पशु वध नोटिस पर अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल CM को लिखा पत्र, मुर्शिदाबाद में भ्रम दूर करने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने 18 मई 2026 को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य सरकार द्वारा 13 मई 2026 को जारी 'पशु वध दिशा-निर्देश' नोटिस पर स्पष्टता की माँग की। उनका कहना है कि यह नोटिस विशेष रूप से मुर्शिदाबाद जिले में अल्पसंख्यक समुदायों के बीच भ्रम और असंतोष का कारण बन रहा है।
नोटिस में क्या है
पश्चिम बंगाल सरकार ने 13 मई 2026 को एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर बैल, बछड़ा, गाय, भैंस और अन्य पशुओं के वध से पहले अनिवार्य प्रमाणपत्र लेने का आदेश दिया। इसके साथ ही इन पशुओं का सार्वजनिक स्थानों पर वध प्रतिबंधित किया गया और निरीक्षण अधिकारियों के कार्य में बाधा न डालने की हिदायत दी गई।
चौधरी की आपत्ति और माँग
चौधरी ने अपने पत्र में लिखा, 'मैं आपका ध्यान इस बात की ओर दिलाना चाहता हूँ कि 13 मई 2026 को जारी पशु वध दिशा-निर्देश से संबंधित सार्वजनिक नोटिस के कारण लोगों में भ्रम और असंतोष पैदा हो रहा है, जिसे दूर करने की ज़रूरत है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पश्चिम बंगाल एक बहुसमुदायिक राज्य है जहाँ लोग अपनी धार्मिक आस्थाओं के अनुरूप सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करते हैं।
चौधरी ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक-बहुल जिलों में जिला प्रशासन विशेष स्थानों की पहचान और सीमांकन करे, जहाँ समुदाय अपने धार्मिक और पारंपरिक रीति-रिवाज बिना किसी परेशानी के निभा सकें।
मुर्शिदाबाद पर विशेष चिंता
चौधरी ने अपने पत्र में मुर्शिदाबाद का विशेष उल्लेख किया, जो अल्पसंख्यक आबादी की दृष्टि से राज्य के सबसे संवेदनशील जिलों में से एक है। उनका तर्क है कि बिना स्पष्ट दिशा-निर्देशों के जारी किया गया यह नोटिस वहाँ के समुदायों में अनावश्यक बेचैनी पैदा कर रहा है। उन्होंने सुझाया कि चिन्हित स्थानों का उपयोग केवल धार्मिक और पारंपरिक गतिविधियों के लिए किया जाए।
राजनीतिक संदर्भ
यह पत्र ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में पशु वध से जुड़े नियमों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट करने में लगे हैं। गौरतलब है कि मुर्शिदाबाद ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस का गढ़ रहा है और चौधरी का यह कदम राजनीतिक रूप से भी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
चौधरी ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई है ताकि जिले में फैल रही बेचैनी और भ्रम को समाप्त किया जा सके। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या नोटिस में कोई संशोधन या स्पष्टीकरण जारी किया जाता है।