16 जुलाई 2026
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म्यांमार राष्ट्रपति ह्लाइंग ने महाबोधि मंदिर में की पूजा, 5 दिवसीय भारत दौरे की शुरुआत बोधगया से

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म्यांमार राष्ट्रपति ह्लाइंग ने महाबोधि मंदिर में की पूजा, 5 दिवसीय भारत दौरे की शुरुआत बोधगया से

सारांश

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग का पाँच दिवसीय भारत दौरा बोधगया की आध्यात्मिक धरती से शुरू हुआ — साझा बौद्ध विरासत को कूटनीति की नींव बनाते हुए। 1 जून को PM मोदी से वार्ता और मुंबई में बिज़नेस फोरम के साथ यह यात्रा भारत-म्यांमार संबंधों को नया आयाम देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

म्यांमार राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने 30 मई 2026 को बोधगया के महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना की।
यह 30 मई से 3 जून 2026 तक की पाँच दिवसीय राजकीय यात्रा है — राष्ट्रपति पद पर उनका पहला भारत दौरा ।
बोधगया में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने स्वागत किया।
1 जून को नई दिल्ली में PM मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता और बिज़नेस फोरम में भागीदारी।
2 जून को मुंबई में व्यापार एवं उद्योग कार्यक्रम।
म्यांमार भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' , 'एक्ट ईस्ट' और 'महासागर' नीतियों का केंद्रीय साझेदार।

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने 30 मई 2026 को बोधगया स्थित विश्व-प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर आए ह्लाइंग की यह 30 मई से 3 जून 2026 तक की पाँच दिवसीय राजकीय यात्रा है, और राष्ट्रपति पद पर रहते हुए यह उनका पहला भारत दौरा है।

बोधगया से यात्रा का आगाज़

राष्ट्रपति ह्लाइंग का बोधगया पहुँचने पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने औपचारिक स्वागत किया। महाबोधि मंदिर परिसर में उन्होंने बौद्ध परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की। विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को भारत और म्यांमार के बीच आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'यह यात्रा भारत और म्यांमार के बीच गहरे आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों को दर्शाती है। दोनों देशों के रिश्ते साझा बौद्ध विरासत पर आधारित हैं, जिसने पीढ़ियों से दोनों देशों के लोगों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से जोड़े रखा है।'

उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल साथ

राष्ट्रपति ह्लाइंग के साथ कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी इस दौरे पर हैं। यह प्रतिनिधिमंडल न केवल द्विपक्षीय राजनयिक बैठकों में, बल्कि व्यापारिक मंचों पर भी भागीदारी करेगा, जो इस यात्रा के आर्थिक आयाम को रेखांकित करता है।

नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता

1 जून 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति ह्लाइंग और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित है। इस बैठक में दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को और मज़बूत करने के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। राष्ट्रपति ह्लाइंग एक बिज़नेस फोरम में भी शिरकत करेंगे।

रणनीतिक महत्व

भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और 'महासागर' नीतियों के लिहाज़ से म्यांमार एक केंद्रीय साझेदार है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और भारत अपनी पूर्वी पड़ोस नीति को नई धार देने में जुटा है। गौरतलब है कि म्यांमार भारत और आसियान देशों के बीच भूमि-संपर्क की एक अनिवार्य कड़ी भी है।

मुंबई दौरा और आगे का कार्यक्रम

2 जून 2026 को राष्ट्रपति ह्लाइंग मुंबई पहुँचेंगे, जहाँ वे व्यापार और उद्योग से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेंगे तथा विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करेंगे। यह यात्रा 3 जून 2026 को संपन्न होगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस पाँच दिवसीय दौरे से भारत-म्यांमार संबंधों को नई गहराई और व्यापक आधार मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित कूटनीतिक संदेश है — साझा बौद्ध विरासत को दोनों देशों के बीच 'सॉफ्ट पावर' की भाषा में परिवर्तित करने की कोशिश। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब म्यांमार में आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत अपने पड़ोसी के साथ संबंध बनाए रखने की नाज़ुक कूटनीतिक राह पर चल रहा है। 'नेबरहुड फर्स्ट' की घोषणाएँ तभी सार्थक होती हैं जब व्यापार, संपर्क और सुरक्षा सहयोग के ठोस परिणाम सामने आएँ — बिज़नेस फोरम और द्विपक्षीय वार्ता इसी कसौटी पर परखी जाएगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग भारत क्यों आए हैं?
यू मिन आंग ह्लाइंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 30 मई से 3 जून 2026 तक पाँच दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत आए हैं। यह राष्ट्रपति पद पर उनका पहला भारत दौरा है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को मज़बूत करना है।
महाबोधि मंदिर की यात्रा का कूटनीतिक महत्व क्या है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा भारत और म्यांमार के बीच साझा बौद्ध विरासत पर आधारित गहरे आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित करती है। बोधगया से दौरे की शुरुआत एक सांकेतिक कदम है जो दोनों देशों के पीपल-टू-पीपल संबंधों को केंद्र में रखता है।
PM मोदी और राष्ट्रपति ह्लाइंग की बैठक कब होगी?
दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता 1 जून 2026 को नई दिल्ली में निर्धारित है। इस बैठक में ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संबंधों के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
भारत की किन नीतियों में म्यांमार की केंद्रीय भूमिका है?
म्यांमार भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और 'महासागर' — तीनों विदेश नीतियों का अहम हिस्सा है। भारत और आसियान देशों के बीच भूमि-संपर्क के लिए म्यांमार एक अनिवार्य कड़ी है।
राष्ट्रपति ह्लाइंग के भारत दौरे का पूरा कार्यक्रम क्या है?
30 मई को बोधगया (महाबोधि मंदिर दर्शन), 1 जून को नई दिल्ली (PM मोदी से द्विपक्षीय वार्ता और बिज़नेस फोरम), 2 जून को मुंबई (व्यापार-उद्योग कार्यक्रम और स्थल भ्रमण), और 3 जून को दौरा संपन्न होगा।
राष्ट्र प्रेस
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