खनन क्षेत्र को बड़ा बूस्ट: केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए ₹5,000 करोड़ की प्रोत्साहन योजना लॉन्च की
सारांश
Key Takeaways
- खान मंत्रालय ने FY 2026-27 के लिए SASCI योजना में खनन सुधारों हेतु ₹5,000 करोड़ का प्रोत्साहन तंत्र शामिल किया।
- पहले चरण में 15 दिसंबर, 2026 तक पांच सुधार पूरे करने वाले राज्यों को ₹100 करोड़ का प्रोत्साहन मिलेगा।
- सफल खनिज ब्लॉक नीलामी पर प्रति ब्लॉक ₹20 करोड़, अधिकतम ₹200 करोड़ प्रति राज्य का प्रावधान है।
- नीलाम ब्लॉकों में 10%25 उत्पादन शुरू करने पर प्रति राज्य ₹250 करोड़ अतिरिक्त दिए जाएंगे।
- SMRI रैंकिंग में शीर्ष राज्यों को ₹100 करोड़, ₹75 करोड़ और ₹50 करोड़ के पुरस्कार मिलेंगे।
- झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को इस योजना से सर्वाधिक लाभ की उम्मीद।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल। खान मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए पूंजी निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) में खनन क्षेत्र सुधारों के लिए 5,000 करोड़ रुपए के प्रोत्साहन तंत्र को शामिल किया है। पिछले वित्तीय वर्ष में इस योजना की सफलता के बाद यह निर्णय लिया गया है। इस योजना के परिचालन दिशानिर्देश हाल ही में मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हैं।
योजना का उद्देश्य और महत्व
एसएएससीआई योजना के इस विशेष घटक का मुख्य लक्ष्य खदानों के संचालन को सुगम और त्वरित बनाना है। इसके साथ ही खनिज उत्पादन में वृद्धि, राज्यों के राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी और खनन क्षेत्र के समग्र शासन में सुधार करना भी इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। यह प्रोत्साहन राशि तीन सुधार क्षेत्रों के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (विधानसभा वाले) को प्रदान की जाएगी।
पहला चरण: संचालन सुधार और ₹100 करोड़ का प्रोत्साहन
पहले चरण में राज्यों को 15 दिसंबर, 2026 तक पांच महत्वपूर्ण सुधारात्मक कार्य पूरे करने होंगे। इनमें राज्य के खान विभाग का खान मंत्रालय के एकीकृत खनन पोर्टल के साथ एकीकरण, भूमि निर्धारण संबंधी मुद्दों के सक्रिय समाधान के लिए पूर्व-नीलामी समिति का गठन और खानों की नियमित निगरानी के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन शामिल है।
इसके अतिरिक्त प्रमुख खनिजों के लिए वार्षिक नीलामी कैलेंडर का निर्धारण और खनिज अयस्क के श्रेणीगत वर्गीकरण में त्रुटियों को रोकने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित उपाय अपनाना भी अनिवार्य होगा। इन सभी पांच कार्यों को समय पर पूरा करने वाला राज्य 100 करोड़ रुपए के प्रोत्साहन का पात्र बनेगा।
दूसरा चरण: नीलामी और उत्पादन पर विशेष इनाम
दूसरे घटक के तहत 31 दिसंबर, 2026 तक पूर्व-निर्धारित स्वीकृतियों — जैसे वन, पर्यावरण और भूमि — के साथ प्रमुख खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी पर राज्यों को प्रति ब्लॉक 20 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन दिया जाएगा। हालांकि प्रति राज्य यह सीमा अधिकतम 200 करोड़ रुपए तक निर्धारित की गई है।
साथ ही 31 मार्च, 2026 तक सफलतापूर्वक नीलाम किए गए खनिज ब्लॉकों में से कम से कम 10 प्रतिशत का वास्तविक उत्पादन और प्रेषण 31 दिसंबर, 2026 तक सुनिश्चित करने पर प्रति राज्य 250 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।
तीसरा चरण: SMRI आधारित रैंकिंग पुरस्कार
तीसरे और अंतिम घटक में राज्य खनन तत्परता सूचकांक (एसएमआरआई) 2026-27 के आधार पर राज्यों को पुरस्कृत किया जाएगा। तीन श्रेणियों — ए, बी और सी — में से प्रत्येक में शीर्ष तीन राज्यों को क्रमशः 100 करोड़, 75 करोड़ और 50 करोड़ रुपए का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
व्यापक संदर्भ और आर्थिक प्रभाव
यह योजना ऐसे समय में आई है जब भारत सरकार आत्मनिर्भर भारत और महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है। भारत में लिथियम, कोबाल्ट और अन्य रणनीतिक खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जो इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों को आधार देते हैं।
गौरतलब है कि भारत में खनन क्षेत्र की वृद्धि दर पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव भरी रही है। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और वन अनुमति जैसी अड़चनें खदानों के संचालन में विलंब का प्रमुख कारण रही हैं। यह योजना इन्हीं बाधाओं को दूर करने की दिशा में एक ठोस नीतिगत प्रयास है।
राज्यों के लिए यह एक बड़ा वित्तीय प्रोत्साहन है — विशेषकर उन राज्यों के लिए जो खनिज संपदा से समृद्ध हैं लेकिन प्रशासनिक और नियामक देरी के कारण उनका पूरा दोहन नहीं कर पा रहे। झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को इस योजना से सर्वाधिक लाभ मिलने की संभावना है।
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकारें 15 दिसंबर, 2026 की समयसीमा के भीतर सुधारात्मक कार्यों को कितनी तेजी से लागू करती हैं और क्या यह योजना भारत के खनन क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने में सफल होती है।