चंडीगढ़ CBI रेड: कोठी नंबर 50 पर छापे के बाद अकाली दल और कांग्रेस ने 'AAP' सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप ऑफिस के रूप में इस्तेमाल होने वाली कोठी नंबर 50 पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को छापेमारी की, जिससे पंजाब की राजनीति में तीव्र हलचल मच गई। इस कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों — शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) — ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर जोरदार हमला बोला है।
मुख्य घटनाक्रम
CBI की टीमें चंडीगढ़ की कोठी नंबर 50 के साथ-साथ मोहाली के फेज-11 सहित कथित तौर पर कई अन्य ठिकानों पर भी पहुँचीं। रिपोर्टों के अनुसार, जाँच एजेंसी का ध्यान राजबीर घुम्मण — जिन्हें घारचों गाँव का निवासी बताया जाता है और जो कथित रूप से मुख्यमंत्री आवास से जुड़े थे — पर केंद्रित है। इसके अतिरिक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कथित तौर पर पंजाब भर में 8 से 10 अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'घर नंबर 50 — भगवंत मान का कैंप ऑफिस और वही घर जहां से उनके दिल्ली के आका पंजाब को चलाते थे, अब वहाँ CBI की रेड पड़ रही है।' बाजवा ने आगे लिखा कि जिस जगह से पंजाब पर दिल्ली का 'रिमोट कंट्रोल' चलता था, वही जगह अब CBI की जाँच के दायरे में है और CBI को सच सामने लाना चाहिए।
अकाली दल का हमला
शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक्स पर कई पोस्ट के ज़रिए AAP सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने दावा किया कि राजबीर घुम्मण, जो कथित तौर पर मुख्यमंत्री आवास के 'कर्ता-धर्ता' की भूमिका में थे, अब CBI के रडार पर हैं। मजीठिया ने यह भी दावा किया कि ED को ₹10,000 करोड़ से अधिक के कथित मामले में 'बहुत सारा सामान' मिल चुका है, जिसके कारण रेड का दायरा बढ़ाया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए त्यागपत्र देने की माँग की।
सरकारी पक्ष और संदर्भ
गौरतलब है कि इन सभी आरोपों पर AAP या मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में AAP सरकार पहले से ही कई विवादों को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। विपक्ष के दावे कथित तौर पर अभी जाँच के दायरे में हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका है।
आगे क्या
CBI और ED की संयुक्त कार्रवाई के दायरे और निष्कर्षों पर सभी की नज़र है। आलोचकों का कहना है कि यह मामला पंजाब की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। जाँच एजेंसियों की आगामी रिपोर्ट और AAP सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह मामला किस दिशा में जाता है।