जरीना वहाब ने मास्टर राजू संग तस्वीर शेयर कर जगाईं 'चितचोर' की पुरानी यादें
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री जरीना वहाब ने सोशल मीडिया पर बाल कलाकार मास्टर राजू के साथ एक तस्वीर साझा की, जिसने फैंस को सीधे 1976 की क्लासिक फिल्म 'चितचोर' की यादों में पहुंचा दिया। मुंबई से सामने आई यह तस्वीर पुरानी पीढ़ी के सिनेप्रेमियों के लिए एक भावनात्मक पल बन गई।
तस्वीर और कैप्शन ने छुआ दिल
जरीना वहाब द्वारा पोस्ट की गई तस्वीर में दोनों कलाकार मुस्कुराते हुए एक साथ नज़र आ रहे हैं। तस्वीर के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, 'समय भले ही लोगों को एक-दूसरे से दूर कर देता है, लेकिन दिलों का रिश्ता हमेशा बना रहता है। मेरा छोटा राजू।' यह संदेश फैंस के बीच तेज़ी से वायरल हो गया।
'चितचोर' — एक अमर फिल्म की कहानी
फिल्म 'चितचोर' का निर्देशन बासु चटर्जी ने किया था और इसकी पटकथा बंगाली लेखक सुबोध घोष की रचना पर आधारित थी। फिल्म की कहानी एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द बुनी गई थी, जहाँ एक लड़की की शादी एक युवा इंजीनियर से तय होती है, लेकिन एक गलतफहमी के चलते परिवार किसी और युवक को वही इंजीनियर समझ बैठता है। इसी बीच लड़की और उस युवक के बीच प्रेम अंकुरित हो जाता है।
बाद में एक पत्र के आने से कहानी में बड़ा मोड़ आता है और कई भावनात्मक घटनाएँ सामने आती हैं। फिल्म में सादगी, पारिवारिक रिश्तों और निश्छल प्रेम को बेहद संवेदनशीलता से चित्रित किया गया था। अमोल पालेकर, विजयेंद्र घाटगे, ए.के. हंगल और दीना पाठक जैसे दिग्गज कलाकारों ने फिल्म में अपनी अदाकारी से जान फूंकी थी।
मास्टर राजू: बचपन से परदे तक का सफर
मास्टर राजू का असली नाम राजू श्रेष्ठ है। उन्होंने बेहद कम उम्र में हिंदी सिनेमा में कदम रखा और जल्द ही दर्शकों के चहेते बन गए। उनकी फिल्मोग्राफी में 'अमर प्रेम', 'बावर्ची', 'परिचय', 'दाग', 'अभिमान', 'दीवार', 'किताब' और 'खट्टा मीठा' जैसी कालजयी फिल्में शामिल हैं।
गौरतलब है कि अपने लंबे करियर में उन्होंने करीब 200 फिल्मों और कई टेलीविज़न धारावाहिकों में अभिनय किया। यह ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड की पुरानी विरासत को लेकर नई पीढ़ी में भी जिज्ञासा बढ़ रही है।
फैंस की प्रतिक्रिया
तस्वीर सामने आते ही सोशल मीडिया पर पुराने दर्शकों ने भावुक टिप्पणियाँ कीं। कई लोगों ने 'चितचोर' के गानों और दृश्यों को याद करते हुए इसे हिंदी सिनेमा की सबसे सहज और हृदयस्पर्शी फिल्मों में से एक बताया। यह पोस्ट उस दौर की फिल्मों के प्रति बने स्थायी लगाव को एक बार फिर रेखांकित करती है।