क्या कांग्रेस का 'मनरेगा बचाओ संग्राम' तेज हो रहा है? जयराम रमेश ने लोगों से आंदोलन में जुड़ने का आह्वान किया
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस का 'मनरेगा बचाओ संग्राम' ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा का प्रयास है।
- जयराम रमेश ने लोगों को आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है।
- 'विकसित भारत-जी राम जी बिल' को लेकर कांग्रेस ने कई आरोप लगाए हैं।
- यह अभियान 10 जनवरी 2026 से शुरू होकर 25 फरवरी तक चलेगा।
- कांग्रेस ने पंचायत स्तर पर विरोध की योजना बनाई है।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस विकसित भारत-जी राम जी बिल (वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025) का विरोध कर रही है, जिसे केंद्रीय सरकार ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) की जगह लाकर पारित किया है। इस बीच, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए लोगों से इस अधिनियम के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।
यह बिल दिसंबर 2025 में संसद से पास हुआ और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन गया। कांग्रेस का आरोप है कि यह मनरेगा को कमजोर करता है और ग्रामीण मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "मनरेगा बचाओ संग्राम देश के 2.5 लाख ग्राम पंचायतों और करोड़ों लोगों तक पहुंच रहा है। भारत के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा बन चुकी मनरेगा योजना पर सरकार ने बुलडोजर चला दिया है। इसी के खिलाफ यह देशव्यापी संघर्ष काम के अधिकार, मजदूरी के अधिकार और जवाबदेही के संवैधानिक अधिकार की बहाली के लिए है। आप भी इस आंदोलन से जुड़िए।"
यह पोस्ट कांग्रेस के 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान का हिस्सा है, जो 10 जनवरी 2026 से शुरू हुआ और 25 फरवरी तक चलेगा। पार्टी ने संसद से पंचायत स्तर तक विरोध की योजना बनाई है, जिसमें चौपाल, रैलियां, उपवास और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। कांग्रेस ने एक समन्वय समिति भी गठित की है, जिसमें अजय माकन संयोजक हैं और जयराम रमेश जैसे नेता शामिल हैं।
कांग्रेस का कहना है कि 'विकसित भारत-जी राम जी' बिल में रोजगार की गारंटी सिर्फ नाम की है। मनरेगा में 100 दिनों का काम कानूनी हक था, केंद्र 90 प्रतिशत फंड देता था और पंचायतों को काम तय करने का अधिकार था।
नए बिल में रोजगार 125 दिनों का दावा है, लेकिन केंद्र का फंड हिस्सा 60 प्रतिशत तक घटा दिया गया है, जिससे राज्यों पर बोझ बढ़ेगा। काम केंद्र तय करेगा, पंचायतों की भूमिका कम होगी और महात्मा गांधी का नाम हटाना अपमानजनक बताया जा रहा है। बिल के विरोध में कांग्रेस अभियान चलाकर ग्रामीणों से जुड़ रही है।