झू रोंगजी का बीजिंग में राजकीय अंतिम संस्कार, शी जिनपिंग ने दी अंतिम विदाई
सारांश
मुख्य बातें
चीन के पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंगजी को मंगलवार, 18 अगस्त को बीजिंग के बाबाओशान रिवोल्यूशनरी कब्रिस्तान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। राष्ट्रपति शी जिनपिंग और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के शीर्ष नेताओं ने इस अवसर पर उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सरकार ने महत्वपूर्ण सरकारी स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाकर उनके निधन पर औपचारिक शोक व्यक्त किया।
निधन और अंतिम संस्कार का विवरण
रिपोर्टों के अनुसार 98 वर्षीय झू रोंगजी का निधन 12 अगस्त को हुआ था। उनके अंतिम संस्कार के दिन तियानआनमेन स्क्वायर और बाबाओशान श्मशान घाट की ओर जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था विशेष रूप से कड़ी कर दी गई थी। बाबाओशान वह ऐतिहासिक स्थल है जहाँ परंपरागत रूप से चीन के शीर्ष नेताओं का अंतिम संस्कार किया जाता है। पूरे कार्यक्रम को लेकर सरकारी स्तर पर पूरी गोपनीयता और नियंत्रण बनाए रखा गया।
झू रोंगजी की ऐतिहासिक विरासत
झू रोंगजी 1998 से 2003 तक चीन के प्रधानमंत्री रहे और उन्हें देश के आर्थिक सुधारों के दौर के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। उनके कार्यकाल में सरकारी कंपनियों का पुनर्गठन, बैंकिंग और कर व्यवस्था में व्यापक सुधार तथा महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण जैसे साहसिक कदम उठाए गए। विश्व व्यापार संगठन (WTO) में चीन के प्रवेश की प्रक्रिया में भी उनकी निर्णायक भूमिका रही, जिसने चीन को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मील का पत्थर साबित हुई।
उनके बेबाक और स्पष्टवादी व्यक्तित्व ने उन्हें जनमानस में लोकप्रिय बनाया। यह ऐसे समय में आया है जब चीन में आर्थिक सुधारों की गति को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है। गौरतलब है कि उनके कार्यकाल में सरकारी क्षेत्र में किए गए ढाँचागत बदलावों के कारण लाखों लोगों की नौकरियाँ भी गई थीं, फिर भी उन्हें आर्थिक आधुनिकीकरण के प्रणेता के रूप में याद किया जाता है।
सोशल मीडिया और सार्वजनिक शोक पर नियंत्रण
झू के निधन के बाद चीन के सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में नागरिकों ने उनके पुराने भाषणों और सुधारों को याद किया। कई लोगों ने उनके कार्यकाल को आर्थिक बदलाव और अपेक्षाकृत अधिक खुली सार्वजनिक चर्चा के दौर के रूप में चिह्नित किया। हालाँकि, अधिकारियों ने सार्वजनिक शोक को नियंत्रित रखा और ऑनलाइन गतिविधियों पर भी कड़ी नज़र रखी। उनके पैतृक गाँव में श्रद्धांजलि देने की गतिविधियों पर भी निगरानी की खबरें सामने आई हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: नेताओं की मृत्यु और राजनीतिक संवेदनशीलता
चीन में वरिष्ठ नेताओं के निधन के बाद सरकार विशेष सतर्कता बरतती है, क्योंकि अतीत में ऐसे अवसरों पर उमड़ा सार्वजनिक शोक राजनीतिक असंतोष का रूप ले चुका है। 1976 में प्रधानमंत्री झोउ एनलाई की मृत्यु के बाद हुआ व्यापक जन-शोक इसका सबसे उल्लेखनीय ऐतिहासिक उदाहरण है। इसी तरह, पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग के 2023 में निधन के बाद भी अधिकारियों ने ऑनलाइन श्रद्धांजलियों और सार्वजनिक गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण रखा था। झू रोंगजी के अंतिम संस्कार के दौरान अपनाई गई सुरक्षा व्यवस्था इसी सुस्थापित पैटर्न की अगली कड़ी है।
आगे क्या
झू रोंगजी की विरासत चीन की आर्थिक नीति पर बहस को आने वाले समय में भी प्रासंगिक बनाए रखेगी। उनके कार्यकाल के सुधारों की तुलना वर्तमान नेतृत्व की आर्थिक प्राथमिकताओं से की जाती रहेगी, विशेष रूप से ऐसे समय में जब चीन धीमी विकास दर और वैश्विक व्यापार तनावों से जूझ रहा है।