चुटूपालू घाटी में ब्रेक फेल ट्रेलर ने दो कारों को रौंदा, एलपीजी टैंकर से टकराव टला — कई लोग बाल-बाल बचे
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के रामगढ़ थाना क्षेत्र की खतरनाक चुटूपालू घाटी में शनिवार, 11 जुलाई को एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया, जब ब्रेक फेल हुए एक अनियंत्रित ट्रेलर ने एनएच-33 पर चल रही दो कारों को जोरदार टक्कर मार दी। सड़क पर पहले से खड़े दुर्घटनाग्रस्त एलपीजी गैस टैंकर को समय पर न हटाए जाने के कारण जोखिम कई गुना बढ़ गया था।
हादसे का घटनाक्रम
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चुटूपालू घाटी में पहले से एक गैस से लदा एलपीजी टैंकर दुर्घटनाग्रस्त अवस्था में सड़क पर खड़ा था। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे एक ट्रेलर के ब्रेक अचानक फेल हो गए, जिससे वह बेकाबू होकर आगे बढ़ा और NH-33 पर चल रही एक मारुति स्विफ्ट और एक हुंडई क्रेटा को पीछे से टक्कर मार दी। दोनों कारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, हालाँकि उनमें सवार सभी लोगों को केवल मामूली चोटें आईं और सभी सुरक्षित बच गए।
एनएचएआई की देरी पर सवाल
प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की रेस्क्यू टीम दुर्घटनाग्रस्त गैस टैंकर को समय पर सड़क से नहीं हटा सकी, जिसके कारण घाटी में जोखिम बना रहा। यदि बेकाबू ट्रेलर सीधे एलपीजी टैंकर से टकरा जाता, तो विस्फोट की स्थिति में हादसा कहीं अधिक भयावह हो सकता था। यह सवाल अब उठ रहा है कि आपातकालीन प्रतिक्रिया में इतनी देरी क्यों हुई।
चालक फरार, पुलिस ने ट्रेलर जब्त किया
हादसे के तुरंत बाद ट्रेलर चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही रामगढ़ पुलिस मौके पर पहुँची और क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात सामान्य करने का प्रयास शुरू किया। पुलिस ने ट्रेलर को जब्त कर थाने ले जाया है और फरार चालक की तलाश जारी है।
चुटूपालू घाटी: बार-बार हादसों का केंद्र
गौरतलब है कि चुटूपालू घाटी लगातार सड़क दुर्घटनाओं का केंद्र बनी हुई है। इस हादसे से महज एक दिन पहले, शुक्रवार को लकड़ी से लदा एक ट्रक करीब 30 फीट गहरी खाई में गिर गया था, जिसमें चालक गंभीर रूप से घायल हो गया था। कई सुरक्षा पहलों के बावजूद यह घाटी वाहन चालकों के लिए अत्यंत जोखिम भरी बनी हुई है, और इस ताज़ा हादसे ने एक बार फिर यहाँ की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस फरार ट्रेलर चालक की तलाश कर रही है। साथ ही, एनएचएआई की रेस्क्यू प्रतिक्रिया में हुई देरी की जाँच की माँग भी स्थानीय स्तर पर उठने लगी है। चुटूपालू घाटी में स्थायी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर प्रशासन का रुख अब परखा जाएगा।