23 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

चिन्मय अमृत महोत्सव में PM मोदी बोले — 'राष्ट्र ही हमारी संस्कृति और अस्तित्व का आधार है'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
चिन्मय अमृत महोत्सव में PM मोदी बोले — 'राष्ट्र ही हमारी संस्कृति और अस्तित्व का आधार है'

सारांश

PM मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव के उद्घाटन में राष्ट्र, संस्कृति और युवाशक्ति को एक सूत्र में पिरोया। 300 दिनों में 40 हज़ार किमी की यात्रा करने वाले स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद की विरासत को भारत के अमृतकाल से जोड़ा।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया।
युवा स्वयंसेवकों ने 300 दिनों में 40 हज़ार किलोमीटर की यात्रा कर 1 लाख से अधिक युवाओं से संपर्क किया।
मोदी ने उपनिषद वाक्य 'वयं अमृतस्य पुत्राः' और वैदिक आह्वान 'वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः' का उल्लेख करते हुए सांस्कृतिक-राष्ट्रीय एकता पर बल दिया।
स्वामी चिन्मयानंद के योगदान को भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण अध्याय बताया।
2015 में PM ने स्वामी चिन्मयानंद की स्मृति में विशेष सिक्का जारी किया था — इस घटना को उन्होंने पुनः स्मरण किया।
चिन्मय मिशन अब भारत के अमृतकाल अभियान से औपचारिक रूप से जुड़ गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की समस्त नीतियों और प्रयासों के केंद्र में देश के युवा हैं, और युवाओं ने इस महोत्सव के आयोजन में भी अहम जिम्मेदारियाँ निभाई हैं।

युवाओं की भूमिका और यात्रा अभियान

मोदी ने बताया कि अनेक युवा स्वयंसेवकों ने लगभग 300 दिनों में 40 हज़ार किलोमीटर की यात्रा पूरी की और इस अभियान के दौरान एक लाख से अधिक युवाओं से सीधा संपर्क स्थापित किया। उन्होंने पूरी टीम की सराहना करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

गौरतलब है कि यह महोत्सव चिन्मय मिशन की स्थापना की वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है, जो स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करने का कार्य करता है।

उपनिषदों के संदेश और अमृतकाल का संकल्प

प्रधानमंत्री ने उपनिषदों के श्लोक 'वयं अमृतस्य पुत्राः' का उल्लेख करते हुए कहा, 'इसका मतलब है कि हम अमृत की संतानें हैं। ये संकल्पना केवल आध्यात्मिक दर्शन नहीं है, यह हमारा सांस्कृतिक विश्वास भी है। हमारी चेतना अमर है। हमारा ज्ञान और बोध अमर है।'

उन्होंने आगे कहा कि इसी बोध के कारण भारत हजारों वर्षों से अमर बना हुआ है, क्योंकि 'भारत' शब्द का अर्थ ही है — 'जो ज्ञान और प्रकाश के अनुसंधान में लगा हो।' मोदी ने कहा कि देश की आजादी के 75 वर्ष के अवसर पर उन्होंने 'अमृत महोत्सव' के रूप में उत्सव मनाने का आह्वान किया था, और कई आध्यात्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक संगठन तब से इस संकल्प से जुड़ते आए हैं।

स्वामी चिन्मयानंद की विरासत और राष्ट्रनिर्माण

वेदों के आह्वान 'वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः' का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद ने अपना संपूर्ण जीवन इसी मंत्र को जीते हुए बिताया। उन्होंने कहा, 'हमारा राष्ट्र ही हमारी संस्कृति की जन्मभूमि है। राष्ट्र ही हमारे अस्तित्व का आधार है।'

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि स्वामी जी की शिक्षा यही थी कि हम अपनी आध्यात्मिक उन्नति को व्यक्तिगत उन्नति से जोड़ें और व्यक्तिगत उन्नति को राष्ट्र की प्रगति का माध्यम बनाएँ।

चिन्मय मिशन का सांस्कृतिक योगदान

मोदी ने कहा कि चिन्मय मिशन के प्रयासों से आज लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर के रूप में कार्य कर रहे हैं और भारतीय मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचा रहे हैं। उन्होंने स्वामी जी के योगदान को भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का 'एक महत्वपूर्ण अध्याय' बताया।

उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि 2015 में उन्हें स्वामी चिन्मयानंद की स्मृति में एक विशेष सिक्का जारी करने का अवसर मिला था। 'तब भी मैंने कहा था कि स्वामी जी का जीवन ज्ञान, कर्म और भक्ति का अद्भुत संगम था' — मोदी ने उस अवसर को याद किया।

आगे की राह

प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के गुरु स्वामी शिवानंद को भी स्मरण किया और कहा कि महान लोगों का मिशन उनके बाद भी सजीव रहता है। यह महोत्सव भारत के अमृतकाल के व्यापक राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बन चुका है, और आध्यात्मिक संस्थाओं तथा सरकारी प्रयासों के बीच इस तरह के संवाद आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी व्यापकता और आवृत्ति बढ़ रही है। आलोचक पूछ सकते हैं कि क्या धार्मिक-सांस्कृतिक संगठनों को राष्ट्रीय अभियानों से इस तरह जोड़ना राज्य की तटस्थता की संवैधानिक भावना के अनुरूप है — एक प्रश्न जो मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः अनुत्तरित रह जाता है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन क्या है?
यह चिन्मय मिशन द्वारा आयोजित एक वैश्विक सम्मेलन है, जिसका उद्घाटन PM मोदी ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में किया। यह आयोजन स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं और भारत के अमृतकाल अभियान को एक साथ जोड़ता है।
PM मोदी ने युवा स्वयंसेवकों की इस सम्मेलन में किस उपलब्धि के लिए सराहना की?
मोदी ने बताया कि युवा स्वयंसेवकों ने लगभग 300 दिनों में 40 हज़ार किलोमीटर की यात्रा की और एक लाख से अधिक युवाओं से संपर्क स्थापित किया। उन्होंने पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
स्वामी चिन्मयानंद कौन थे और उनकी विरासत क्या है?
स्वामी चिन्मयानंद चिन्मय मिशन के संस्थापक थे, जिन्होंने भारतीय शास्त्रों के ज्ञान को जनसामान्य तक पहुँचाने का अभियान चलाया। PM मोदी ने 2015 में उनकी स्मृति में एक विशेष सिक्का जारी किया था और उनके जीवन को ज्ञान, कर्म और भक्ति का संगम बताया था।
मोदी ने किन वैदिक संदर्भों का उल्लेख किया?
मोदी ने उपनिषद वाक्य 'वयं अमृतस्य पुत्राः' (हम अमृत की संतानें हैं) और वेद के आह्वान 'वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः' (राष्ट्रहित चाहने वाले हम राष्ट्र को जागृत और उन्नत बनाएँ) का उल्लेख किया। उन्होंने इन्हें भारत की सांस्कृतिक अमरता और राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा से जोड़ा।
चिन्मय मिशन का अमृतकाल अभियान से क्या संबंध है?
PM मोदी के अनुसार, चिन्मय मिशन अब भारत के अमृतकाल के व्यापक राष्ट्रीय अभियान से जुड़ गया है। देश की आजादी के 75 वर्ष पर शुरू हुए इस अभियान से कई आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन पहले से जुड़े हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 14 मिनट पहले
  2. 1 घंटा पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 1 साल पहले