PM मोदी ने किया चिन्मय अमृत महोत्सव का उद्घाटन, बोले — 'यह सिर्फ संस्था नहीं, चिन्मय विचार है'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि चिन्मय मिशन केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक जीवित विचारधारा है — जिसकी नींव एक चिन्मय ऋषि ने रखी थी। यह सम्मेलन आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक संवाद का मंच बना।
उद्घाटन संबोधन की मुख्य बातें
सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आप सभी के सौजन्य से आज मुझे चिन्मय मिशन के अमृत महोत्सव में शामिल होने का अवसर मिला है। ये एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव है। इतने दशकों की इसकी यात्रा भी चिन्मय संकल्पों से भरी रही है। और जो चिन्मय है, वो स्वाभाविक ही अमर है, अमृतमय है।' उन्होंने भारत मंडपम में इस आयोजन के नामकरण को 'पूरी तरह सार्थक' बताया।
स्वामी चिन्मयानंद से जुड़ी भावुक स्मृतियाँ
प्रधानमंत्री ने फरवरी 1993 में बड़ौदा में स्वामी चिन्मयानंद से हुई अपनी मुलाकात को याद किया। उन्होंने बताया कि वे गुरुदेव को शिकागो में आयोजित होने वाली 'विश्व धर्म संसद' के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने गए थे — जो स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के 100 वर्ष पूरे होने का उपलक्ष्य था।
मोदी ने भावुक होते हुए कहा, 'स्वामी चिन्मयानंद के साथ हुई बातचीत, उनका स्नेह और आशीर्वाद आज सब कुछ फिर से आंखों के सामने आ गया है। एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे मैं गुरुदेव के साक्षात सान्निध्य में आ गया हूं।' उन्होंने इस अनुभव को 'अत्यंत भावुक करने वाला' बताया और चिन्मय मिशन के साथियों को हृदय से धन्यवाद दिया।
गुरुदेव का देहत्याग और शिकागो की स्मृति
प्रधानमंत्री ने बताया कि गुरुदेव ने 'विश्व धर्म संसद' का निमंत्रण स्वीकार किया और अमेरिका जाकर विभिन्न कार्यक्रमों में लोगों को उस शताब्दी समारोह के प्रति जागरूक भी किया। परंतु समारोह से कुछ सप्ताह पूर्व, 3 अगस्त को, स्वामी चिन्मयानंद का अमेरिका में ही निधन हो गया।
मोदी ने कहा कि 11 सितंबर को जब शिकागो में 'विश्व धर्म संसद' आयोजित हुई, वे वहाँ उपस्थित थे और सभी ने गुरुदेव की कमी गहराई से महसूस की। उस अंतिम मुलाकात में हुए 'गंभीर विमर्श' का स्मरण करते हुए उन्होंने बताया कि उसका मुख्य भाव था — 'युवा शक्ति का निर्माण और उसके ज़रिए सशक्त एवं समर्थ भारत का निर्माण।'
सेवा का संकल्प और गुरु का आशीर्वाद
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि गुरुदेव से मिलने के कुछ वर्षों बाद उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री चुना गया। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों से वे सरकार के मुखिया के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं और 'गुरुजी का आशीर्वाद सदा साथ है।' यह वक्तव्य उपस्थित श्रद्धालुओं और अनुयायियों को गहरे भाव से स्पर्श कर गया।
चिन्मय मिशन की वैश्विक प्रासंगिकता
गौरतलब है कि चिन्मय मिशन की स्थापना स्वामी चिन्मयानंद ने की थी और यह संगठन आज विश्वभर में वेदांत एवं भागवत गीता के प्रचार-प्रसार में सक्रिय है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में काम कर रहा है। प्रधानमंत्री की उपस्थिति इस सम्मेलन को राष्ट्रीय महत्व का संकेत देती है।