चिकमगलूर में एवोकाडो क्रांति: 'मन की बात' में PM मोदी की तारीफ के बाद कॉफी बागानों में नई फसल
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के पहाड़ी जिले चिकमगलूर में एवोकाडो की इंटरक्रॉपिंग तेज़ी से एक लोकप्रिय कृषि मॉडल बनती जा रही है। 31 अगस्त 2026 को प्रसारित 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिकमगलूर के किसानों द्वारा कॉफी बागानों के बीच एवोकाडो उगाने के प्रयोग की सराहना की, जिसके बाद इस खेती पद्धति में और तेज़ी आने की संभावना बढ़ गई है।
मन की बात में क्या बोले PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने रेडियो संबोधन में कहा कि चिकमगलूर के कुछ किसान भाई-बहनों ने अपने कॉफी के बागानों के बीच एवोकाडो के पौधे लगाए हैं, जिससे उन्हें कॉफी और काली मिर्च के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है। उन्होंने कहा, 'हम अक्सर शहरों के रेस्टोरेंट में एवोकाडो टोस्ट के बारे में सुनते हैं, लेकिन इसी एवोकाडो के ज़रिए हमारे नए-नए तरीके आज़माने वाले किसानों ने कमाई का एक नया ज़रिया खोज निकाला है।'
इस कड़ी में उन्होंने तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने आधी हेक्टेयर ज़मीन पर एवोकाडो की खेती शुरू कर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की।
चिकमगलूर में इंटरक्रॉपिंग का विस्तार
कॉफी के जन्मस्थान के रूप में पहचाने जाने वाले इस पहाड़ी इलाके में पारंपरिक रूप से कॉफी, काली मिर्च और मसालों की खेती होती रही है। लेकिन पिछले कुछ महीनों में चिकमगलूर, कलासा, बालेहोनूरु, मुडिगेरे, जयापुरा, एनआर पुरा, कोप्पा और कदूर जैसे क्षेत्रों में एवोकाडो उगाने वाले किसानों की संख्या में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है।
यह मॉडल किसानों को अलग ज़मीन की ज़रूरत के बिना ही मौजूदा बागानों में एक अतिरिक्त नकदी फसल उगाने का अवसर देता है — जिसे किसान खुद 'एक बागान, कमाई के कई ज़रिए' कह रहे हैं।
किसानों की ज़बानी
स्थानीय किसानों ने बताया कि शहरी होटलों और रेस्तरां में एवोकाडो से बने उत्पादों की माँग लगातार बढ़ रही है, जिससे इस फसल की बाज़ार उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। एक किसान ने कहा कि कॉफी और काली मिर्च की कीमतों में उतार-चढ़ाव कभी-कभी आमदनी को प्रभावित करता है, लेकिन एवोकाडो की खेती ने उन्हें एक अपेक्षाकृत स्थिर अतिरिक्त आय का स्रोत दिया है।
गौरतलब है कि यह प्रवृत्ति ऐसे समय में उभरी है जब देशभर में एकल-फसल पर निर्भर किसान जलवायु परिवर्तन और बाज़ार की अस्थिरता के चलते आय-विविधीकरण की ओर रुख कर रहे हैं।
आम जनता और कृषि क्षेत्र पर असर
PM मोदी के उल्लेख के बाद इस खेती पद्धति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इंटरक्रॉपिंग मॉडल न केवल किसान की आय बढ़ाता है, बल्कि मिट्टी की सेहत और जैव-विविधता के लिए भी फायदेमंद है। यह मॉडल अन्य कॉफी उत्पादक ज़िलों — जैसे कोडागु और हासन — के लिए भी अनुकरणीय हो सकता है।
आगे की राह
PM मोदी की सार्वजनिक सराहना के बाद राज्य के कृषि विभाग और बागवानी विशेषज्ञों की रुचि भी इस मॉडल में बढ़ने की उम्मीद है। यदि सरकारी स्तर पर तकनीकी सहायता और बाज़ार संपर्क सुनिश्चित किया जाए, तो चिकमगलूर का यह प्रयोग भारत के पहाड़ी कृषि क्षेत्रों के लिए एक नई दिशा तय कर सकता है।