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सीआईएमएल की 61वीं बैठक नई दिल्ली में: भारत पहली बार मेजबान, एआई और डिजिटल मापन पर वैश्विक चर्चा

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सीआईएमएल की 61वीं बैठक नई दिल्ली में: भारत पहली बार मेजबान, एआई और डिजिटल मापन पर वैश्विक चर्चा

सारांश

नई दिल्ली में पहली बार सीआईएमएल की 61वीं बैठक की मेजबानी कर भारत ने वैश्विक मापन मानकों में अपनी बढ़ती भूमिका का संकेत दिया। एआई, डिजिटल परिवर्तन और 'एक राष्ट्र, एक समय' जैसी पहलें दर्शाती हैं कि भारत अब मानक-अनुपालक से मानक-निर्माता की ओर बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

भारत पहली बार 26-28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सीआईएमएल की 61वीं बैठक की मेजबानी कर रहा है।
सीआईएमएल अध्यक्ष डॉ.
बॉब जोसेफ मैथ्यू ने निष्पक्ष व्यापार और उपभोक्ता सुरक्षा में विधिक माप विज्ञान के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया।
भारत को ओआईएमएल-सीएस के तहत जारीकर्ता प्राधिकरण का दर्जा मिला, जिससे भारतीय निर्माताओं की वैश्विक पहुँच बढ़ेगी।
'एक राष्ट्र, एक समय' परियोजना के ज़रिए बैंकिंग, 5जी, नौवहन और विद्युत प्रणालियों में समय-तालमेल सुनिश्चित किया जाएगा।
ई-माप राष्ट्रीय पोर्टल और जीएटीसी के विस्तार से डिजिटल विधिक माप विज्ञान सेवाओं को मज़बूती मिलेगी।
27 अक्टूबर को ओआईएमएल रणनीति कार्यशाला और 28 अक्टूबर को सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला दौरा निर्धारित है।

भारत ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पहली बार विधिक माप विज्ञान की अंतरराष्ट्रीय समिति (सीआईएमएल) की 61वीं बैठक की मेजबानी की, जिसमें मापन मानकों, उपभोक्ता संरक्षण और निष्पक्ष व्यापार को मज़बूती देने के लिए दुनियाभर के प्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ एकत्र हुए। यह तीन दिवसीय आयोजन 28 अक्टूबर तक चलेगा और डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा मशीन-पठनीय मानकों जैसे समसामयिक विषयों को केंद्र में रखता है।

उद्घाटन सत्र और मुख्य वक्तव्य

कार्यक्रम की शुरुआत 'विधिक माप विज्ञान में विकास' विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी से हुई, जिसके बाद सीआईएमएल की बैठक का पहला सत्र हुआ। सीआईएमएल अध्यक्ष डॉ. बॉब जोसेफ मैथ्यू ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करने, उपभोक्ताओं की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में विधिक माप विज्ञान के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया।

स्वीडन की सीआईएमएल प्रथम उपाध्यक्ष रेनी हैन्सन ने डिजिटलीकरण, उभरती प्रौद्योगिकियों और बदलती बाज़ार आवश्यकताओं के बीच विधिक माप विज्ञान की विकसित होती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सदस्य देशों के बीच सामंजस्यपूर्ण मापन मानकों और घनिष्ठ सहयोग की ज़रूरत पर बल दिया।

ओआईएमएल और एआई पहलें

अंतरराष्ट्रीय विधिक मापिकी संगठन (ओआईएमएल) के निदेशक एंथनी डोनेलन ने ओआईएमएल प्रमाणन प्रणाली के ज़रिए परीक्षण परिणामों की पारस्परिक स्वीकृति और क्षमता निर्माण को मज़बूत करने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने मशीन-पठनीय मानकों, एआई और डिजिटल परिवर्तन से जुड़ी उभरती पहलों पर भी विस्तार से बताया। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग उपकरणों, ओआईएमएल की 'स्मार्ट सिफ़ारिशें' पहल और मापन प्रणालियों में एआई के उपयोग पर गहन चर्चा की।

भारत की उपलब्धियाँ और सुधार

उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सटीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामंजस्यपूर्ण मापन निष्पक्ष व्यापार, उपभोक्ता विश्वास, औद्योगिक नवाचार और आर्थिक विकास का मूल आधार हैं। उन्होंने 2023 और 2026 के जन विश्वास सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनके अंतर्गत निर्दिष्ट अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है और आनुपातिक नियामक ढाँचे को प्रोत्साहन दिया गया है।

खरे ने बताया कि सत्यापन क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत परीक्षण केंद्रों (जीएटीसी) का विस्तार किया गया है और विधिक माप विज्ञान में एकीकृत डिजिटल सेवाएँ देने हेतु ई-माप राष्ट्रीय पोर्टल विकसित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ओआईएमएल-सीएस के अंतर्गत भारत को जारीकर्ता प्राधिकरण के रूप में मान्यता मिली है, जो भारतीय निर्माताओं के लिए वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच सुगम करेगी।

'एक राष्ट्र, एक समय' परियोजना

खरे ने राष्ट्रीय समय प्रसार परियोजना 'एक राष्ट्र, एक समय' का ज़िक्र किया, जिसका उद्देश्य पूरे देश में सटीक और विश्वसनीय भारतीय मानक समय उपलब्ध कराना है। इस पहल से बैंकिंग, दूरसंचार, 5जी नेटवर्क, नौवहन और विद्युत प्रणालियों में समय-तालमेल को बल मिलेगा।

उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक आशुतोष अग्रवाल ने संगोष्ठी में 'भारत में विधिक माप विज्ञान का विकास और सुधार' विषय पर प्रस्तुति दी, जिसमें अनुपालन प्रक्रियाओं के सरलीकरण, पैकेज्ड वस्तुओं के विनियमन और रांची स्थित भारतीय विधिक माप विज्ञान संस्थान की भूमिका को रेखांकित किया गया।

आगे की कार्यक्रम योजना

27 अक्टूबर को ओआईएमएल की रणनीति कार्यशाला आयोजित होगी, और 28 अक्टूबर को प्रतिनिधि सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला का दौरा करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत वैश्विक मानक-निर्धारण में अपनी भूमिका को और सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी वास्तविक परीक्षा यह होगी कि घरेलू परीक्षण अवसंरचना — विशेषकर जीएटीसी नेटवर्क — कितनी तेज़ी से अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढलती है। 'एक राष्ट्र, एक समय' जैसी परियोजना महत्वाकांक्षी है, लेकिन 5जी रोलआउट की असमान गति और ग्रामीण संपर्क की सीमाओं को देखते हुए इसके क्रियान्वयन की समयसीमा पर स्वतंत्र निगरानी ज़रूरी होगी।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआईएमएल की 61वीं बैठक क्या है और यह कहाँ हो रही है?
सीआईएमएल यानी विधिक माप विज्ञान की अंतरराष्ट्रीय समिति की 61वीं बैठक 26 से 28 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित हो रही है। यह पहली बार है जब भारत इस बैठक की मेजबानी कर रहा है, जिसमें मापन मानकों, उपभोक्ता संरक्षण और डिजिटल परिवर्तन पर चर्चा हो रही है।
ओआईएमएल जारीकर्ता प्राधिकरण का दर्जा भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
ओआईएमएल-सीएस के अंतर्गत जारीकर्ता प्राधिकरण की मान्यता मिलने से भारतीय निर्माता अपने उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत प्रमाणन हासिल कर सकेंगे। इससे उन्हें वैश्विक बाज़ारों में प्रवेश करना आसान होगा और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
'एक राष्ट्र, एक समय' परियोजना क्या है?
'एक राष्ट्र, एक समय' एक राष्ट्रीय समय प्रसार परियोजना है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में सटीक और विश्वसनीय भारतीय मानक समय सुनिश्चित करना है। यह बैंकिंग, दूरसंचार, 5जी नेटवर्क, नौवहन और विद्युत प्रणालियों में समय-तालमेल को मज़बूत करेगी।
ई-माप राष्ट्रीय पोर्टल से क्या फायदा होगा?
ई-माप राष्ट्रीय पोर्टल विधिक माप विज्ञान के क्षेत्र में एकीकृत डिजिटल सेवाएँ प्रदान करता है, जिससे अनुपालन प्रक्रियाएँ सरल और पारदर्शी बनती हैं। सरकार द्वारा स्वीकृत परीक्षण केंद्रों (जीएटीसी) के विस्तार के साथ मिलकर यह सत्यापन क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा।
सीआईएमएल बैठक में एआई की भूमिका पर क्या चर्चा हुई?
बैठक में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने मापन प्रणालियों में एआई के उपयोग, मशीन-पठनीय मानकों और ओआईएमएल की 'स्मार्ट सिफ़ारिशें' पहल पर विचार-विमर्श किया। इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग उपकरणों की माप सटीकता भी चर्चा का विषय रही।
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