चीन का गरीबी उन्मूलन मॉडल अफ्रीका के लिए अनुकरणीय — रेड क्रॉस व अफ्रीकी संघ के प्रतिनिधियों का मत
सारांश
मुख्य बातें
अंतर्राष्ट्रीय फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस और रेड क्रेसेंट सोसाइटीज (IFRC) के अफ्रीका क्षेत्रीय कार्यालय के उप प्रमुख पियरे क्रेमर और अफ्रीकी संघ एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में प्रतिनिधि आशा मोहम्मद ने कहा है कि गरीबी उन्मूलन और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में चीन का अनुभव अफ्रीकी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बन सकता है। दोनों विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की विकास रणनीति में निहित 'आंतरिक गति' का सिद्धांत अफ्रीकी समुदायों को अधिक सहनशील और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक हो सकता है।
क्रेमर का दृष्टिकोण: आंतरिक विकास क्षमता पर जोर
पियरे क्रेमर ने कहा कि गरीबी उन्मूलन में चीन का दृष्टिकोण बाहरी सहायता पर निर्भर रहने की बजाय समुदायों की आंतरिक विकास क्षमता को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा IFRC की कार्यशैली से भी मेल खाती है, जो स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने को प्राथमिकता देती है। क्रेमर के अनुसार, अफ्रीका में समुदायों की सहनशक्ति और लचीलापन बढ़ाना इस समय अत्यंत व्यावहारिक और आवश्यक लक्ष्य है।
आशा मोहम्मद की चिंता: जलवायु संकट और सामाजिक प्रभाव
आशा मोहम्मद ने रेखांकित किया कि चरम मौसमी घटनाएँ और जलवायु परिवर्तन अफ्रीकी देशों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के हर आयाम को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए मजबूत और लचीले समुदायों का निर्माण अपरिहार्य है। उनके अनुसार, चीन ने जिस तरह से अपने ग्रामीण और शहरी समुदायों को संगठित कर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा, वह अनुभव अफ्रीकी देशों के लिए अनुकरणीय है।
चीन-अफ्रीका विकास सहयोग का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब चीन और अफ्रीकी देशों के बीच विकास सहयोग तेज़ी से विस्तार पा रहा है। गौरतलब है कि चीन ने पिछले कुछ दशकों में 85 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने का दावा किया है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने 'असाधारण उपलब्धि' बताया है। अफ्रीकी देश इस मॉडल के विभिन्न पहलुओं को अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाने की संभावनाएँ तलाश रहे हैं।
आगे की राह
IFRC और अफ्रीकी संघ जैसे संगठन अब इस दिशा में ठोस ज्ञान-साझाकरण तंत्र विकसित करने पर विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के अनुभव का प्रत्यक्ष हस्तांतरण तो संभव नहीं, लेकिन इसके मूल सिद्धांत — स्थानीय नेतृत्व, सामुदायिक भागीदारी और चरणबद्ध विकास — अफ्रीका के विविध संदर्भों में प्रासंगिक हो सकते हैं।