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द्वारका ब्लाइंड मर्डर केस: 500 सीसीटीवी खंगालकर दिल्ली पुलिस ने दो हत्यारोपियों को दबोचा

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द्वारका ब्लाइंड मर्डर केस: 500 सीसीटीवी खंगालकर दिल्ली पुलिस ने दो हत्यारोपियों को दबोचा

सारांश

500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और तकनीकी निगरानी — दिल्ली पुलिस ने द्वारका के ब्लाइंड मर्डर केस को महज तीन दिनों में सुलझा लिया। घर बेचने के विवाद में अखिलेश मंडल की हत्या, और आरोपी खुद परिवार को गुमराह करता रहा — यही इस मामले की सबसे चौंकाने वाली कड़ी है।

मुख्य बातें

12 जुलाई को द्वारका सेक्टर-18ए में कारगिल चौक के पास अज्ञात शव मिला; बाद में पहचान नजफगढ़ निवासी अखिलेश मंडल (38 वर्ष) के रूप में हुई।
दिल्ली पुलिस ने 500 सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर 15 जुलाई को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी हैं — अनिल ठाकुर (66 वर्ष) और राजू कुमार (28 वर्ष) ।
हत्या का कारण: घर बेचने के विवाद में 10 जुलाई को द्वारका सेक्टर-13 में मारपीट कर हत्या की गई।
आरोपी अनिल ठाकुर परिवार को गुमराह करता रहा, इसीलिए लापता होने की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी।
जाँच का नेतृत्व डीसीपी कुशलपाल सिंह के निर्देशों पर द्वारका जिले के स्पेशल स्टाफ ने किया।

दिल्ली पुलिस ने द्वारका नॉर्थ इलाके में हुई एक जटिल ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझा ली है — 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण और तकनीकी निगरानी के बाद 15 जुलाई को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मृतक की पहचान नजफगढ़ निवासी 38 वर्षीय अखिलेश मंडल के रूप में हुई, जिनका शव 12 जुलाई को द्वारका सेक्टर-18ए में कारगिल चौक के निकट घास में मिला था।

मुख्य घटनाक्रम

12 जुलाई को द्वारका के सेक्टर-18ए में कारगिल चौक के पास एक सड़क और नाले के बीच घास में अज्ञात व्यक्ति का शव मिला। शव की अनुमानित आयु 35 वर्ष के आसपास थी, जिस पर टैटू बने थे और सिर पर चोट के निशान थे। शव के पास पहचान का कोई दस्तावेज़ नहीं मिला, जिससे यह मामला शुरुआत में ब्लाइंड मर्डर केस बन गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए द्वारका नॉर्थ पुलिस स्टेशन में तत्काल एफआईआर दर्ज की गई। डीसीपी कुशलपाल सिंह के निर्देशों पर द्वारका जिले के स्पेशल स्टाफ और द्वारका नॉर्थ पुलिस की विशेष टीमें जाँच में लगाई गईं।

जाँच की प्रक्रिया

संयुक्त टीमों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और घटना वाली जगह के साथ-साथ आसपास के मार्गों पर लगे लगभग 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया। सभी उपलब्ध कानूनी तरीकों से पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसके बाद मृतक की पहचान नजफगढ़ निवासी अखिलेश मंडल (38 वर्ष) के रूप में हुई।

सीसीटीवी विश्लेषण और तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस ने दो आरोपियों — अनिल ठाकुर (66 वर्ष) और राजू कुमार (28 वर्ष) — को गिरफ्तार किया।

हत्या की वजह और आरोपियों का बयान

पूछताछ में सामने आया कि मृतक अखिलेश मंडल लंबे समय से अनिल ठाकुर के घर में रह रहा था। प्रारंभ में यह व्यवस्था अनिल की सहमति से थी, लेकिन अखिलेश की शराब की लत के कारण दोनों के बीच अक्सर विवाद होते थे।

जब अनिल ठाकुर ने अपना घर बेचने का निर्णय लिया, तो अखिलेश ने इसका विरोध किया। इसी विवाद ने हत्या की पृष्ठभूमि तैयार की। 10 जुलाई को अनिल ठाकुर ने अखिलेश को द्वारका सेक्टर-13 बुलाया, जहाँ दोनों आरोपियों ने मिलकर उसके साथ मारपीट की, जिससे उसकी मौत हो गई।

हत्या के बाद दोनों आरोपी नजफगढ़ के धर्मपुरा इलाके में फरार हो गए। आरोपी अनिल ठाकुर मृतक के परिवार को भली-भाँति जानता था और हत्या के बाद परिवार को गुमराह करता रहा — यही कारण था कि परिजनों ने लापता होने की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी।

सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया

डीसीपी कुशलपाल सिंह के नेतृत्व में की गई इस जाँच को दिल्ली पुलिस की त्वरित तकनीकी कार्यवाही का उदाहरण माना जा रहा है। मात्र तीन दिनों में — 12 जुलाई से 15 जुलाई के बीच — शव की पहचान से लेकर दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी तक की कार्यवाही पूरी की गई।

आगे की कार्यवाही

दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा और मामले में आगे की जाँच जारी है। पुलिस के अनुसार हत्या में इस्तेमाल हथियार और अन्य साक्ष्यों की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह भी उठता है कि यदि मृतक के परिजन सतर्क होते और समय पर रिपोर्ट दर्ज कराते, तो क्या जाँच और तेज़ हो सकती थी।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्वारका ब्लाइंड मर्डर केस क्या है?
12 जुलाई 2025 को द्वारका सेक्टर-18ए में कारगिल चौक के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था, जिसकी पहचान बाद में नजफगढ़ निवासी अखिलेश मंडल (38 वर्ष) के रूप में हुई। पहचान का कोई दस्तावेज़ न होने के कारण यह ब्लाइंड मर्डर केस बन गया था।
दिल्ली पुलिस ने इस हत्याकांड को कैसे सुलझाया?
द्वारका जिले के स्पेशल स्टाफ और द्वारका नॉर्थ पुलिस की संयुक्त टीम ने घटनास्थल और आसपास के करीब 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और तकनीकी निगरानी का सहारा लिया। इसी के आधार पर मृतक की पहचान और आरोपियों की गिरफ्तारी संभव हुई।
हत्या के आरोपी कौन हैं और उन्हें कब गिरफ्तार किया गया?
आरोपी हैं अनिल ठाकुर (66 वर्ष) और राजू कुमार (28 वर्ष), जिन्हें 15 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। हत्या 10 जुलाई को द्वारका सेक्टर-13 में की गई थी, जिसके बाद दोनों नजफगढ़ के धर्मपुरा इलाके में फरार हो गए थे।
अखिलेश मंडल की हत्या क्यों की गई?
पूछताछ के अनुसार, अखिलेश मंडल आरोपी अनिल ठाकुर के घर में रह रहा था। शराब की लत के कारण दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते थे। जब अनिल ने अपना घर बेचने का फैसला किया और अखिलेश ने विरोध किया, तो दोनों आरोपियों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी।
परिवार ने अखिलेश के लापता होने की रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज कराई?
आरोपी अनिल ठाकुर मृतक के परिवार को अच्छी तरह जानता था और हत्या के बाद उन्हें गुमराह करता रहा। इसी कारण परिजनों को संदेह नहीं हुआ और उन्होंने लापता होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई।
राष्ट्र प्रेस
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