कलकत्ता हाई कोर्ट का सख्त आदेश: लाइसेंस के बिना पश्चिम बंगाल में जानवरों की बिक्री बंद
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को स्पष्ट निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल में वैध लाइसेंस के बिना किसी भी जानवर की बिक्री नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि कोलकाता की प्रसिद्ध गैलिफ स्ट्रीट मार्केट सहित राज्य के अन्य बाज़ारों में पशु व्यापार तभी संभव होगा जब वह वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 और अन्य प्रासंगिक कानूनों का पूरी तरह पालन करे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह आदेश एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान आया। चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस ओम नारायण राय की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जाँचे कि व्यापारियों के पास पशु-बिक्री के लिए आवश्यक लाइसेंस हैं या नहीं, और नियमों का अनुपालन सुनिश्चित होने के बाद ही व्यापार की अनुमति दे। अदालत ने सभी पक्षों को 14 अक्टूबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।
व्यापारियों का पक्ष
गैलिफ स्ट्रीट के व्यापारियों की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वहाँ होने वाले कारोबार के लिए लाइसेंस की कोई अनिवार्यता नहीं है और 600 से अधिक व्यापारी कई वर्षों से यह व्यवसाय चला रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी दुर्लभ या संरक्षित प्रजाति का व्यापार नहीं हो रहा। वकील ने सुझाव दिया कि अवैध व्यापार की जाँच के लिए वन विभाग के अधिकारियों को पुलिस के साथ तैनात किया जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई से बाज़ार में लगभग सभी व्यावसायिक गतिविधियाँ ठप हो गई थीं और सजावटी मछलियों, कुत्तों व पौधों की बिक्री कानूनी प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आती।
राज्य सरकार की स्वीकारोक्ति
राज्य प्रशासन की ओर से अधिवक्ता सैकत बनर्जी ने अदालत को बताया कि राज्य पशु कल्याण बोर्ड द्वारा जारी लाइसेंस किसी भी व्यापारी के पास नहीं है। यह स्वीकारोक्ति महत्त्वपूर्ण रही, क्योंकि इससे स्पष्ट हुआ कि बाज़ार में वर्षों से बिना किसी नियामकीय निगरानी के कारोबार चल रहा था।
अदालत की टिप्पणियाँ और आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि व्यापारियों ने फुटपाथ पर कब्जा कर लिया है, जिससे आम नागरिकों को असुविधा हो रही है। बेंच ने सवाल उठाया कि इन व्यापारियों पर अब तक कोई नियामकीय निगरानी क्यों नहीं थी। चीफ जस्टिस घुगे ने आदेश दिया कि सभी व्यापारी अनिवार्य रूप से लाइसेंस प्राप्त करें और जब तक लाइसेंस नहीं मिल जाता, पुलिस पशु-बिक्री की अनुमति नहीं देगी।
पिछले आदेश का संदर्भ
गौरतलब है कि इससे पहले 16 सितंबर को चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की बेंच ने गैलिफ स्ट्रीट सहित राज्यभर के पशु बाज़ारों पर कड़ी निगरानी रखने और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों व राज्य-नामित अधिकारियों को संयुक्त रूप से नियम लागू करने का निर्देश दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में अवैध पशु व्यापार और पशु क्रूरता को लेकर न्यायिक सक्रियता बढ़ रही है। वर्तमान आदेश उस निर्देश का स्वाभाविक विस्तार है, जो अब सीधे लाइसेंसिंग अनुपालन पर केंद्रित हो गया है।
अगली सुनवाई में अदालत राज्य सरकार और व्यापारियों द्वारा दाखिल रिपोर्टों के आधार पर आगे का निर्णय करेगी।