22 सितंबर 2026
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PM मोदी से श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी की मुलाकात, पद्म विभूषण श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी लोगो का अनावरण

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PM मोदी से श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी की मुलाकात, पद्म विभूषण श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी लोगो का अनावरण

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 22 सितंबर को उडुपी के पेजावर मठ प्रमुख श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी से मुलाकात की और पद्म विभूषण श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी के लोगो का अनावरण किया। इसी दिन उन्होंने 'प्रोजेक्ट राइनो' की भी घोषणा की, जो भारत के सीमावर्ती राज्यों में गैंडा संरक्षण को नई दिशा देगा।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी (श्री पेजावर अधोक्षजा मठ, उडुपी) से भेंट की।
पद्म विभूषण श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी के जन्म शताब्दी समारोह के आधिकारिक लोगो का अनावरण किया गया।
मोदी ने विश्व राइनो दिवस पर बताया कि असम में विश्व की लगभग 80% एक सींग वाले गैंडों की आबादी है।
प्रोजेक्ट राइनो की शुरुआत की गई, जो सीमावर्ती राज्यों को संरक्षण, आनुवंशिक सुधार और पर्यावास प्रबंधन के लिए वित्तीय व तकनीकी सहायता देगा।
दुधवा (उत्तर प्रदेश) में गैंडों के पुनर्स्थापन और काजीरंगा के अवैध शिकार-रोधी प्रयासों की PM ने विशेष सराहना की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कर्नाटक के उडुपी स्थित श्री पेजावर अधोक्षजा मठ के प्रमुख श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी से भेंट की। इस अवसर पर पद्म विभूषण यतिकुल चक्रवर्ती श्रीश्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी के जन्म शताब्दी समारोह के आधिकारिक लोगो का भी अनावरण किया गया।

मुलाकात का विवरण और लोगो अनावरण

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तस्वीर साझा करते हुए इस मुलाकात की जानकारी दी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मैंने उडुपी स्थित श्री पेजावर अधोक्षजा मठ के श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात की। पद्मविभूषण यतिकुल चक्रवर्ती श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी समारोह के लोगो का अनावरण किया गया।'

मोदी ने श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी के जीवन को 'भक्ति, ज्ञान और सेवा से परिपूर्ण' बताते हुए कहा कि उनका जीवन 'आज भी अनगिनत लोगों को प्रेरित करता है।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जन्म शताब्दी के अंतर्गत आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियाँ उनके महान आदर्शों को आगे ले जाएँगी।

श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी: एक परिचय

पद्म विभूषण से सम्मानित श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी उडुपी के पेजावर मठ के पूर्व प्रमुख थे, जो वैष्णव द्वैत परंपरा के प्रमुख धार्मिक संत माने जाते हैं। उन्होंने अपना जीवन भक्ति, सामाजिक समरसता और वेदांत प्रचार को समर्पित किया। गौरतलब है कि उनकी जन्म शताब्दी समारोह एक महत्वपूर्ण धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन है जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है।

प्रोजेक्ट राइनो और वन्यजीव संरक्षण पर PM का संदेश

इसी दिन विश्व राइनो दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक अलग एक्स पोस्ट में गैंडों के संरक्षण में योगदान देने वाले सभी लोगों की सराहना की। उन्होंने कहा कि असम में अब विश्व की लगभग 80 प्रतिशत एक सींग वाले गैंडों की आबादी है और काजीरंगा के अवैध शिकार-रोधी प्रयासों की व्यापक प्रशंसा हुई है।

मोदी ने यह भी बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में गैंडे वापस आ गए हैं या अच्छी तरह संरक्षित हैं, जबकि दुधवा (उत्तर प्रदेश) में गैंडों के पुनर्स्थापन की सफलता 'इतिहास रच रही है।'

उन्होंने घोषणा की कि सीमावर्ती राज्यों को संरक्षण, पर्यावास प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार और जनसंख्या गतिशीलता की समझ के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता देने हेतु प्रोजेक्ट राइनो की शुरुआत की गई है।

धार्मिक-सांस्कृतिक कूटनीति का संदर्भ

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से संवाद को नियमित रूप से सुदृढ़ कर रही है। पेजावर मठ का वैष्णव परंपरा में विशेष स्थान है और इसका प्रभाव कर्नाटक सहित देश के विभिन्न हिस्सों में महसूस होता है। शताब्दी समारोह के लोगो अनावरण में प्रधानमंत्री की भागीदारी इस आयोजन को राष्ट्रीय महत्व प्रदान करती है।

आने वाले दिनों में जन्म शताब्दी के अंतर्गत आयोजित विविध धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में व्यापक जन-भागीदारी अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दक्षिण भारत के वैष्णव मठों तक भी विस्तृत है। पेजावर मठ केवल आध्यात्मिक केंद्र नहीं, बल्कि कर्नाटक की सामाजिक-धार्मिक संरचना में गहरी जड़ें रखता है — ऐसे में यह मुलाकात राजनीतिक निहितार्थ से परे नहीं है। दूसरी ओर, उसी दिन 'प्रोजेक्ट राइनो' की घोषणा यह संकेत देती है कि वन्यजीव संरक्षण को भी राजनीतिक एजेंडे में प्राथमिकता मिल रही है, जो असम और उत्तर-पूर्व में विशेष प्रासंगिकता रखती है। इन दो घटनाओं को एक साथ देखना जरूरी है — यह मोदी सरकार की उस शैली को दर्शाता है जो सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और राजनीतिक संदेशों को एक ही दिन के संचार में बुनती है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी कौन हैं और उन्होंने PM मोदी से क्यों मुलाकात की?
श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी कर्नाटक के उडुपी स्थित प्रतिष्ठित श्री पेजावर अधोक्षजा मठ के वर्तमान पीठाधीश हैं। उन्होंने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की, जिसके दौरान पद्म विभूषण श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी समारोह के लोगो का अनावरण हुआ।
श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी का क्या महत्व है?
पद्म विभूषण यतिकुल चक्रवर्ती श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी पेजावर मठ के पूर्व प्रमुख और वैष्णव द्वैत परंपरा के प्रभावशाली संत थे, जिन्होंने भक्ति, ज्ञान और सामाजिक समरसता को अपने जीवन का आधार बनाया। उनकी जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम उनके आदर्शों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित करने का अवसर हैं।
प्रोजेक्ट राइनो क्या है और इसकी घोषणा कब हुई?
प्रोजेक्ट राइनो भारत सरकार की नई पहल है, जिसकी घोषणा PM मोदी ने 22 सितंबर 2026 को विश्व राइनो दिवस के अवसर पर की। इसके तहत सीमावर्ती राज्यों को गैंडा संरक्षण, पर्यावास प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार और जनसंख्या गतिशीलता को समझने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जाएगी।
भारत में एक सींग वाले गैंडों की स्थिति कैसी है?
PM मोदी के अनुसार असम में अब विश्व की लगभग 80 प्रतिशत एक सींग वाले गैंडों की आबादी है। काजीरंगा के अवैध शिकार-रोधी प्रयासों की व्यापक सराहना हुई है, जबकि बिहार, पश्चिम बंगाल और दुधवा (उत्तर प्रदेश) में भी गैंडों की वापसी और पुनर्स्थापन के सफल उदाहरण सामने आए हैं।
PM मोदी ने इस मुलाकात की जानकारी कैसे दी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए श्री विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी से मुलाकात की जानकारी दी। उन्होंने पोस्ट में स्वामीजी के जीवन को 'भक्ति, ज्ञान और सेवा से परिपूर्ण' बताया और जन्म शताब्दी समारोह के महत्व को रेखांकित किया।
राष्ट्र प्रेस
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