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भारत में अंगदान संकल्पों ने पार किया 5 लाख का आंकड़ा, NOTO ने बताया ऐतिहासिक पड़ाव

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भारत में अंगदान संकल्पों ने पार किया 5 लाख का आंकड़ा, NOTO ने बताया ऐतिहासिक पड़ाव

सारांश

भारत के अंगदान अभियान ने 5 लाख संकल्पों का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। आधार-आधारित पोर्टल और 'मन की बात' की अपीलों ने इस अभियान को नई रफ़्तार दी। यह उपलब्धि प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में जीवन गिन रहे हज़ारों मरीज़ों के लिए उम्मीद की नई किरण है।

मुख्य बातें

भारत में स्वैच्छिक अंगदान संकल्पों की संख्या 5 लाख से अधिक हो गई — एक ऐतिहासिक पड़ाव।
अनिल कुमार ने नागरिकों, राज्य सरकारों, NGOs और स्वास्थ्य पेशेवरों के योगदान की सराहना की।
आधार-आधारित अंगदान पंजीकरण पोर्टल ने प्रक्रिया को सुलभ, सुरक्षित और पारदर्शी बनाकर जनभागीदारी बढ़ाई।
PM नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' अपीलों को हाल के वर्षों में अभियान को गति देने का श्रेय दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार अंगों की माँग और उपलब्धता के बीच की खाई पाटने के लिए संस्थागत क्षमता और प्रत्यारोपण प्रणालियों को मज़बूत करने पर केंद्रित है।

भारत के अंगदान अभियान ने 22 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया, जब देश में स्वैच्छिक अंगदान संकल्पों की संख्या 5 लाख से अधिक हो गई। नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTO) ने इसे नागरिकों की बढ़ती जागरूकता और सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया है, जो अंग और ऊतक दान जैसे जीवनरक्षक कार्य के प्रति समाज के बदलते नज़रिए को दर्शाता है।

मुख्य घटनाक्रम

NOTO के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने इस उपलब्धि पर देशभर के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों, स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों, शैक्षणिक संस्थानों तथा मीडिया संगठनों की भूमिका को रेखांकित किया, जिन्होंने जागरूकता फैलाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन की निरंतर प्रतिबद्धता की भी सराहना की।

आधार-आधारित पोर्टल की भूमिका

इस उपलब्धि में आधार-आधारित अंगदान संकल्प पंजीकरण पोर्टल की केंद्रीय भूमिका रही है। इस प्लेटफॉर्म ने पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सुलभ, सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है, जिससे देशभर के नागरिक आसानी से अपना संकल्प दर्ज कर सके। विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल सुविधा ने अंगदान पारिस्थितिकी तंत्र में जनभागीदारी और विश्वास दोनों को मज़बूत किया है।

PM मोदी की 'मन की बात' से मिली प्रेरणा

हाल के वर्षों में अंगदान अभियान को नई गति मिली है, जिसका एक बड़ा कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' कार्यक्रम में की गई प्रेरणादायक अपीलें हैं। कई अवसरों पर प्रधानमंत्री ने अंगदान के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डाला और नागरिकों से इस नेक कार्य में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।

सरकार की प्रतिबद्धता और आगे की राह

केंद्र सरकार जागरूकता अभियानों, संस्थागत क्षमता विस्तार और प्रत्यारोपण प्रणालियों को सुदृढ़ करके अंगों की माँग और उपलब्धता के बीच की खाई पाटने के प्रयासों में जुटी है। सरकार का ज़ोर इस बात पर है कि अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रियाएँ देशभर में नैतिक, न्यायसंगत, पारदर्शी और मरीज़-केंद्रित बनी रहें। यह उपलब्धि प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे लाखों मरीज़ों के लिए उम्मीद की किरण है और भारत के अंगदान इकोसिस्टम को और मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि ये संकल्प वास्तविक अंगदान में कितने तब्दील हो रहे हैं — क्योंकि भारत में अंगदान की वास्तविक दर अभी भी प्रति दस लाख जनसंख्या पर वैश्विक औसत से काफी नीचे है। पंजीकरण और परिवार की सहमति के बीच की खाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसे आंकड़े अक्सर नहीं दर्शाते। डिजिटल पोर्टल और 'मन की बात' जैसे मंच जागरूकता बढ़ाने में सहायक हैं, लेकिन अस्पताल-स्तरीय ब्रेन-डेथ प्रोटोकॉल और परिवार परामर्श तंत्र को मज़बूत किए बिना संकल्पों की संख्या का असर सीमित रह सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में अंगदान संकल्पों की संख्या 5 लाख कैसे पार हुई?
आधार-आधारित अंगदान संकल्प पंजीकरण पोर्टल के ज़रिए पंजीकरण प्रक्रिया को सुलभ और पारदर्शी बनाने, सरकारी जागरूकता अभियानों और PM मोदी की 'मन की बात' अपीलों के संयुक्त प्रयासों से यह आंकड़ा हासिल हुआ। राज्य सरकारों, NGOs और स्वास्थ्य संस्थाओं की भागीदारी ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई।
NOTO क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
NOTO यानी नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन भारत सरकार की वह संस्था है जो देश में अंग और ऊतक दान तथा प्रत्यारोपण की प्रक्रियाओं का समन्वय और नियमन करती है। यह अंगदान पंजीकरण, अंग आवंटन और प्रत्यारोपण केंद्रों की निगरानी का कार्य करती है।
अंगदान संकल्प दर्ज करने की प्रक्रिया क्या है?
नागरिक आधार-आधारित अंगदान संकल्प पंजीकरण पोर्टल पर जाकर अपना संकल्प ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म पर आधार सत्यापन के ज़रिए पंजीकरण सुरक्षित और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे जनभागीदारी बढ़ी है।
अंगदान अभियान में PM मोदी की 'मन की बात' का क्या योगदान रहा है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के कई एपिसोड में अंगदान के परिवर्तनकारी प्रभाव पर ज़ोर दिया और नागरिकों से इस कार्य में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया। इन अपीलों को हाल के वर्षों में अंगदान संकल्पों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
भारत में अंगदान की स्थिति आगे कैसे सुधरेगी?
केंद्र सरकार संस्थागत क्षमता बढ़ाने, प्रत्यारोपण प्रणालियों को सुदृढ़ करने और नैतिक व पारदर्शी प्रक्रियाएँ सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल-स्तरीय ब्रेन-डेथ प्रोटोकॉल और परिवार परामर्श तंत्र को मज़बूत करना भी उतना ही ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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