अंग दान में तमिलनाडु देश में अव्वल, भारत के कुल दान का एक-तिहाई हिस्सा: मंत्री केजी अरुण राज
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मंत्री केजी अरुण राज ने 3 अगस्त 2025 को कोयंबटूर में आयोजित 'लाइफ आफ्टर लाइफ' अंग दाता सम्मान समारोह के बाद घोषणा की कि तमिलनाडु 'मृत्यु के बाद अंग दान' के मामले में पूरे देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत में होने वाले कुल अंग दान का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अकेले तमिलनाडु से आता है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रांसप्लांटेशन प्रणाली में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वॉल ऑफ ऑनर: दाताओं को श्रद्धांजलि
समारोह में अरुण राज ने उन अंग दाताओं को समर्पित 'वॉल ऑफ ऑनर' का उद्घाटन किया, जिनके अंगों ने प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे गंभीर रूप से बीमार मरीजों की जान बचाई या उनकी जिंदगी बदली। मंत्री ने इस अवसर को अत्यंत भावुक बताया और कहा कि उनके अपने परिवार ने भी इसी तरह का व्यक्तिगत नुकसान झेला है, जिससे यह पल उनके लिए और भी विशेष बन गया। उन्होंने कहा कि अंग दाता मानवता का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, क्योंकि वे अपनी मृत्यु के बाद भी दूसरों को जीवन देते हैं।
किडनी चोरी के बाद प्रक्रियाएँ हुईं सख्त
ट्रांसप्लांटेशन प्रणाली से जुड़ी चिंताओं पर बोलते हुए अरुण राज ने बताया कि किडनी चोरी के मामले सामने आने के बाद सरकार ने संबंधित प्रक्रियाओं को काफी कड़ा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता या सुरक्षा उपायों से कोई समझौता किए बिना अंग दान और प्रत्यारोपण की प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई है और जहाँ आवश्यक था, उन्हें सुव्यवस्थित किया गया है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रक्रियात्मक बाधाओं को कम करने का अर्थ जाँच-पड़ताल में ढील देना नहीं है।
गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
अरुण राज ने चेतावनी दी कि अंग दान या प्रत्यारोपण से जुड़ी किसी भी अनियमितता में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी अस्पताल, संस्थान या संगठन के विरुद्ध सरकार कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ट्रांसप्लांटेशन कार्यक्रम में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि यह प्रणाली काफी हद तक शोक संतप्त परिवारों की सहमति पर निर्भर करती है।
दाता परिवारों का योगदान अमूल्य
मंत्री ने कहा कि दान देने वाले परिवारों का योगदान सम्मान का हकदार है, क्योंकि उनके निर्णय — जो अक्सर गहरे दुख के क्षणों में लिए जाते हैं — गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नया जीवन देते हैं। 'लाइफ आफ्टर लाइफ' कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल दाताओं और उनके परिवारों का सम्मान करना था, बल्कि समाज में अंग दान के महत्व के प्रति जागरूकता भी बढ़ाना था। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब देश में अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची लंबी बनी हुई है और तमिलनाडु का यह नेतृत्व अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है।