ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण चुनाव: BJP नेता आर. अशोक का आरोप — हार के डर से कांग्रेस टाल रही है मतदान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने 20 मई 2026 को कांग्रेस सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि वह ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (GBA) के चुनाव जानबूझकर टाल रही है, क्योंकि उसके आंतरिक सर्वेक्षणों में कथित तौर पर हार के संकेत मिले हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अशोक ने इस देरी को बेंगलुरु की जनता के साथ 'विश्वासघात' करार दिया।
मुख्य आरोप: सर्वेक्षण में हार, इसलिए टाला चुनाव
अशोक ने दावा किया कि यदि चुनाव पहले के 198 वार्डों के ढाँचे के आधार पर कराए जाते, तो प्रक्रिया अब तक पूरी हो चुकी होती। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु को पाँच प्रशासनिक क्षेत्रों में विभाजित करने के निर्णय के बाद, कांग्रेस के आंतरिक सर्वेक्षणों में कथित तौर पर सभी पाँचों क्षेत्रों में हार के संकेत सामने आए — और इसी के चलते सरकार ने चुनाव स्थगित किए।
शिवकुमार पर निशाना: नेतृत्व परिवर्तन की आड़ में देरी
अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि बेंगलुरु के प्रभारी मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार नहीं चाहते थे कि कांग्रेस पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ये चुनाव हों। उनके अनुसार, पार्टी की आंतरिक खींचतान सीधे तौर पर शहर के प्रशासन पर भारी पड़ रही है।
आम जनता पर असर: कचरा, विकास ठप
अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की आंतरिक कलह के कारण बेंगलुरु भर में कचरे के ढेर लग गए हैं और शहर के विकास कार्य बाधित हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस स्थिति के लिए कांग्रेस सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है।
अदालत की समय-सीमा और BJP की तैयारी
अशोक ने बताया कि अदालत ने एक बार फिर चुनाव कराने की अंतिम समय-सीमा दी है। उन्होंने सरकार से तत्काल चुनाव की घोषणा करने का आग्रह किया और स्पष्ट किया कि BJP चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि BJP ने पहले ही चुनाव आयोग को पत्र लिखकर शीघ्र चुनाव की माँग की थी।
कांग्रेस पर विपक्ष को दोष देने का आरोप
BJP नेता ने कहा कि आंतरिक सर्वेक्षणों में हार की भविष्यवाणी के बाद कांग्रेस ने देरी का ठीकरा विपक्षी दलों पर फोड़ना शुरू कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस को जीत का भरोसा है, तो वह चुनाव क्यों टाल रही है? अशोक ने सर्वेक्षणों और SIR (Special Intensive Revision) अभ्यासों का हवाला देकर चुनाव स्थगित करने को सरकार का 'बहाना' बताया और कहा कि हर मुद्दे के लिए विपक्ष को दोषी ठहराना सत्ताधारी दल की आदत बन चुकी है।