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भारत को वैश्विक अस्थिरता के लिए हर 1-2 साल में तैयार रहना चाहिए: अर्थशास्त्री

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भारत को वैश्विक अस्थिरता के लिए हर 1-2 साल में तैयार रहना चाहिए: अर्थशास्त्री

सारांश

नीलकंठ मिश्रा ने भारत को वैश्विक अस्थिरता के लिए हर 1-2 साल में तैयार रहने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है।

मुख्य बातें

भारत को हर 1-2 साल में वैश्विक अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए।
भू-राजनीतिक तनाव का उपयोग संरचनात्मक सुधारों के लिए किया जाना चाहिए।
विद्युतीकरण एक रणनीतिक प्राथमिकता है।
आवास और शहरी अवसंरचना पर नीतिगत कार्रवाई आवश्यक है।
मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य और एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि भारत को हर एक से दो साल में वैश्विक अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भू-राजनीतिक तनाव में वर्तमान समय का उपयोग संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

मिश्रा ने बताया कि यह समय विद्युतीकरण, आवास, शहरी अवसंरचना और पर्यटन में सुधारों को प्राथमिकता देकर विकास में लचीलापन लाने का सुनहरा अवसर है।

उन्होंने बताया कि अस्थिरता अब केवल छिटपुट नहीं है, बल्कि यह संरचनात्मक हो गई है। लेकिन भारत के पास इस समय अधिक मजबूत सुरक्षा उपाय हैं।

कोटक प्राइवेट की एक प्रेस रिलीज में मिश्रा ने कहा, "इतिहास के किसी भी अन्य समय की तुलना में, हम इस स्थिति का सामना करने के लिए कहीं अधिक सक्षम हैं।"

उन्होंने एक वरिष्ठ नीति निर्माता की बातें साझा की, जिन्होंने वर्तमान स्थिति की तुलना 1989-93 की अशांत अवधि से की थी।

मिश्रा ने जोर दिया कि भारत के पास अब अधिक गहन पूंजी बाजार, मजबूत बाह्य संतुलन और नीति की विश्वसनीयता है।

हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम के आह्वान के बावजूद, व्यापक आर्थिक संकटों का चक्र अभी समाप्त नहीं हुआ है।

एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री ने विद्युतीकरण को एक रणनीतिक प्राथमिकता बताया और कहा कि भारत अपने समकक्षों की तुलना में तेल और गैस संकटों के प्रति अधिक संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि विद्युतीकरण में तेजी लाने से भू-राजनीति के प्रति जोखिम कम होगा और दक्षता में सुधार होगा।

उन्होंने घरेलू मांग को बढ़ाने के लिए आवास और शहरी अवसंरचना पर निर्णायक नीतिगत कदम उठाने का भी आह्वान किया।

मिश्रा ने कहा कि होटल एफएसआई और शहरी क्षमता में सुधार से लागत कम होगी, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत को वैश्विक अस्थिरता के प्रति सजग रहना आवश्यक है। नीलकंठ मिश्रा के विचारों से यह बात और स्पष्ट होती है कि संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाना एक प्राथमिकता होनी चाहिए।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत को वैश्विक अस्थिरता के लिए क्यों तैयार रहना चाहिए?
भारत को हर 1-2 साल में वैश्विक अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि अस्थिरता अब संरचनात्मक हो गई है और इससे निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
नीलकंठ मिश्रा ने किन सुधारों पर जोर दिया?
उन्होंने विद्युतीकरण, आवास, शहरी अवसंरचना और पर्यटन में सुधारों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।
भारत के पास किस प्रकार के सुरक्षा उपाय हैं?
भारत के पास अधिक गहन पूंजी बाजार, मजबूत बाह्य संतुलन और नीति की विश्वसनीयता है।
विद्युतीकरण को क्यों प्राथमिकता दी जानी चाहिए?
विद्युतीकरण को प्राथमिकता देने से भू-राजनीति के प्रति जोखिम कम होगा और दक्षता में सुधार होगा।
संरचनात्मक सुधारों का क्या महत्व है?
संरचनात्मक सुधारों से लागत कम होगी, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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