27 जून 2026
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ऑपरेशन सिंदूर पर राजनाथ के बयान को विपक्ष ने तोड़ा-मरोड़ा: केंद्र ने 'मनगढ़ंत बयानबाजी' को खारिज किया

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ऑपरेशन सिंदूर पर राजनाथ के बयान को विपक्ष ने तोड़ा-मरोड़ा: केंद्र ने 'मनगढ़ंत बयानबाजी' को खारिज किया

सारांश

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर छह शहीद जवानों के नाम सार्वजनिक होते ही विपक्ष ने राजनाथ सिंह के पुराने संसदीय बयान को हथियार बनाया। केंद्र ने पलटवार करते हुए कहा कि बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया — वह बयान उस समय फैल रहे झूठे दावों का जवाब था, न कि शहादत से इनकार।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्रालय ने विपक्ष की आलोचना को 'जानबूझकर भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत' बताकर खारिज किया।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीद जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक रूप से अंकित किए गए।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और मनीष तिवारी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के 28 जुलाई 2025 के संसदीय बयान पर सवाल उठाए।
केंद्र का तर्क — बयान उस समय फैल रहे झूठे दावों (भारतीय पायलटों की मौत) का खंडन था, संपूर्ण जनहानि का विवरण नहीं।
मंत्रालय ने ऑपरेशन सिंदूर को पाकिस्तान के भीतर ठिकानों पर 'अद्वितीय सटीकता' से किए गए प्रहार का गौरवपूर्ण अभियान बताया।

केंद्र सरकार ने 27 जून 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए ऑपरेशन सिंदूर संबंधी बयान को लेकर विपक्ष की आलोचना को 'जानबूझकर भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत' बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विपक्ष ने भाषण के चुनिंदा अंशों को संदर्भ से बाहर निकालकर गलत धारणा बनाने की कोशिश की।

विवाद की जड़ क्या है

यह विवाद तब भड़का जब शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह जवानों के नाम सार्वजनिक रूप से अंकित किए गए और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। यह पहला मौका था जब ऑपरेशन में जान गंवाने वाले सशस्त्र बलों के जवानों के नाम आधिकारिक रूप से सामने आए।

इसके बाद विपक्ष ने रक्षा मंत्री के 28 जुलाई 2025 को संसद में दिए गए उस बयान को उठाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर में किसी भारतीय सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। विपक्ष का तर्क था कि यदि छह जवान शहीद हुए, तो रक्षा मंत्री का वह बयान भ्रामक था।

कांग्रेस के आरोप

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने रक्षा मंत्री का पुराना संसदीय भाषण सामने रखते हुए कहा कि दो ही संभावनाएँ हैं — या तो राजनाथ सिंह को सदन में बोलते समय छह जवानों की शहादत की जानकारी नहीं थी, या फिर सच्चाई जानते हुए भी उन्होंने सदन को गुमराह किया। खेड़ा ने कहा कि 'दोनों ही स्थितियाँ उनकी योग्यता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं और यह हमारे सैनिकों का अपमान है।'

एक अन्य कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी निशाना साधते हुए कहा कि रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक के हताहत होने से इनकार किया था, जबकि 13 महीने बाद शहीद जवानों के नाम जारी किए गए।

केंद्र का करारा जवाब

रक्षा मंत्रालय ने इस पूरे विवाद को 'शरारती' और 'मनगढ़ंत' करार दिया। मंत्रालय ने कहा कि जब राजनाथ सिंह ने संसद में यह बयान दिया था, उस समय ऑपरेशन में भारतीय पायलटों के शहीद होने के कई झूठे दावे सोशल मीडिया पर खतरनाक गति से फैल रहे थे। मंत्रालय के अनुसार, रक्षा मंत्री की टिप्पणी उन्हीं झूठे दावों का 'लक्षित और विशिष्ट जवाब' थी, न कि ऑपरेशन की संपूर्ण जनहानि का विवरण।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि उक्त झूठे दावे 'ऑपरेशन की सफलता को कम करने और जनता का मनोबल गिराने के इरादे से आक्रामक रूप से फैलाए गए थे।' साथ ही स्पष्ट किया कि संसद में दिया गया राजनाथ सिंह का बयान ऑपरेशन सिंदूर की उल्लेखनीय सफलता का 'पूर्णतः गौरवपूर्ण और सटीक विवरण' था।

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि

रक्षा मंत्रालय ने रेखांकित किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय रक्षा बलों ने पाकिस्तान के भीतर कई ठिकानों पर घातक प्रहार किए और अद्वितीय सटीकता, दृढ़ संकल्प तथा सैन्य व्यावसायिकता का प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर छह शहीद जवानों के नाम अंकित होना ऑपरेशन के बाद पहला आधिकारिक सार्वजनिक खुलासा था, जो इस विवाद का तात्कालिक कारण बना।

आगे क्या

यह राजनीतिक विवाद संसद के आगामी सत्र में और तीखा हो सकता है, क्योंकि विपक्ष ने रक्षा मंत्री से स्पष्टीकरण की माँग जारी रखी है। केंद्र की ओर से दिया गया यह जवाब फिलहाल सरकार का आधिकारिक पक्ष है, लेकिन विपक्ष के सवाल थमते नहीं दिख रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि यदि शहादत की जानकारी थी, तो संसद को पूरा चित्र क्यों नहीं दिया गया। दूसरी ओर, विपक्ष का 13 महीने बाद इस मुद्दे को उठाना यह भी दर्शाता है कि राजनीतिक दाँव-पेच में शहीदों की स्मृति का उपयोग हो रहा है। जनता के लिए असली सवाल यह है: क्या संसद को सैन्य अभियानों में हुई जनहानि की पूरी और समयबद्ध जानकारी मिलनी चाहिए?
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सिंदूर पर राजनाथ सिंह के बयान पर विवाद क्यों हुआ?
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीद जवानों के नाम सार्वजनिक होने के बाद विपक्ष ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के 28 जुलाई 2025 के उस संसदीय बयान पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने कहा था कि ऑपरेशन में किसी भारतीय सैनिक को नुकसान नहीं पहुँचा। विपक्ष का तर्क था कि यह बयान शहीदों की अनदेखी करता है।
केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों का क्या जवाब दिया?
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि राजनाथ सिंह का बयान उस समय सोशल मीडिया पर फैल रहे उन झूठे दावों का खंडन था, जिनमें भारतीय पायलटों के शहीद होने की अफवाहें थीं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बयान को संदर्भ से बाहर निकालकर गलत तरीके से पेश किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर में शहीद जवानों के नाम कब और कहाँ सार्वजनिक हुए?
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शुक्रवार को ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह जवानों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से अंकित किए गए और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। यह इस ऑपरेशन में जान गंवाने वाले सैनिकों का पहला सार्वजनिक खुलासा था।
कांग्रेस ने रक्षा मंत्री पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि रक्षा मंत्री या तो शहादत से अनजान थे या जानते हुए भी सदन को गुमराह किया — दोनों ही स्थितियाँ उनकी योग्यता पर सवाल उठाती हैं। मनीष तिवारी ने यह भी कहा कि 13 महीने बाद शहीदों के नाम जारी करना पहले के बयान से विरोधाभासी है।
ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय रक्षा बलों द्वारा पाकिस्तान के भीतर कई ठिकानों पर किया गया सैन्य अभियान था। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस ऑपरेशन में अद्वितीय सटीकता और सैन्य व्यावसायिकता का प्रदर्शन किया गया। इस अभियान में छह भारतीय जवान शहीद हुए, जिनके नाम हाल ही में सार्वजनिक किए गए।
राष्ट्र प्रेस
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