PM मोदी ने श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी समारोह के लोगो का अनावरण किया
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितंबर 2026 को कर्नाटक के उडुपी स्थित श्री पेजावर अधोक्षजा मठ के श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ मिलकर पद्म विभूषण यतिकुल चक्रवर्ती श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी समारोह के आधिकारिक लोगो का अनावरण किया।
एक्स पर प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात का विवरण साझा करते हुए कहा कि श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी का जीवन और शिक्षाएं अनगिनत लोगों को प्रेरित करती रहेंगी। उन्होंने लिखा कि संत का जीवन भक्ति, ज्ञान और सेवा से परिपूर्ण था। साथ ही यह भी कहा कि जन्म शताब्दी से पहले शुरू की जा रही विभिन्न पहल उनके महान आदर्शों को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगी।
श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी: संक्षिप्त परिचय
श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी (1931–2019) उडुपी के पेजावर अधोक्षजा मठ के पूर्व प्रमुख थे, जो उडुपी श्री कृष्ण परंपरा से जुड़े आठ माधव मठों में से एक है। उन्होंने मात्र आठ वर्ष की आयु में संन्यास ग्रहण किया और आठ दशकों से अधिक समय आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा में समर्पित किए।
वे भगवद् गीता, वेदों और माधव दर्शन पर प्रवचनों तथा संस्कृत शिक्षा के प्रसार के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। 1956 में उन्होंने बेंगलुरु में पूर्णप्रज्ञा विद्यापीठ की स्थापना की, जो आज भी माधव दर्शन के प्रचार-प्रसार का एक प्रमुख केंद्र है।
सामाजिक सेवा और समावेश की विरासत
स्वामीजी का जीवन केवल आध्यात्मिक उपदेशों तक सीमित नहीं था — वे सामाजिक सेवा के कार्यों में भी सक्रिय रहे। प्राकृतिक आपदाओं, सूखे और अन्य संकटों से प्रभावित लोगों की सहायता में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई। उल्लेखनीय है कि उन्होंने जाति आधारित विभाजनों के विरुद्ध अभियान चलाया और दलित समुदायों तक पहुँचने के लिए विशेष प्रयास किए।
वे राम जन्मभूमि आंदोलन सहित अनेक सार्वजनिक और सामाजिक मुद्दों में सक्रिय रूप से शामिल रहे और कर्नाटक तथा उससे बाहर एक प्रभावशाली आध्यात्मिक व्यक्तित्व के रूप में पहचाने गए।
जन्म शताब्दी समारोह की रूपरेखा
लोगो अनावरण के साथ जन्म शताब्दी समारोह की औपचारिक शुरुआत हो गई है। समारोह के अंतर्गत स्वामीजी के जीवन और योगदान को उजागर करने वाले विभिन्न कार्यक्रम और पहल आयोजित होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नियोजित पहल संत के जीवन से जुड़े मूल्यों और सिद्धांतों का व्यापक प्रसार सुनिश्चित करेंगी।
यह आयोजन ऐसे समय में आया है जब देश के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संस्थानों को राष्ट्रीय विमर्श में अधिक महत्व दिया जा रहा है। आने वाले महीनों में जन्म शताब्दी से जुड़ी गतिविधियों का विस्तार पूरे देश में होने की संभावना है।