चिन्मय अमृत महोत्सव महासम्मेलन 23 अक्टूबर से भारत मंडपम में, स्वामी स्वरूपानंद बोले — गीता युवाओं की राह
सारांश
मुख्य बातें
चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में 'चिन्मय अमृत महोत्सव महासम्मेलन' का भव्य आयोजन किया जाएगा। चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख स्वामी स्वरूपानंद ने बताया कि इस तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु, मिशन परिवार के सदस्य और सेवक भाग लेंगे।
मिशन की स्थापना और उद्देश्य
स्वामी स्वरूपानंद के अनुसार, चिन्मय मिशन की नींव पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी महाराज ने रखी थी। वे मूलतः एक पत्रकार थे, जो यह जानने के लिए हिमालय गए थे कि साधु-संत किस प्रकार का जीवन जीते हैं। वहाँ स्वामी शिवानंद और स्वामी तपोवन जैसे महापुरुषों के सान्निध्य ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
हिमालय में वेदांत और श्रीमद्भगवद्गीता का गहन अध्ययन करने के बाद स्वामी चिन्मयानंद को अनुभव हुआ कि भारत के युवा अपनी समृद्ध ज्ञान-परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से अपरिचित हैं। इसी अनुभव ने उन्हें देशभर में वेदांत और गीता का संदेश फैलाने के लिए प्रेरित किया।
गीता ज्ञान यज्ञ और व्यापक विस्तार
स्वामी स्वरूपानंद ने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद का मूल विचार था — 'जब व्यक्ति बदलता है, तभी राष्ट्र बदलता है।' इसी दर्शन के आधार पर मिशन ने पूरे देश में गीता ज्ञान यज्ञ के माध्यम से कर्तव्य, जीवन-मूल्य और उद्देश्य की शिक्षा दी। आज मिशन का कार्य ग्रामीण अंचलों से लेकर विश्व के प्रमुख महानगरों तक फैला हुआ है।
मिशन वर्तमान में शिक्षा, संस्कार, युवा विकास, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और मूल्य-आधारित शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय है। बच्चों, युवाओं, गृहस्थों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम नियमित रूप से संचालित किए जाते हैं।
महासम्मेलन में क्या होगा
भारत मंडपम में 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित इस महासम्मेलन में सेवा, संस्कृति, वेदांत और भारतीय जीवन-मूल्यों पर केंद्रित विविध सत्र होंगे। इसके अतिरिक्त हनुमान चालीसा पाठ, श्रीमद्भगवद्गीता जागरूकता अभियान और युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएँगे। हजारों युवा गाँवों और शहरों में जाकर भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों का संदेश दे रहे हैं।
युवाओं और गीता पर स्वामी स्वरूपानंद का संदेश
युवाओं के बारे में स्वामी स्वरूपानंद ने स्पष्ट किया कि यह कहना उचित नहीं कि सभी युवा भटक गए हैं, किंतु उन्हें सही दिशा और उद्देश्य देने की आवश्यकता अवश्य है। उनके अनुसार, श्रीमद्भगवद्गीता युवाओं को आत्मविश्वास, कर्तव्यबोध और जीवन का स्पष्ट लक्ष्य प्रदान करती है।
उन्होंने गीता के प्रसिद्ध श्लोक 'उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्' का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को स्वयं अपने उत्थान का प्रयास करना चाहिए और कभी निराश नहीं होना चाहिए — क्योंकि मनुष्य का मन ही उसका सबसे बड़ा मित्र और सबसे बड़ा शत्रु है।
मिशन का दीर्घकालिक लक्ष्य
चिन्मय मिशन युवाओं को गीता से जोड़ने के लिए नियमित रूप से युवा केंद्र, स्टडी ग्रुप, संवाद सत्र और प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है। स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि मिशन का लक्ष्य केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे जिम्मेदार और जागरूक नागरिक तैयार करना है जो समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। आगामी महासम्मेलन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।