शशि थरूर ने अमित शाह को सीएपीएफ (जीए) विधेयक 2026 पर पत्र लिखा

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शशि थरूर ने अमित शाह को सीएपीएफ (जीए) विधेयक 2026 पर पत्र लिखा

सारांश

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीएपीएफ (जीए) विधेयक 2026 के संदर्भ में पत्र लिखा है। जानिए पत्र में उठाए गए मुद्दों और सांसद के विचारों के बारे में।

Key Takeaways

  • सीएपीएफ (जीए) विधेयक 2026 में कर्मियों की सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दे हैं।
  • शशि थरूर ने पूर्व सैनिकों की चिंताओं को उठाया है।
  • पत्र में करियर में ठहराव और पदोन्नति में असमानता की बात की गई है।
  • इस विधेयक का उद्देश्य आईपीएस प्रतिनियुक्ति को औपचारिकता देना है।
  • कर्मियों के बीच सेवा की निरंतरता का मुद्दा भी उठाया गया है।

नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस सांसद शशि थरूर, जो केरल के तिरुवनंतपुरम से हैं, ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक महत्वपूर्ण पोस्ट की। उन्होंने 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026' के संदर्भ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे गए पत्र को साझा किया।

शशि थरूर ने कहा कि जब संसद अगले सप्ताह इस विधेयक पर विचार करेगी, तब वे गृह मंत्री को लिखा अपना पत्र साझा कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने सीएपीएफ के पूर्व सैनिकों द्वारा प्रस्तुत एक अभ्यावेदन को शामिल किया है। इस अभ्यावेदन में सेवा-संबंधी और संस्थागत मामलों से जुड़े कई मुद्दों का उल्लेख किया गया है, और उन्होंने अनुरोध किया है कि उनकी चिंताओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए।

शशि थरूर द्वारा साझा किए गए पत्र में लिखा गया है कि वे एक चिंताजनक ज्ञापन के बारे में बताना चाहते हैं, जिसे उन्हें 'एलायंस ऑफ ऑल एक्स-पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन' (एएपीडब्ल्यूए) से प्राप्त हुआ है। यह एसोसिएशन सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल्स के बीस लाख से अधिक सदस्यों का प्रतिनिधित्व करता है, और ज्ञापन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के कर्मियों की सेवा शर्तों और संस्थागत स्थिति से संबंधित है।

ज्ञापन में 23 मई, 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कार्यान्वयन को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। इस फैसले में सीएपीएफ के एग्जीक्यूटिव कैडर के अधिकारियों को 'संगठित ग्रुप ए सेवा' का दर्जा दिया गया था। इस निर्देश में कहा गया था कि एक निश्चित समय सीमा के भीतर इंस्पेक्टर जनरल के पद तक के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम किया जाए। हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप अवमानना याचिका दायर की गई है।

पत्र में आगे यह भी कहा गया है कि इसमें करियर में स्थिरता के मुद्दे पर ध्यान दिया गया है। इसमें यह बताया गया है कि सीआरपीएफ और बीएसएफ में 2008 बैच के असिस्टेंट कमांडेंट, पंद्रह वर्षों से अधिक की सेवा के बावजूद अभी तक डिप्टी कमांडेंट के पद पर पदोन्नत नहीं हुए हैं। इसके विपरीत, जूनियर बैचों के आईपीएस अधिकारियों को सीएपीएफ में वरिष्ठ पदों पर लगातार पदस्थ किया जा रहा है, जिससे कैडर में असंतोष बढ़ रहा है। इसके अलावा, प्रस्तावित सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन और विनियमन) विधेयक, 2026 ने वर्तमान और पूर्व कर्मियों के बीच चिंता को जन्म दिया है। यह माना जा रहा है कि यह विधेयक वरिष्ठ स्तरों पर आईपीएस प्रतिनियुक्ति को जारी रखने को औपचारिकता देगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने धीरे-धीरे युक्तिसंगत करने का निर्देश दिया था।

सीएपीएफ में प्रतिनियुक्ति-आधारित नेतृत्व संरचनाओं की निरंतरता पर भी चिंता व्यक्त की गई है। कर्मियों के बीच यह भावना है कि सेवा की सीमित निरंतरता और विभिन्न संस्थागत पृष्ठभूमि कभी-कभी परिचालन सहयोग और बल के दीर्घकालिक विकास को प्रभावित कर सकती हैं।

Point of View

बल्कि यह भी बताता है कि सरकारी नीतियों में सुधार की आवश्यकता है।
NationPress
22/03/2026

Frequently Asked Questions

सीएपीएफ (जीए) विधेयक 2026 क्या है?
यह विधेयक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के सामान्य प्रशासन से संबंधित है और इसमें कर्मियों की सेवा शर्तों को सुधारने का प्रस्ताव है।
शशि थरूर ने पत्र में क्या मुद्दे उठाए?
उन्होंने पूर्व सैनिकों के सेवा संबंधी मुद्दों और कार्यान्वयन में बाधाओं को उजागर किया है।
यह पत्र किसने लिखा है?
यह पत्र कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा है।
पत्र में क्या चिंताएं व्यक्त की गई हैं?
पत्र में करियर में ठहराव, आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति में असमानता और सीएपीएफ के भीतर प्रतिनियुक्ति-आधारित संरचनाओं पर चिंता व्यक्त की गई है।
क्या इस विधेयक का प्रभाव होगा?
इस विधेयक के माध्यम से सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों के बीच स्थिति में सुधार की संभावना है।
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