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कुर्बानी विवाद: याचिकाकर्ता अख्रुज्जमान ने कोलकाता उच्च न्यायालय में माँगी छूट, TMC नेता ने BJP पर साधा निशाना

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कुर्बानी विवाद: याचिकाकर्ता अख्रुज्जमान ने कोलकाता उच्च न्यायालय में माँगी छूट, TMC नेता ने BJP पर साधा निशाना

सारांश

कुर्बानी की अनुमति के लिए कोलकाता उच्च न्यायालय पहुँचे याचिकाकर्ता अख्रुज्जमान का कहना है कि बंगाल सरकार ने उनके पत्र पर ध्यान नहीं दिया, इसलिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा। TMC नेता कुणाल घोष ने केंद्र की पशु-निर्यात नीति को विरोधाभासी बताया।

मुख्य बातें

याचिकाकर्ता अख्रुज्जमान ने कोलकाता उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में कुर्बानी की अनुमति के लिए याचिका दायर की।
पश्चिम बंगाल सरकार के 13 मई के नोटिस में बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 और उच्च न्यायालय के पूर्व फैसले का पालन अनिवार्य किया गया।
14 वर्ष से अधिक आयु के पशुओं की कुर्बानी के लिए मेडिकल जाँच और प्रमाण-पत्र अनिवार्य है।
याचिका में धारा 12 के तहत धार्मिक छूट की माँग की गई है, कानून को चुनौती नहीं दी गई।
TMC नेता कुणाल घोष ने कहा कि केंद्र सरकार विदेशी मुद्रा के लिए पशु-निर्यात कर रही है जबकि बंगाल में कुर्बानी पर रोक की बात हो रही है।

कोलकाता उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में कुर्बानी को लेकर याचिका दायर करने वाले अख्रुज्जमान ने 22 मई को कहा कि उन्होंने राज्य सरकार से बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 की धारा 12 के तहत धार्मिक छूट की माँग की है। उनका कहना है कि सरकार के 13 मई के नोटिस पर संज्ञान न लेने के बाद उन्हें अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा।

मुख्य घटनाक्रम

अख्रुज्जमान के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर स्पष्ट किया था कि 1950 के अधिनियम और उच्च न्यायालय के पूर्व फैसले का पालन अनिवार्य होगा। इस नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया कि 14 वर्ष से अधिक आयु के पशुओं की कुर्बानी तभी दी जा सकेगी जब मेडिकल जाँच के बाद उन्हें प्रमाण-पत्र मिले।

अख्रुज्जमान ने बताया कि उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर धारा 12 का हवाला दिया, जो धार्मिक और विशेष उद्देश्यों के लिए छूट का प्रावधान करती है। जब सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया, तब उन्होंने कोलकाता उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में याचिका दायर की।

TMC की प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता कुणाल घोष ने कहा कि संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि याचिका में कानून को चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि केवल छूट की माँग की गई है।

घोष ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर बंगाल में कुर्बानी पर रोक की बात हो रही है, दूसरी ओर केंद्र सरकार विदेशी मुद्रा अर्जन के लिए इन्हीं पशुओं का निर्यात कर रही है। उनके अनुसार, यह नीतिगत विरोधाभास समझ से परे है।

कानूनी पहलू

बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 की धारा 12 के अंतर्गत राज्य सरकार को धार्मिक और कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट देने का अधिकार है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सरकार इस प्रावधान का उपयोग कर सकती है और उन्होंने इसी आधार पर राहत माँगी है।

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में उच्च न्यायालय पहुँचा है जब ईद-उल-अजहा नज़दीक है और कुर्बानी की अनुमति को लेकर राज्य में धार्मिक भावनाएँ संवेदनशील हैं।

आम जनता पर असर

अख्रुज्जमान ने कहा कि बहुत से परिवार साल भर पशुओं का पालन-पोषण करते हैं और कुर्बानी उनके धार्मिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। मेडिकल प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता और 14 वर्ष की आयु-सीमा को वे व्यावहारिक रूप से कठिन मानते हैं।

क्या होगा आगे

मामला अब कोलकाता उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच के समक्ष है। अदालत का अगला फैसला यह तय करेगा कि राज्य सरकार को 1950 के अधिनियम के तहत धार्मिक छूट देने का निर्देश दिया जाए या नहीं। इस फैसले का असर पश्चिम बंगाल में आगामी त्योहारी कुर्बानी की प्रक्रिया पर पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक वास्तविक नीतिगत असंगति की ओर इशारा करता है जिसका जवाब अभी तक नहीं दिया गया। अदालत का फैसला एक मिसाल बनेगा — विशेष रूप से इसलिए कि धारा 12 की व्याख्या पहले भी विवादित रही है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नज़रअंदाज़ कर रही है कि यह याचिका कानून को चुनौती नहीं देती, बल्कि उसी कानून के भीतर मौजूद प्रावधान का उपयोग करने की माँग करती है — जो कानूनी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण अंतर है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अख्रुज्जमान ने कोलकाता उच्च न्यायालय में याचिका क्यों दायर की?
अख्रुज्जमान ने कुर्बानी की अनुमति के लिए याचिका दायर की क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार ने उनके पत्र पर कोई संज्ञान नहीं लिया। उन्होंने 13 मई के सरकारी नोटिस के बाद राज्य सरकार को पत्र लिखकर 1950 के अधिनियम की धारा 12 के तहत धार्मिक छूट माँगी थी।
बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 की धारा 12 क्या कहती है?
धारा 12 के तहत राज्य सरकार को धार्मिक उद्देश्यों और कुछ विशेष मामलों में पशु वध से संबंधित नियमों में छूट देने का अधिकार है। याचिकाकर्ताओं ने इसी प्रावधान का हवाला देते हुए कुर्बानी की अनुमति माँगी है।
14 वर्ष से अधिक आयु के पशुओं पर क्या नियम लागू हैं?
सरकारी नोटिफिकेशन के अनुसार, 14 वर्ष से अधिक आयु के पशुओं की कुर्बानी तभी दी जा सकेगी जब उनकी मेडिकल जाँच के बाद प्रमाण-पत्र प्राप्त हो। याचिकाकर्ता इस शर्त को व्यावहारिक रूप से कठिन मानते हैं।
TMC नेता कुणाल घोष ने BJP पर क्या आरोप लगाया?
कुणाल घोष ने कहा कि बंगाल में कुर्बानी पर रोक की बात हो रही है, जबकि केंद्र सरकार विदेशी मुद्रा अर्जन के लिए इन्हीं पशुओं का निर्यात कर रही है। उन्होंने इसे BJP की नीतिगत विरोधाभासिता बताया।
इस मामले में आगे क्या होगा?
मामला अब कोलकाता उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच के समक्ष है। अदालत का फैसला तय करेगा कि राज्य सरकार 1950 के अधिनियम की धारा 12 के तहत धार्मिक छूट देने के लिए बाध्य है या नहीं, जिसका सीधा असर ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी की प्रक्रिया पर पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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