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चेन्नई में मतदान के लिए रंग-कोडेड बूथ, अधिक सुव्यवस्थित प्रक्रिया सुनिश्चित

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चेन्नई में मतदान के लिए रंग-कोडेड बूथ, अधिक सुव्यवस्थित प्रक्रिया सुनिश्चित

सारांश

चेन्नई में आगामी चुनावों के दौरान मतदान को सरल और संगठित बनाने के लिए एक नई रंग-कोडिंग प्रणाली लागू की गई है। यह पहल 16 विधानसभा सीटों पर वोटिंग प्रक्रिया को सुगम बनाएगी। जानें इस अभिनव प्रणाली के बारे में।

मुख्य बातें

रंग-कोडिंग प्रणाली से मतदाता आसानी से अपने बूथ तक पहुँच सकेंगे।
यह व्यवस्था बड़े मतदान केंद्रों पर लागू होगी।
दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
भविष्य में सफल प्रयोग के आधार पर इसे अन्य केंद्रों पर लागू किया जा सकता है।
इस पहल से मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

चेन्नई, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आगामी चुनावों को सुगम और संगठित बनाने के लिए चेन्नई में एक अभिनव पहल की शुरुआत की गई है। इस बार शहर की सभी 16 विधानसभा सीटों पर मतदान केंद्रों को रंगों (कलर-कोडिंग) के माध्यम से व्यवस्थित किया जाएगा, ताकि मतदाताओं को अपने बूथ तक पहुँचने में कोई कठिनाई न हो।

यह योजना विशेष रूप से उन बड़े मतदान केंद्रों के लिए लागू की जा रही है, जहाँ एक ही परिसर में कई बूथ होते हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी जे. कुमारगुरुबरण ने इस पहल के बारे में जानकारी साझा करते हुए कहा कि जिन मतदान केंद्रों पर 10 से अधिक बूथ हैं, वहाँ यह कलर-कोडिंग प्रणाली लागू होगी। उन्होंने बताया कि साइनबोर्ड और विभिन्न रंगों से बने मार्ग मतदाताओं को उनके निर्धारित बूथ तक पहुँचने में सहायता करेंगे, जिससे भ्रम और देरी कम होगी।

चेन्नई जैसे बड़े शहर में कुल 1,197 मतदान केंद्रों पर 4,085 पोलिंग बूथ स्थापित किए गए हैं। इनमें से कई केंद्र स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों में हैं, जहाँ एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में बूथ होने के कारण भीड़ और असुविधा उत्पन्न हो सकती है। इस नई व्यवस्था से इस समस्या को काफी हद तक समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।

उदाहरण के लिए, पुरासावक्कम क्षेत्र के नम्मालवारपेट चेन्नई हाई स्कूल में अलग-अलग रंग जैसे स्काई ब्लू, पिंक और पिस्ता ग्रीन का उपयोग करके रास्तों को चिह्नित किया गया है, ताकि मतदाता आसानी से अपने बूथ तक पहुँच सकें। इन रंगीन रास्तों के साथ-साथ स्थान-स्थान पर साइनबोर्ड भी लगाए गए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था विशेष रूप से उन केंद्रों पर अत्यंत आवश्यक है, जहाँ भारी संख्या में मतदाता आते हैं। एक अधिकारी के अनुसार, एक ही स्कूल में 16 बूथ हैं, जहाँ लगभग 9,000 मतदाता वोट डालते हैं। ऐसे में बिना सही मार्गदर्शन के भीड़ को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इसी तरह, पेरंबूर क्षेत्र के एक निजी विद्यालय में दो अलग-अलग प्रवेश द्वार और एक निकास द्वार बनाया गया है, ताकि मतदाताओं की आवाजाही सुचारू बनी रहे। साथ ही, प्रमुख स्थानों पर नक्शे भी लगाए गए हैं, जिससे लोग अपने बूथ को जल्दी ढूंढ सकें।

निर्वाचन विभाग ने दिव्यांग मतदाताओं के लिए भी विशेष प्रबंध किए हैं, ताकि उन्हें किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अतिरिक्त, कुछ केंद्रों पर मोबाइल फोन रखने के लिए सुरक्षित रैक भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

अधिकारियों का कहना है कि यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो भविष्य में 5 से अधिक बूथ वाले सभी केंद्रों पर भी इस व्यवस्था को लागू किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि चुनावी प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आएगी। ऐसा लगता है कि अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो इसे अन्य स्थानों पर भी लागू किया जा सकता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलर-कोडिंग प्रणाली का उद्देश्य क्या है?
कलर-कोडिंग प्रणाली का उद्देश्य मतदाताओं को उनके निर्धारित बूथ तक पहुँचने में आसानी प्रदान करना है।
यह प्रणाली किन मतदान केंद्रों पर लागू होगी?
यह प्रणाली उन मतदान केंद्रों पर लागू होगी जहाँ 10 से अधिक बूथ हैं।
दिव्यांग मतदाताओं के लिए क्या सुविधाएं हैं?
दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
क्या यह व्यवस्था भविष्य में अन्य केंद्रों पर भी लागू की जाएगी?
अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो भविष्य में 5 से अधिक बूथ वाले सभी केंद्रों पर भी इसे लागू किया जा सकता है।
मतदाता को बूथ तक पहुँचने में कैसे मदद मिलेगी?
साइनबोर्ड और रंगीन रास्ते मतदाता को उनके निर्धारित बूथ तक पहुँचने में मदद करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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