ऑपरेशन लोटस पर BJP का पलटवार: 'हम पार्टी नहीं तोड़ते, नेता खुद आते हैं' — नरहरि अमीन

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ऑपरेशन लोटस पर BJP का पलटवार: 'हम पार्टी नहीं तोड़ते, नेता खुद आते हैं' — नरहरि अमीन

सारांश

AAP में 7 राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे के बाद 'ऑपरेशन लोटस' के आरोपों पर BJP सांसद नरहरि अमीन ने कहा — नेता स्वेच्छा से भाजपा में आते हैं, पार्टी नहीं तोड़ी जाती। राघव चड्ढा बोले — 'गलत पार्टी में सही आदमी था।'

Key Takeaways

  • BJP सांसद नरहरि अमीन ने 24 अप्रैल को 'ऑपरेशन लोटस' के आरोपों को खारिज किया और कहा कि नेता स्वेच्छा से BJP में आते हैं।
  • राघव चड्ढा समेत 7 AAP राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में विलय की घोषणा की।
  • राघव चड्ढा ने खुद कहा — वे "गलत पार्टी में सही आदमी" थे, जो AAP की आंतरिक खींचतान को दर्शाता है।
  • AAP सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि BJP 'ऑपरेशन लोटस' के ज़रिए पार्टी को कमज़ोर कर रही है।
  • नरहरि अमीन ने बताया कि 2012 में कांग्रेस छोड़ने पर नरेंद्र मोदी ने उन्हें खुद फोन किया था।
  • यह घटना AAP की राजनीतिक स्थिरता पर सवाल उठाती है और आगामी राज्य चुनावों पर इसका असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली/गांधीनगर, 24 अप्रैल। आम आदमी पार्टी (AAP) में बड़ी टूट के बाद उठे 'ऑपरेशन लोटस' के आरोपों को भाजपा राज्यसभा सांसद नरहरि अमीन ने शुक्रवार को सिरे से नकार दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाजपा किसी भी पार्टी को तोड़ने का काम नहीं करती, बल्कि नेता अपनी स्वतंत्र इच्छा से पार्टी में शामिल होते हैं। राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों के AAP छोड़कर भाजपा में विलय की घोषणा के बाद यह बयान राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अमीन का सीधा जवाब: 'स्वेच्छा से जुड़ रहे हैं नेता'

राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में नरहरि अमीन ने कहा, "हम पार्टियां नहीं तोड़ते। वे स्वेच्छा से और अपनी मर्जी से हमारे साथ जुड़ रहे हैं और हमारा दृष्टिकोण पूरी तरह खुला है।" उन्होंने राघव चड्ढा और अन्य नेताओं के फैसले को पूरी तरह स्वतंत्र बताया।

अमीन ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा किसी भी नेता को शामिल करने से पहले एक सुनिश्चित प्रक्रिया का पालन करती है, जिसमें उम्मीदवार की योग्यता, स्थानीय नेताओं की राय और जनता की भावना को ध्यान में रखा जाता है।

AAP में भूचाल: राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने थामा BJP का दामन

राघव चड्ढा और छह अन्य राज्यसभा सांसदों ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी में विलय की घोषणा की, जिसे भारतीय राजनीति में एक बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद चड्ढा ने पत्रकारों से कहा कि वे "गलत पार्टी में सही आदमी" थे — यह बयान AAP के भीतर गहरे मतभेदों की ओर इशारा करता है।

सूत्रों के अनुसार, AAP नेतृत्व, विशेषकर राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और सांसद संजय सिंह, चाहते थे कि राघव चड्ढा पार्टी के एजेंडे — जिसमें भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले शामिल हैं — पर अधिक सक्रिय रहें। लेकिन चड्ढा की प्राथमिकताएं अलग थीं।

संजय सिंह का पलटवार: 'ऑपरेशन लोटस' का आरोप

एक अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा 'ऑपरेशन लोटस' के ज़रिए विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक करार दिया।

हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि यह सब नेताओं के व्यक्तिगत और स्वैच्छिक निर्णय हैं, न कि किसी षड्यंत्र का हिस्सा।

नरहरि अमीन का व्यक्तिगत अनुभव: 'मोदी ने खुद फोन किया था'

नरहरि अमीन ने अपना निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने 2012 में कांग्रेस छोड़ी थी, तब भाजपा ने उन्हें खुले दिल से स्वीकार किया और नरेंद्र मोदी ने स्वयं उन्हें फोन किया था। यह उदाहरण देकर उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि भाजपा का द्वार हमेशा से खुला रहा है।

गहरा राजनीतिक संदर्भ: 'ऑपरेशन लोटस' का इतिहास

गौरतलब है कि 'ऑपरेशन लोटस' का आरोप पहली बार नहीं लगा है। 2019 में कर्नाटक में कांग्रेस-JDS सरकार गिरने के बाद भी यही आरोप लगे थे। बाद में मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने और महाराष्ट्र में शिवसेनाNCP में टूट के बाद भी यही सवाल उठे। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों के दबाव और प्रलोभन से विपक्षी नेताओं को तोड़ती है।

हालांकि भाजपा हर बार इसे नेताओं की स्वेच्छा बताती रही है। इस बार AAP के मामले में यह सवाल और भी पेचीदा है क्योंकि राघव चड्ढा जैसे युवा और चर्चित नेता का पार्टी छोड़ना AAP की आंतरिक कमज़ोरियों को भी उजागर करता है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि AAP इस राजनीतिक झटके से कैसे उबरती है और क्या अन्य नेता भी पार्टी छोड़ने का फैसला करते हैं।

Point of View

बल्कि यह उस पार्टी के भीतरी संकट की गवाही है जो खुद को 'नई राजनीति' का ध्वजवाहक कहती थी। विडंबना यह है कि जो पार्टी कांग्रेस और BJP पर 'दलबदल संस्कृति' का आरोप लगाती थी, आज उसी के सात सांसद एक साथ पाला बदल रहे हैं। 'ऑपरेशन लोटस' का आरोप लगाना आसान है, लेकिन असली सवाल यह है कि AAP का नेतृत्व अपने ही नेताओं को क्यों नहीं रोक पाया? यह घटना 2025-26 के राज्य चुनावों से पहले AAP की राजनीतिक ज़मीन को कमज़ोर करती है और BJP की 'सबको साथ लेने' की रणनीति को मज़बूत करती है।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

ऑपरेशन लोटस क्या है और AAP ने यह आरोप क्यों लगाया?
'ऑपरेशन लोटस' वह रणनीति है जिसमें आरोप है कि BJP विपक्षी दलों के नेताओं को तोड़कर अपनी पार्टी में मिलाती है। AAP सांसद संजय सिंह ने राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के इस्तीफे के बाद यह आरोप लगाया, जिसे BJP ने नकार दिया।
राघव चड्ढा ने AAP क्यों छोड़ी?
राघव चड्ढा ने इस्तीफे के बाद कहा कि वे 'गलत पार्टी में सही आदमी' थे। सूत्रों के अनुसार, AAP नेतृत्व और उनके बीच पार्टी की प्राथमिकताओं को लेकर गहरे मतभेद थे।
BJP सांसद नरहरि अमीन ने ऑपरेशन लोटस पर क्या कहा?
BJP राज्यसभा सांसद नरहरि अमीन ने कहा कि भाजपा पार्टियां नहीं तोड़ती और नेता स्वेच्छा से पार्टी में शामिल होते हैं। उन्होंने ऑपरेशन लोटस के सभी आरोपों को निराधार बताया।
AAP के कितने सांसदों ने पार्टी छोड़ी और BJP में शामिल हुए?
राघव चड्ढा समेत कुल 7 राज्यसभा सांसदों ने AAP से इस्तीफा देकर BJP में विलय की घोषणा की। यह AAP के इतिहास में सबसे बड़ी टूट मानी जा रही है।
क्या पहले भी ऑपरेशन लोटस के आरोप लगे हैं?
हां, 2019 में कर्नाटक में कांग्रेस-JDS सरकार गिरने, मध्य प्रदेश में सिंधिया के दलबदल और महाराष्ट्र में शिवसेना-NCP टूट के बाद भी यही आरोप लगे थे। BJP हर बार इसे नेताओं का स्वैच्छिक निर्णय बताती रही है।
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