चित्रकूट: राम की तपोस्थली और नानाजी देशमुख की कर्मस्थली के अद्भुत संगम का जश्न
सारांश
Key Takeaways
- चित्रकूट का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व।
- नानाजी देशमुख का ग्राम विकास में योगदान।
- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकास की दिशा।
- दीनदयाल शोध संस्थान के अनुकरणीय कार्य।
- गांवों की सशक्तिकरण में राज्य सरकार का प्रयास।
भोपाल, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि चित्रकूट को भगवान श्रीराम की तपोस्थली और नानाजी देशमुख की कर्मस्थली होने का विशेष गौरव प्राप्त है। नानाजी देशमुख ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के सपने को साकार करने का संकल्प चित्रकूट से लिया।
सीएम ने राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख की १६वीं पुण्यतिथि के अवसर पर चित्रकूट स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि नानाजी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के लिए एक महान साधक थे। उन्होंने अपने जीवन को ग्राम विकास, शिक्षा, और स्वावलंबन के लिए समर्पित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नानाजी का मानना था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। जब गांव मजबूत होंगे, तभी राष्ट्र भी मजबूत होगा। नानाजी की १६वीं पुण्यतिथि २७ फरवरी को है।
तीन दिवसीय समारोह में मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि चित्रकूट को भगवान श्रीराम की तपोस्थली और नानाजी देशमुख की कर्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है। नानाजी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के सिद्धांत को चित्रकूट से साकार करने का प्रण लिया। इस दिशा में १९९१ में चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना की गई।
उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार नानाजी देशमुख की शिक्षाओं के अनुसार समाज और देश के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में कार्य कर रही है। दीनदयाल शोध संस्थान विभिन्न क्षेत्रों में अनुकरणीय कार्य कर रहा है, जिसमें स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, कृषि, और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण शामिल है। राज्य सरकार गांवों को मजबूत करने के साथ-साथ विकास की धारा में भी योगदान दे रही है।
चित्रकूट में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय सांसद गणेश सिंह, विश्वविद्यालय के कुलगुरु आलोक दुबे, दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन एवं अन्य विषय विशेषज्ञ और शोधार्थी उपस्थित रहे।