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कलकत्ता हाई कोर्ट का सख्त आदेश: लाइसेंस के बिना पश्चिम बंगाल में जानवरों की बिक्री बंद

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कलकत्ता हाई कोर्ट का सख्त आदेश: लाइसेंस के बिना पश्चिम बंगाल में जानवरों की बिक्री बंद

सारांश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया — गैलिफ स्ट्रीट के 600 से अधिक व्यापारी बरसों से बिना लाइसेंस के काम कर रहे थे, और अब यह चलेगा नहीं। लाइसेंस मिलने तक पशु-बिक्री पर रोक, 14 अक्टूबर तक रिपोर्ट तलब।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 को आदेश दिया कि पश्चिम बंगाल में वैध लाइसेंस के बिना जानवरों की बिक्री पूरी तरह बंद रहेगी।
चीफ जस्टिस रवींद्र वी.
घुगे और जस्टिस ओम नारायण राय की डिवीजन बेंच ने यह निर्देश स्वतः संज्ञान मामले में दिया।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि गैलिफ स्ट्रीट के किसी भी व्यापारी के पास राज्य पशु कल्याण बोर्ड का लाइसेंस नहीं है।
बाज़ार में 600 से अधिक व्यापारी वर्षों से बिना लाइसेंस के कारोबार कर रहे थे।
सभी पक्षों को 14 अक्टूबर तक अदालत में रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
इससे पहले 16 सितंबर को अदालत ने राज्यभर के पशु बाज़ारों में कड़ी निगरानी का आदेश दिया था।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को स्पष्ट निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल में वैध लाइसेंस के बिना किसी भी जानवर की बिक्री नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि कोलकाता की प्रसिद्ध गैलिफ स्ट्रीट मार्केट सहित राज्य के अन्य बाज़ारों में पशु व्यापार तभी संभव होगा जब वह वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 और अन्य प्रासंगिक कानूनों का पूरी तरह पालन करे।

मामले की पृष्ठभूमि

यह आदेश एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान आया। चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस ओम नारायण राय की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जाँचे कि व्यापारियों के पास पशु-बिक्री के लिए आवश्यक लाइसेंस हैं या नहीं, और नियमों का अनुपालन सुनिश्चित होने के बाद ही व्यापार की अनुमति दे। अदालत ने सभी पक्षों को 14 अक्टूबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।

व्यापारियों का पक्ष

गैलिफ स्ट्रीट के व्यापारियों की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वहाँ होने वाले कारोबार के लिए लाइसेंस की कोई अनिवार्यता नहीं है और 600 से अधिक व्यापारी कई वर्षों से यह व्यवसाय चला रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी दुर्लभ या संरक्षित प्रजाति का व्यापार नहीं हो रहा। वकील ने सुझाव दिया कि अवैध व्यापार की जाँच के लिए वन विभाग के अधिकारियों को पुलिस के साथ तैनात किया जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई से बाज़ार में लगभग सभी व्यावसायिक गतिविधियाँ ठप हो गई थीं और सजावटी मछलियों, कुत्तों व पौधों की बिक्री कानूनी प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आती।

राज्य सरकार की स्वीकारोक्ति

राज्य प्रशासन की ओर से अधिवक्ता सैकत बनर्जी ने अदालत को बताया कि राज्य पशु कल्याण बोर्ड द्वारा जारी लाइसेंस किसी भी व्यापारी के पास नहीं है। यह स्वीकारोक्ति महत्त्वपूर्ण रही, क्योंकि इससे स्पष्ट हुआ कि बाज़ार में वर्षों से बिना किसी नियामकीय निगरानी के कारोबार चल रहा था।

अदालत की टिप्पणियाँ और आदेश

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि व्यापारियों ने फुटपाथ पर कब्जा कर लिया है, जिससे आम नागरिकों को असुविधा हो रही है। बेंच ने सवाल उठाया कि इन व्यापारियों पर अब तक कोई नियामकीय निगरानी क्यों नहीं थी। चीफ जस्टिस घुगे ने आदेश दिया कि सभी व्यापारी अनिवार्य रूप से लाइसेंस प्राप्त करें और जब तक लाइसेंस नहीं मिल जाता, पुलिस पशु-बिक्री की अनुमति नहीं देगी।

पिछले आदेश का संदर्भ

गौरतलब है कि इससे पहले 16 सितंबर को चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की बेंच ने गैलिफ स्ट्रीट सहित राज्यभर के पशु बाज़ारों पर कड़ी निगरानी रखने और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों व राज्य-नामित अधिकारियों को संयुक्त रूप से नियम लागू करने का निर्देश दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में अवैध पशु व्यापार और पशु क्रूरता को लेकर न्यायिक सक्रियता बढ़ रही है। वर्तमान आदेश उस निर्देश का स्वाभाविक विस्तार है, जो अब सीधे लाइसेंसिंग अनुपालन पर केंद्रित हो गया है।

अगली सुनवाई में अदालत राज्य सरकार और व्यापारियों द्वारा दाखिल रिपोर्टों के आधार पर आगे का निर्णय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नियामकीय अनुपस्थिति की स्वीकारोक्ति है। असली सवाल यह है कि क्या 14 अक्टूबर की समयसीमा में राज्य पशु कल्याण बोर्ड की लाइसेंसिंग प्रणाली इतनी सुचारू है कि सैकड़ों व्यापारी कानूनी दायरे में आ सकें — या यह आदेश व्यावहारिक रूप से एक अनिश्चितकालीन रोक में बदल जाएगा। न्यायिक सक्रियता ज़रूरी थी, लेकिन बिना क्रियान्वयन-तंत्र के यह केवल कागज़ी निर्देश बनकर रह सकती है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाई कोर्ट ने जानवरों की बिक्री पर क्या आदेश दिया?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 को आदेश दिया कि पश्चिम बंगाल में वैध लाइसेंस के बिना किसी भी जानवर की बिक्री नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि लाइसेंस मिलने के बाद ही पुलिस पशु-बिक्री की अनुमति देगी।
गैलिफ स्ट्रीट मार्केट पर इस आदेश का क्या असर होगा?
गैलिफ स्ट्रीट के 600 से अधिक व्यापारियों में से किसी के पास भी राज्य पशु कल्याण बोर्ड का लाइसेंस नहीं है, इसलिए उन्हें तत्काल लाइसेंस प्राप्त करना होगा। लाइसेंस मिलने तक उनकी पशु-बिक्री की गतिविधियाँ रुकी रह सकती हैं।
इस मामले में अगली सुनवाई कब है?
अदालत ने सभी पक्षों को 14 अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। उसके बाद अदालत आगे का आदेश देगी।
क्या सजावटी मछलियाँ और पालतू कुत्ते भी इस प्रतिबंध के दायरे में आते हैं?
व्यापारियों के वकील ने तर्क दिया कि सजावटी मछलियों, कुत्तों और पौधों की बिक्री कानूनी प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आती। हालाँकि अदालत ने लाइसेंस अनिवार्यता का आदेश सभी पशु-व्यापार पर लागू किया है और इस विषय पर रिपोर्ट तलब की है।
वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के तहत पशु-बिक्री के लिए क्या नियम हैं?
वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के तहत संरक्षित और दुर्लभ प्रजातियों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। अन्य जानवरों के व्यापार के लिए राज्य नियामक संस्थाओं से लाइसेंस अनिवार्य है, जिसकी अनुपालना अदालत ने अब सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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