23 अक्टूबर 2026
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PM मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव में स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार से किया संवाद, माँगा आशीर्वाद

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PM मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव में स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार से किया संवाद, माँगा आशीर्वाद

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव के मंच से जो किया वह असाधारण था — स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार से संवाद कर आशीर्वाद माँगा। 1993 की भावुक स्मृति, 650 वापस लाई मूर्तियाँ और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संदेश — यह आयोजन तकनीक और आध्यात्मिकता के संगम की नई मिसाल बना।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का उद्घाटन किया।
होलोग्राफिक तकनीक के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद के अवतार से संवाद किया और भविष्य के कार्यों के लिए आशीर्वाद माँगा।
मोदी ने बताया कि फरवरी-मार्च 1993 में वे स्वामी जी से शिकागो विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने गए थे, लेकिन 3 अगस्त को स्वामी जी का निधन हो गया।
चिन्मय मिशन के 100 से अधिक शिक्षण संस्थान लाखों बच्चों को आधुनिक व भारतीय संस्कार-युक्त शिक्षा दे रहे हैं।
सरकार बीते 12 वर्षों में 650 से अधिक चोरी की प्राचीन मूर्तियाँ विदेशों से वापस लाने में सफल रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का उद्घाटन किया और तकनीक के अभूतपूर्व उपयोग से स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार के साथ संवाद किया। इस अनोखे आध्यात्मिक-तकनीकी अनुभव के दौरान उन्होंने 1993 में स्वामी जी के साथ हुई अपनी यादगार मुलाकात को भी भावपूर्ण ढंग से स्मरण किया।

होलोग्राफिक संवाद का अनोखा क्षण

होलोग्राफिक संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के डिजिटल अवतार से अपने भविष्य के कार्यों के लिए आशीर्वाद माँगा। उन्होंने कहा, 'मेरा सौभाग्य था कि मैं आपसे मिला था, और आज मैं चाहता हूँ कि आप मुझे उन कार्यों के लिए आशीर्वाद दें, जिन्हें मैं पूरा करना चाहता हूँ।'

होलोग्राफिक अवतार ने प्रधानमंत्री को देखकर खुशी जताई और कहा, 'भारत तुम्हारे साथ है, नरेंद्र।' मोदी ने इस अवसर को 'एक अलग तरह का आध्यात्मिक अनुभव' बताया और कहा, 'यह हमारे संतों का मेरे लिए आशीर्वाद है।'

1993 की स्मृति और शिकागो आमंत्रण का प्रसंग

प्रधानमंत्री ने बताया कि वे फरवरी या मार्च 1993 के आसपास स्वामी जी से पहली बार मिले थे, जब वे उन्हें शिकागो में आयोजित होने वाले 'विश्व धर्म संसद' (वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन्स) के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने गए थे।

मोदी ने कहा, 'उन्होंने मेरा अनुरोध स्वीकार कर लिया और विश्व धर्म संसद के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए वहाँ जाने को तैयार हो गए। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कार्यक्रम से कुछ हफ्ते पहले ही, 3 अगस्त को वे हमें छोड़कर चले गए।' उन्होंने इस क्षण को 'भावुक पल' बताया।

चिन्मय मिशन और शिक्षा पर विचार

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'चिन्मय' शब्द अमरता का प्रतीक है, जो इस सम्मेलन को और अर्थपूर्ण बनाता है। उन्होंने कहा, 'चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं है; यह चिन्मय विचार का प्रतिनिधित्व करता है।'

उन्होंने बताया कि चिन्मय मिशन के 100 से अधिक शिक्षण संस्थान आज लाखों बच्चों और युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कारों से भी जोड़ रहे हैं। उन्होंने इसे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप बताया, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा में शिक्षा और आधुनिक विज्ञान को महत्व दिया गया है।

सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पर जोर

प्रधानमंत्री ने कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद रॉक मेमोरियल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस महान कार्य के लिए पहला आर्थिक योगदान स्वामी चिन्मयानंद ने ही दिया था। उन्होंने भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी उल्लेख किया — काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या राम मंदिर, महाकाल लोक उज्जैन, केदारनाथ और बद्रीनाथ के जीर्णोद्धार को इसका प्रमाण बताया।

मोदी ने यह भी कहा कि बीते 12 वर्षों में सरकार 650 से अधिक चोरी की गई प्राचीन मूर्तियाँ विदेशों से वापस लाने में सफल रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को भी स्वामी जी की विरासत से जोड़ते हुए कहा कि यह विश्व को भारत की पुरातन परंपरा से जोड़ने का आधुनिक माध्यम है।

आगे का महत्व

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब भारत में प्रौद्योगिकी और आध्यात्मिकता के संगम पर व्यापक चर्चा जारी है। गौरतलब है कि होलोग्राफिक तकनीक के माध्यम से दिवंगत आध्यात्मिक गुरुओं को इस तरह प्रस्तुत करने का यह एक दुर्लभ और चर्चित प्रयोग है। चिन्मय मिशन की वैश्विक उपस्थिति और इस सम्मेलन की भव्यता इसे भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति का भी हिस्सा बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक सुचिंतित संदेश है। मोदी सरकार लगातार यह स्थापित कर रही है कि आधुनिक भारत की जड़ें सांस्कृतिक पुनर्जागरण में हैं। गौरतलब है कि 650 मूर्तियों की वापसी और काशी-अयोध्या-केदारनाथ जैसे धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार का उल्लेख एक आध्यात्मिक मंच से करना यह बताता है कि सरकार धर्म और सुशासन को एकसूत्र में पिरोने की कोशिश कर रही है। आलोचक पूछ सकते हैं कि क्या इस तरह के भव्य आयोजन ठोस नीतिगत उपलब्धियों से ध्यान हटाते हैं — लेकिन चुनावी दृष्टि से, आध्यात्मिक-राष्ट्रवादी मतदाता आधार को यह संदेश सीधे और प्रभावशाली ढंग से जाता है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन क्या है?
यह चिन्मय मिशन द्वारा आयोजित एक वैश्विक आध्यात्मिक सम्मेलन है, जो 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हुआ। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।
PM मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार से क्या कहा?
मोदी ने होलोग्राफिक अवतार से अपने भविष्य के कार्यों के लिए आशीर्वाद माँगा। उन्होंने कहा, 'मेरा सौभाग्य था कि मैं आपसे मिला था, और आज मैं चाहता हूँ कि आप मुझे उन कार्यों के लिए आशीर्वाद दें, जिन्हें मैं पूरा करना चाहता हूँ।'
मोदी और स्वामी चिन्मयानंद की पहली मुलाकात कब हुई थी?
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, वे फरवरी या मार्च 1993 के आसपास स्वामी जी से मिले थे। वे उन्हें शिकागो में विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने गए थे, लेकिन 3 अगस्त 1993 को स्वामी जी का निधन हो गया।
चिन्मय मिशन की शिक्षा में क्या विशेषता है?
चिन्मय मिशन के 100 से अधिक शिक्षण संस्थान लाखों बच्चों और युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कारों से भी जोड़ते हैं। PM मोदी ने इसे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप बताया।
मोदी सरकार ने कितनी प्राचीन मूर्तियाँ विदेशों से वापस लाई हैं?
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, बीते 12 वर्षों में सरकार 650 से अधिक चोरी की गई प्राचीन मूर्तियाँ विदेशों से वापस लाने में सफल रही है।
राष्ट्र प्रेस
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