बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुस्लिम आरक्षण रद्द करने वाली याचिका पर सुनवाई को टाला, अगली तारीख 2 अप्रैल
सारांश
Key Takeaways
- बॉम्बे हाई कोर्ट में मुस्लिम आरक्षण पर महत्वपूर्ण सुनवाई।
- सरकार का निर्णय संविधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करार दिया गया।
- 2 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई, जहां याचिकाकर्ता अपने दावे पेश करेंगे।
- आरक्षण रद्द होने से समुदाय में अनिश्चितता।
- सामाजिक न्याय और आरक्षण की नीति पर गहरी बहस।
मुंबई, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई की, जो महाराष्ट्र सरकार के उस निर्णय को चुनौती देती है, जिसमें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समुदायों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 5 प्रतिशत आरक्षण समाप्त कर दिया गया था।
यह निर्णय फरवरी 2026 में लिया गया, जब सरकार ने 17 फरवरी को एक शासनादेश जारी कर 2014 के पुराने अध्यादेश को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया, जिसकी वैधता और समय सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी थी और उस पर अदालत द्वारा रोक लगाई जा चुकी थी।
याचिका में यह दावा किया गया है कि यह कदम संविधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है और मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ है। याचिकाकर्ता ने सरकार के निर्णय को रद्द करने और अंतरिम राहत के रूप में इस आरक्षण को फिर से बहाल करने की मांग की थी। अधिवक्ता एजाज नकवी द्वारा दायर इस जनहित याचिका का समर्थन मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता या उनके प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित नहीं हो सके। इस वजह से हाई कोर्ट ने याचिका पर आगे की कार्रवाई नहीं की और याचिकाकर्ता को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से या अपने वकील के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 2 अप्रैल निर्धारित की है, जब इस मामले में विस्तृत बहस की जा सकेगी।
यह विवाद महाराष्ट्र में लंबे समय से चल रहे आरक्षण मुद्दे का हिस्सा है। 2014 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने मुस्लिम समुदाय के कुछ विशेष पिछड़े वर्गों को विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी-ए) के तहत 5 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया था। लेकिन, बॉम्बे हाई कोर्ट ने नवंबर 2014 में ही इस पर रोक लगा दी थी। बाद में, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस आरक्षण को अमान्य ठहराया था। महायुति सरकार ने इसे औपचारिक रूप से रद्द कर दिया, जिसके खिलाफ यह नई याचिका दायर की गई।
अगली सुनवाई में कोर्ट इस बात पर गौर करेगा कि क्या यह निर्णय संविधानिक है या नहीं। फिलहाल आरक्षण रद्द होने से प्रभावित समुदाय के छात्रों और नौकरी चाहने वालों में अनिश्चितता बनी हुई है। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी, जहां याचिकाकर्ता को अपने दावों को मजबूती से पेश करना होगा।