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चंद्रिमा भट्टाचार्य का गंभीर आरोप, मुख्य चुनाव आयुक्त ने किया अपमान

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चंद्रिमा भट्टाचार्य का गंभीर आरोप, मुख्य चुनाव आयुक्त ने किया अपमान

सारांश

तृणमूल कांग्रेस की चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर अपमान का आरोप लगाया। इस घटना से राजनीतिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। जानिए इस विवाद की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

चंद्रिमा भट्टाचार्य का आरोप मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने महिलाओं के प्रति सम्मान नहीं दिखाया।
पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस की प्रतिनिधिमंडल की सदस्य और वित्त राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके साथ बातचीत में दुर्व्यवहार किया। भट्टाचार्य उस बैठक में शामिल थीं जब चुनाव आयोग की पूर्ण बेंच ने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया।

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मीडिया को बताया, “मैं एक महिला हूँ। इसके बावजूद, बातचीत में उन्होंने मुझसे कहा ‘चिल्लाओ मत’। मुख्य चुनाव आयुक्त के पास महिलाओं के प्रति सम्मान की बुनियादी भावना नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने कई महिला मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए हैं।

उन्होंने कहा, “यदि आपका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है, तो यह साबित करना आपकी जिम्मेदारी है कि आप असली मतदाता हैं। आपको लाइन में खड़ा होना होगा। मुख्य चुनाव आयुक्त को याद रखना चाहिए कि महिलाओं पर चिल्लाना या उनके साथ दुर्व्यवहार करना उनके कर्तव्यों में नहीं आता।”

उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने से मना कर दिया।

“उन्होंने कहा कि चूंकि एसआईआर मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसे बैठक में चर्चा नहीं की जा सकती। उन्होंने हमें बैठक के लिए क्यों बुलाया, जब हम एसआईआर मुद्दे पर बात नहीं कर सकते? क्या आम मतदाताओं के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करना हमारा अपराध है?”

इसके साथ ही, राज्य के शहरी विकास मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने कहा कि भाजपा यह भ्रम फैला रही है कि पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए बढ़ गए हैं। आयोग के रिवीजन अभ्यास के पिछले दो महीनों में भाजपा के दावे का कोई सबूत मिला? बल्कि, निर्दोष लोगों को एसआईआर के नाम पर परेशान किया गया है।

आयोग ने भाजपा की मांगों के अनुसार रिवीजन नियम निर्धारित करने में गलती की। हमारी अपील है कि कोई भी वास्तविक मतदाता मतदाता सूची से बाहर न हो।

वहीं, चुनाव आयोग (ईसीआई) ने दिनभर विभिन्न राजनीतिक दलों से बातचीत की प्रक्रिया की जानकारी दी और कहा कि सभी दलों ने आगामी चुनाव में मतदाताओं को धमकाने और असामाजिक तत्वों की हिंसा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की।

आयोग ने यह भी कहा कि अधिकांश राजनीतिक दल इस बार पश्चिम बंगाल में एक या दो चरण में मतदान कराने की सलाह दे रहे हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने राजनीतिक दलों को आश्वासन दिया कि भारत में चुनाव कानून के अनुसार आयोजित किए जाएंगे और ईसीआई पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा। चुनाव आयोग हिंसा के प्रति शून्य सहिष्णुता के प्रति प्रतिबद्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह मामला भारत में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और महिलाओं के प्रति सम्मान की आवश्यकता को उजागर करता है। मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यवहार चिंताजनक है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके साथ बातचीत के दौरान अपमानजनक व्यवहार किया।
क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने एसआईआर मुद्दे पर चर्चा करने से मना किया?
हाँ, उन्होंने कहा कि एसआईआर मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए इस पर बैठक में चर्चा नहीं की जा सकती।
भाजपा के आरोपों के बारे में क्या कहा गया?
फिरहाद हकीम ने कहा कि भाजपा अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के बारे में झूठा भ्रम फैला रही है।
राष्ट्र प्रेस
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