मोरारजी देसाई: एक दूरदर्शी नेता और राष्ट्रवादी व्यक्तित्व के प्रतीक
सारांश
Key Takeaways
- मोरारजी देसाई ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- वे पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे।
- उनकी सरकार ने 1978 में नोटबंदी लागू की।
- उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
- उनका जीवन अनुशासन और सादगी का आदर्श है।
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की पुण्यतिथि पर शुक्रवार को कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में मोरारजी देसाई को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस मौके पर उनके जीवन और देश के प्रति समर्पण को याद किया गया।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि मोरारजी देसाई एक राष्ट्रवादी व्यक्तित्व के धनी, स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी नेता थे। उनके प्रखर और ओजस्वी विचार आज भी युवाओं को देश की उन्नति और समाज के विकास के लिए प्रेरित करते हैं।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि सादगी, अनुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।
यह उल्लेखनीय है कि मोरारजी देसाई का जन्म 29 फरवरी 1896 को हुआ था और उनका निधन 10 अप्रैल 1995 को हुआ। वे भारत के चौथे प्रधानमंत्री थे और एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी के रूप में उनकी पहचान रही।
साथ ही, मोरारजी देसाई देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे। उन्होंने 1977 से 1979 तक जनता पार्टी सरकार का नेतृत्व किया, जो स्वतंत्र भारत की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार थी।
उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1991 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया।
आर्थिक नीतियों के मामले में भी उनका कार्यकाल काफी महत्वपूर्ण रहा। उनकी सरकार ने 16 जनवरी 1978 को देश में नोटबंदी लागू की थी। यह स्वतंत्र भारत की पहली और देश के इतिहास की दूसरी नोटबंदी थी। उस समय 1,000 रुपए, 5,000 रुपए और 10,000 रुपए के उच्च मूल्य वाले नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया था। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कालेधन पर लगाम लगाना और अवैध गतिविधियों को रोकना था।