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'सीएपीएफ विधेयक: जवानों के भविष्य को खतरे में डाल रही सरकार', दीपेंद्र हुड्डा का आरोप

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'सीएपीएफ विधेयक: जवानों के भविष्य को खतरे में डाल रही सरकार', दीपेंद्र हुड्डा का आरोप

सारांश

दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) विधेयक पर गहरा राजनीतिक विवाद हो गया है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसे जवानों के भविष्य के खिलाफ करार दिया है। जानिए इस विधेयक के चर्चित पहलुओं के बारे में।

मुख्य बातें

दीपेंद्र हुड्डा का सरकार पर आरोप जवानों के भविष्य के खिलाफ विधेयक लाने का है।
विधेयक सीआरपीएफ , बीएसएफ , आईटीबीपी के करियर को प्रभावित करता है।
गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति ने सवाल खड़े किए हैं।
विपक्ष ने विधेयक के खिलाफ वॉकआउट किया।
गृह राज्यमंत्री का कहना है कि यह विधेयक संघीय ढांचे को मजबूत करता है।

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) से संबंधित प्रस्तावित विधेयक के कारण दिल्ली में राजनीतिक विवाद और गहरा होता जा रहा है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह कानून जवानों के भविष्य के लिए एक खतरा है।

दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने ऐसा विधेयक पेश किया है, जो सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, और एसएसबी जैसे सभी सीएपीएफ बलों के कर्मियों के करियर के विकास के रास्ते को बंद कर देता है। यह विधेयक न केवल जवानों के पदोन्नति और अवसरों को सीमित करता है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी नजरअंदाज करता है, जिससे सभी जवानों के भविष्य की संभावनाएं सीमित हो गई हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह का सदन में अनुपस्थित रहना गंभीर चिंता का विषय है। गृह मंत्री को इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सदन में उपस्थित होकर स्पष्टता प्रदान करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने इस पर चर्चा करना आवश्यक नहीं समझा।

हुड्डा ने कहा कि 31 मार्च को अमित शाह ने देश में नक्सलवाद समाप्त करने की घोषणा की थी, लेकिन अब उसी सरकार ने उन सीएपीएफ जवानों और अधिकारियों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है, जो नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी विरोध के कारण कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया।

गौरतलब है कि राज्यसभा में बुधवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित किया गया। इस दौरान विपक्ष ने वॉकआउट किया। विपक्ष चाहता था कि विधेयक को आगे विचार-विमर्श के लिए चयन समिति के पास भेजा जाए। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे और संविधान की भावना के खिलाफ नहीं है। यह संघीय ढांचे को और मजबूत करता है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल राज्य और प्रशासन के साथ समन्वय में कार्य करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो जवानों के करियर के अवसरों को सीमित करने का आरोप झेल रहा है, महत्वपूर्ण सवालों को जन्म देता है। क्या इसे पारित करना उचित है? यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे देश का विषय है।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएपीएफ विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
सीएपीएफ विधेयक का उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कार्यप्रणाली को सुधारना और उन्हें अधिक सक्षम बनाना है।
दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर क्या आरोप लगाया?
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि यह विधेयक जवानों के करियर के अवसरों को सीमित करता है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करता है।
गृह मंत्री अमित शाह का इस मुद्दे पर क्या कहना था?
अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सीएपीएफ के योगदान की सराहना की थी, लेकिन विधेयक पर सदन में अनुपस्थित रहे।
विपक्ष ने विधेयक के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
विपक्ष ने विधेयक के खिलाफ वॉकआउट किया और इसे चयन समिति के पास भेजने की मांग की।
क्या यह विधेयक संघीय ढांचे के खिलाफ है?
गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे के खिलाफ नहीं है और इसे मजबूत करता है।
राष्ट्र प्रेस
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