भारत में अंगदान संकल्पों ने पार किया 5 लाख का आंकड़ा, NOTO ने बताया ऐतिहासिक पड़ाव
सारांश
मुख्य बातें
भारत के अंगदान अभियान ने 22 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया, जब देश में स्वैच्छिक अंगदान संकल्पों की संख्या 5 लाख से अधिक हो गई। नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTO) ने इसे नागरिकों की बढ़ती जागरूकता और सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया है, जो अंग और ऊतक दान जैसे जीवनरक्षक कार्य के प्रति समाज के बदलते नज़रिए को दर्शाता है।
मुख्य घटनाक्रम
NOTO के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने इस उपलब्धि पर देशभर के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों, स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों, शैक्षणिक संस्थानों तथा मीडिया संगठनों की भूमिका को रेखांकित किया, जिन्होंने जागरूकता फैलाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन की निरंतर प्रतिबद्धता की भी सराहना की।
आधार-आधारित पोर्टल की भूमिका
इस उपलब्धि में आधार-आधारित अंगदान संकल्प पंजीकरण पोर्टल की केंद्रीय भूमिका रही है। इस प्लेटफॉर्म ने पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सुलभ, सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है, जिससे देशभर के नागरिक आसानी से अपना संकल्प दर्ज कर सके। विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल सुविधा ने अंगदान पारिस्थितिकी तंत्र में जनभागीदारी और विश्वास दोनों को मज़बूत किया है।
PM मोदी की 'मन की बात' से मिली प्रेरणा
हाल के वर्षों में अंगदान अभियान को नई गति मिली है, जिसका एक बड़ा कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' कार्यक्रम में की गई प्रेरणादायक अपीलें हैं। कई अवसरों पर प्रधानमंत्री ने अंगदान के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डाला और नागरिकों से इस नेक कार्य में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।
सरकार की प्रतिबद्धता और आगे की राह
केंद्र सरकार जागरूकता अभियानों, संस्थागत क्षमता विस्तार और प्रत्यारोपण प्रणालियों को सुदृढ़ करके अंगों की माँग और उपलब्धता के बीच की खाई पाटने के प्रयासों में जुटी है। सरकार का ज़ोर इस बात पर है कि अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रियाएँ देशभर में नैतिक, न्यायसंगत, पारदर्शी और मरीज़-केंद्रित बनी रहें। यह उपलब्धि प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे लाखों मरीज़ों के लिए उम्मीद की किरण है और भारत के अंगदान इकोसिस्टम को और मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।