हरियाणा को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाएगी सैनी सरकार, नई औद्योगिक नीति तैयार
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 23 अप्रैल 2025 को उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर हरियाणा को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने की नई औद्योगिक नीति की रूपरेखा पेश की।
- नई नीति में पूंजी सब्सिडी, कर छूट, कौशल विकास और व्यापार सुगमता जैसे प्रमुख प्रोत्साहन शामिल होंगे।
- माइक्रोसॉफ्ट के संदीप अरोड़ा ने स्कूलों और ITIs में AI, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स की शिक्षा पर जोर दिया।
- AVGC (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग, कॉमिक्स) और ई-स्पोर्ट्स के लिए विशेष नीति तैयार की जा रही है।
- फिक्की AVGC-XR फोरम के अध्यक्ष आशीष कुलकर्णी ने इनक्यूबेटर और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की।
- निर्यात सुविधा के लिए विदेशों में वैश्विक भंडारण केंद्र बनाने का सुझाव दिया गया।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हरियाणा को इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग और कॉमिक्स जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुवार, 23 अप्रैल को उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में एक नई और व्यापक औद्योगिक नीति की रूपरेखा पर विचार-विमर्श हुआ, जो राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलने का लक्ष्य रखती है।
मुख्यमंत्री सैनी का विजन: हरियाणा बनेगा निवेश का पसंदीदा गंतव्य
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक में स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक्स, IT और AVGC (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग एवं कॉमिक्स) जैसे क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पहले से ही सुदृढ़ बुनियादी ढांचा, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और उद्योग-अनुकूल वातावरण मौजूद है, जो इसे बड़े निवेश के लिए एक आदर्श राज्य बनाता है।
बैठक में उद्योग और वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने दोहराया कि सरकार का सुनिश्चित लक्ष्य हरियाणा को देश-विदेश की अग्रणी कंपनियों के लिए सर्वाधिक पसंदीदा निवेश स्थल के रूप में विकसित करना है।
नई औद्योगिक नीति के प्रमुख प्रावधान
प्रस्तावित नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत उद्योगों को स्थापित करने और उनके विस्तार के लिए कई आकर्षक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इनमें पूंजी सब्सिडी, कर में छूट, कौशल विकास सहायता और व्यापार सुगमता से जुड़े ठोस उपाय शामिल हैं।
उद्योग प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि सरकार भविष्य के उत्पादों और उभरते क्षेत्रों की पहचान कर कुछ चुनिंदा कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायता करे। इससे लघु एवं मध्यम उद्योगों (SMEs) को भी परोक्ष लाभ मिलेगा।
निर्यात संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए प्रतिनिधियों ने विदेशों में वैश्विक भंडारण केंद्र (Global Warehousing Hubs) स्थापित करने का सुझाव दिया, ताकि कंपनियां अपने उत्पाद सुरक्षित रख सकें और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित कर सकें।
AI शिक्षा और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा
माइक्रोसॉफ्ट के प्रतिनिधि संदीप अरोड़ा ने बैठक में स्कूलों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) और अन्य शिक्षण संस्थाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित शिक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उनका मत था कि छात्रों को प्रारंभिक स्तर से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स में प्रशिक्षित किया जाए, ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम हों।
कई कंपनियों ने ITIs को गोद लेने में रुचि जताई, जिससे उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार किया जा सके। सरकार ने भी अनुसंधान एवं विकास (R&D) गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई।
AVGC और ई-स्पोर्ट्स सेक्टर के लिए विशेष नीति
फिक्की के AVGC-XR फोरम के अध्यक्ष आशीष कुलकर्णी और अन्य विशेषज्ञों ने ई-स्पोर्ट्स क्षेत्र को मजबूत करने की पुरजोर सिफारिश की। उनका तर्क था कि इससे युवाओं के लिए नए करियर विकल्प खुलेंगे और राज्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
विशेषज्ञों ने इनक्यूबेटर और उत्कृष्टता केंद्र (Centers of Excellence) स्थापित करने की भी अनुशंसा की, जो नवाचार, स्टार्टअप और प्रतिभा को एक साझा मंच प्रदान करें। AVGC क्षेत्र के लिए एक पृथक विशेष नीति तैयार की जा रही है।
व्यापक परिप्रेक्ष्य: हरियाणा की रणनीतिक महत्ता
गौरतलब है कि हरियाणा पहले से ही देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शुमार है — गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहर IT और मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से निकटता इसे और भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।
केंद्र सरकार की सेमीकंडक्टर मिशन और PLI (उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन) योजना के साथ तालमेल बिठाते हुए हरियाणा की यह नई नीति राज्य को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में अग्रणी भूमिका दिला सकती है। आने वाले महीनों में इस नीति को अंतिम रूप दिए जाने और इसे लागू करने की समयसीमा घोषित किए जाने की संभावना है।