सोनिया गांधी की आत्मकथा विवाद: भाजपा बोली — किताब में देशहित के विरुद्ध बातें थीं
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपथी ने मंगलवार, 1 सितंबर को कहा कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी की आत्मकथा प्रकाशित न करने के फैसले के पीछे किताब की सामग्री में मौजूद वे बातें हैं जो 'सही नहीं थीं और देश के हित में भी नहीं थीं।' यह विवाद तब और गहरा गया जब 28 अगस्त को प्रकाशक ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि वह इस किताब को भारत में प्रकाशित नहीं करेगा।
भाजपा का रुख: तथ्य-जांच में खरी नहीं उतरी किताब
नारायणन तिरुपथी ने कहा, 'उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि किताब में कई बातें ऐसी थीं जो सही नहीं थीं, देश के हित में नहीं थीं और तथ्यों पर आधारित नहीं थीं। आमतौर पर कोई भी प्रकाशक ऐसे दावों की जांच करता है क्योंकि जो कुछ भी प्रकाशित होता है, उसकी जिम्मेदारी उसी की होती है। इसलिए जाहिर है कि उन्होंने तथ्यों की जांच की होगी।'
उन्होंने आगे कहा, 'अगर उन्होंने तथ्यों पर आपत्ति जताई है, तो उन्हें हटाने का साहस भी होना चाहिए। वे ऐसा किसी राजनीतिक कारण से नहीं कर रहे थे — इसी वजह से उन्होंने किताब प्रकाशित करने से इनकार कर दिया।' भाजपा के इस बयान को प्रकाशक के फैसले पर राजनीतिक मुहर लगाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
पेंगुइन का आधिकारिक स्पष्टीकरण
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने 28 अगस्त को जारी अपने बयान में कहा, 'पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया, बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव का भारत में प्रकाशक नहीं है। यह कहना सही नहीं है कि हमने किताब इसलिए प्रकाशित नहीं की क्योंकि लेखक ने संपादकीय बदलाव स्वीकार नहीं किए।'
हालांकि, प्रकाशक ने यह स्वीकार किया कि वह इस किताब को प्रकाशित करने का इच्छुक था और लेखकों द्वारा किए गए दावों की तथ्य-जांच करना तथा आवश्यक सुझाव देना उसकी जिम्मेदारी है। इससे पहले खबरें आई थीं कि सोनिया गांधी ने कथित तौर पर 'संपादकीय' बदलाव स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद प्रकाशक ने पीछे हटने का फैसला किया।
अब कौन प्रकाशित करेगा किताब?
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के हटने के बाद भारत के कई प्रकाशक इस किताब के अधिकार हासिल करने की दौड़ में बताए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हार्परकॉलीन्स भारत में इस किताब को प्रकाशित और वितरित करने के लिए समझौते के करीब है।
गौरतलब है कि अमेरिका का प्रमुख प्रकाशन संस्थान अल्फ्रेड ए. नॉप्फ — जो पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक इम्प्रिंट है — ने घोषणा की है कि सोनिया गांधी की आत्मकथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 10 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। यानी किताब भारत से बाहर तय समय पर आएगी, लेकिन भारत में प्रकाशक का मामला अभी तक अनिश्चित है।
यह विवाद क्यों मायने रखता है
यह ऐसे समय में आया है जब देश में प्रकाशन स्वतंत्रता और राजनीतिक संवेदनशीलता को लेकर बहस तेज है। आलोचकों का कहना है कि एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक का भारत में किसी बड़े राजनीतिक व्यक्तित्व की किताब से पीछे हटना, प्रकाशन उद्योग में स्व-सेंसरशिप के बढ़ते दबाव का संकेत हो सकता है। वहीं, भाजपा इसे सामग्री की विश्वसनीयता पर सवाल के रूप में पेश कर रही है।
आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि भारत में किताब का प्रकाशन किस रूप में होता है और क्या इसकी सामग्री पर विवाद और गहराता है।