र हो। उन्होंने कहा, 'हर कोई अच्छी बातें लिखता है, लेकिन अगर सोनिया गांधी सच लिखती हैं, तो निश्चित रूप से उसका स्वागत किया जाएगा।'
कांग्रेस का पक्ष: बलिदान और योगदान
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यह किताब सिर्फ एक संस्मरण नहीं, बल्कि एक जीवन का यात्रा-वृत्तांत है। उन्होंने कहा, 'पूरा देश और दुनिया के कई लोग इस किताब का इंतजार कर रहे हैं। सोनिया गांधी ने अपने परिवार के दो सदस्यों की शहादत सही — जिसमें उनके पति की शहादत भी शामिल थी — और फिर भी वह लड़ती रहीं।'
खेड़ा ने यह भी कहा कि देश को एकजुट रखने में सोनिया गांधी के योगदान को कोई नहीं भूल सकता।
किताब में क्या होगा
प्रकाशक की घोषणा के अनुसार, 'बिनालॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' सोनिया गांधी की यादों पर आधारित है। रिपोर्टों के अनुसार, यह किताब उनके इटली के एक छोटे से शहर से भारतीय राजनीति के शीर्ष तक पहुँचने के सफर को दर्शाएगी। इसमें प्रेम, दुख और राजनीतिक जिम्मेदारी के उन अनुभवों का भी वर्णन होगा जिन्होंने उनके जीवन को आकार दिया।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय राजनीति में विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। गौरतलब है कि सोनिया गांधी दशकों से भारतीय राजनीति की केंद्रीय हस्ती रही हैं और उनकी किताब को लेकर दोनों दलों की प्रतिक्रियाएं उनकी राजनीतिक स्थिति को दर्शाती हैं।
आगे क्या
किताब का औपचारिक प्रकाशन 10 नवंबर को होना है। जैसे-जैसे यह तारीख नज़दीक आएगी, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज़ होने की संभावना है। दोनों दलों के रुख को देखते हुए यह किताब केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि एक राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनती दिख रही है।