PM मोदी से श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी की मुलाकात, पद्म विभूषण श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी लोगो का अनावरण
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कर्नाटक के उडुपी स्थित श्री पेजावर अधोक्षजा मठ के प्रमुख श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी से भेंट की। इस अवसर पर पद्म विभूषण यतिकुल चक्रवर्ती श्रीश्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी के जन्म शताब्दी समारोह के आधिकारिक लोगो का भी अनावरण किया गया।
मुलाकात का विवरण और लोगो अनावरण
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तस्वीर साझा करते हुए इस मुलाकात की जानकारी दी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मैंने उडुपी स्थित श्री पेजावर अधोक्षजा मठ के श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात की। पद्मविभूषण यतिकुल चक्रवर्ती श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी समारोह के लोगो का अनावरण किया गया।'
मोदी ने श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी के जीवन को 'भक्ति, ज्ञान और सेवा से परिपूर्ण' बताते हुए कहा कि उनका जीवन 'आज भी अनगिनत लोगों को प्रेरित करता है।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जन्म शताब्दी के अंतर्गत आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियाँ उनके महान आदर्शों को आगे ले जाएँगी।
श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी: एक परिचय
पद्म विभूषण से सम्मानित श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी उडुपी के पेजावर मठ के पूर्व प्रमुख थे, जो वैष्णव द्वैत परंपरा के प्रमुख धार्मिक संत माने जाते हैं। उन्होंने अपना जीवन भक्ति, सामाजिक समरसता और वेदांत प्रचार को समर्पित किया। गौरतलब है कि उनकी जन्म शताब्दी समारोह एक महत्वपूर्ण धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन है जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है।
प्रोजेक्ट राइनो और वन्यजीव संरक्षण पर PM का संदेश
इसी दिन विश्व राइनो दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक अलग एक्स पोस्ट में गैंडों के संरक्षण में योगदान देने वाले सभी लोगों की सराहना की। उन्होंने कहा कि असम में अब विश्व की लगभग 80 प्रतिशत एक सींग वाले गैंडों की आबादी है और काजीरंगा के अवैध शिकार-रोधी प्रयासों की व्यापक प्रशंसा हुई है।
मोदी ने यह भी बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में गैंडे वापस आ गए हैं या अच्छी तरह संरक्षित हैं, जबकि दुधवा (उत्तर प्रदेश) में गैंडों के पुनर्स्थापन की सफलता 'इतिहास रच रही है।'
उन्होंने घोषणा की कि सीमावर्ती राज्यों को संरक्षण, पर्यावास प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार और जनसंख्या गतिशीलता की समझ के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता देने हेतु प्रोजेक्ट राइनो की शुरुआत की गई है।
धार्मिक-सांस्कृतिक कूटनीति का संदर्भ
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से संवाद को नियमित रूप से सुदृढ़ कर रही है। पेजावर मठ का वैष्णव परंपरा में विशेष स्थान है और इसका प्रभाव कर्नाटक सहित देश के विभिन्न हिस्सों में महसूस होता है। शताब्दी समारोह के लोगो अनावरण में प्रधानमंत्री की भागीदारी इस आयोजन को राष्ट्रीय महत्व प्रदान करती है।
आने वाले दिनों में जन्म शताब्दी के अंतर्गत आयोजित विविध धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में व्यापक जन-भागीदारी अपेक्षित है।