तिब्बत बाढ़: चीनी सेंसरशिप से तबाही का सच छुपा, RSF ने कहा — 'सूचना का ब्लैक होल'
सारांश
मुख्य बातें
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने तिब्बती क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन द्वारा मीडिया पर लगाई गई कथित सेंसरशिप की कड़ी निंदा की है। संगठन के अनुसार, किसी भी स्वतंत्र पत्रकार या अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर स्वतंत्र रिपोर्टिंग की अनुमति नहीं दी गई, जिससे तिब्बत में फ्लैश फ्लड से हुई वास्तविक तबाही का अनुमान लगाना लगभग असंभव हो गया है।
मीडिया पर पूर्ण नियंत्रण का आरोप
RSF के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने बाढ़ की रिपोर्टिंग का अधिकार केवल सरकारी मीडिया को दिया। इन रिपोर्टों में राहत एवं बचाव कार्यों में सरकार की 'उपलब्धियों' को प्रमुखता दी जा रही है, जबकि आपदा के वास्तविक पैमाने और उसके व्यापक मानवीय प्रभाव की स्वतंत्र तस्वीर सामने नहीं आ पा रही। संगठन ने कहा कि यह चीन में पत्रकारों पर लंबे समय से जारी कड़े नियंत्रण को उजागर करता है।
RSF ने चीन के सरकारी अखबार शिनजिंग बाओ (द बीजिंग न्यूज़) के हवाले से बताया कि अधिकारियों ने आपदा से संबंधित कथित 'अफवाहें फैलाने' के आरोप में 10 इंटरनेट यूज़र्स के विरुद्ध कार्रवाई भी की है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
RSF एशिया-प्रशांत की एडवोकेसी प्रमुख अलेक्जेंड्रा बिएलाकोव्स्का ने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में हाल के वर्षों में तिब्बत 'वास्तविक अर्थों में सूचना का ब्लैक होल' बन गया है। उन्होंने कहा, 'स्वतंत्र तिब्बती मीडिया या अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को इस स्वायत्त क्षेत्र से स्वतंत्र रूप से खबरें करने की अनुमति नहीं है। वहाँ केवल सरकारी नियंत्रण वाले मीडिया और प्रचार तंत्र से जुड़े संस्थान ही काम कर सकते हैं, जो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रचार विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार खबरें प्रकाशित करते हैं।'
स्वतंत्र मीडिया संस्थान तिब्बत रेडियो के प्रधान संपादक कालसांग जिग्मे ने कहा, 'इस बार सूचना पर नियंत्रण पहले की प्राकृतिक आपदाओं की तुलना में कहीं अधिक कड़ा नज़र आ रहा है। पत्रकारों के लिए आपदा की वास्तविक गंभीरता का पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया है।'
मृतक संख्या पर विवाद
RSF के अनुसार, तिब्बत रेडियो द्वारा जुटाई गई जानकारी के आधार पर करीब 29 तिब्बतियों की मौत हुई है, जबकि चीन की आधिकारिक संख्या 16 है। तिब्बती मीडिया संस्थानों का कहना है कि वास्तविक मृतक संख्या इससे काफी अधिक हो सकती है, परंतु सीमित पहुँच और विश्वसनीय स्रोतों की कमी के कारण आँकड़ों की पुष्टि करना संभव नहीं है।
जिग्मे ने बताया कि उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले तिब्बतियों के निर्वासित परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कई लोग सार्वजनिक रूप से जानकारी साझा करने से हिचक रहे हैं — उन्हें डर है कि ऐसा करने से तिब्बत में रह रहे उनके परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुँच सकता है।
सोशल मीडिया पर भी सेंसरशिप
RSF ने चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी व्यापक सेंसरशिप का आरोप लगाया है। विशेष रूप से वीचैट पर बाढ़ से संबंधित कई पोस्ट और संदर्भ कथित तौर पर हटा दिए गए या सेंसर कर दिए गए।
नेपाल तक पहुँची तबाही
यह बाढ़ 26 अगस्त को नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भी भारी तबाही लेकर आई। बाढ़ का उद्गम चीन के तिब्बती क्षेत्र में था और पानी सीमा पार बहने वाली भोटेकोशी नदी के रास्ते नेपाल में घुसा। इस आपदा में नेपाल में 1,000 से अधिक लोगों की मौत हुई और हिमालयी देश के कई इलाकों में व्यापक नुकसान दर्ज किया गया। गौरतलब है कि तिब्बत में सूचना की अनुपलब्धता के कारण इस आपदा की सीमापार प्रकृति और मूल कारणों की भी स्वतंत्र जाँच नहीं हो पाई है।