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जब 'एक गिलास पानी' ने योगेश और रॉबिन बनर्जी के रिश्ते में डाला था खटास

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जब 'एक गिलास पानी' ने योगेश और रॉबिन बनर्जी के रिश्ते में डाला था खटास

सारांश

योगेश, जो सिनेमा जगत के प्रसिद्ध गीतकार हैं, ने एक घटना के माध्यम से अपने सिद्धांतो का परिचय दिया। जब रॉबिन बनर्जी ने उन्हें पानी लाने के लिए कहा, तो यह उनकी आत्मसम्मान पर चोट बनी। जानिए पूरी कहानी।

मुख्य बातें

योगेश का सिद्धांत था कि गीत जीवन के अनुभवों से उत्पन्न होते हैं।
सार्वजनिक स्थल पर अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
योगेश ने 'सखी रॉबिन' के बाद कई प्रसिद्ध फिल्में कीं।
रॉबिन बनर्जी से हुई घटना के बाद योगेश ने अपने सिद्धांतों को और मजबूत किया।
दोस्ती में छोटी-मोटी गलतफहमियाँ हो सकती हैं, लेकिन इज्जत सबसे महत्वपूर्ण है।

मुंबई, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पुरानी फिल्मों, गानों और किस्सों का जादू आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है। जब बात किसी प्रिय कलाकार के जीवन की होती है, तो लोग और भी अधिक जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। सिनेमा जगत में 'जिंदगी कैसी है पहेली', 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' और 'रजनीगंधा फूल तुम्हारे' जैसे अद्भुत गीतों के रचयिता योगेश से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा उनके सिद्धांतों को उजागर करता है।

योगेश का जन्म 19 मार्च 1943 को लखनऊ में हुआ था। उनका मानना था कि गीत जीवन के अनुभवों से ही उत्पन्न होते हैं। वह अक्सर कहते थे, 'जो देखा, जो जिया, वो ही लिख दिया'। उनकी यह सरलता और ईमानदारी उनके शब्दों को लोगों के दिलों तक पहुंचाने में सहायक रही।

योगेश ने अपने करियर की शुरुआत 1962 में फिल्म 'सखी रॉबिन' से की, जिसमें उन्होंने छह गीत लिखे, जिनमें 'तुम जो आ गए' भी शामिल था। इस फिल्म ने उन्हें प्रारंभिक पहचान दिलाई, लेकिन इसके साथ ही एक अनोखी घटना भी घटी, जिसने उनके जीवन में तनाव पैदा किया।

योगेश ने एक इंटरव्यू में इस घटना का जिक्र किया। 'सखी रॉबिन' के बाद रॉबिन बनर्जी को कई फिल्में मिलीं, जैसे कि 'फ्लाइंग सर्कस', 'मार्वल मैन', और 'रॉकेट टार्जन'। एक दिन, योगेश एक महत्वपूर्ण मीटिंग में उपस्थित थे। वहां कई लोग मौजूद थे, जैसे प्रोड्यूसर लेखराज भाकरी, उनके दोस्त कुलदीप, माला सिन्हा, कैफी आजमी, गुलाम मोहम्मद और रॉबिन बनर्जी। योगेश सबसे जूनियर थे, लेकिन उन्होंने भी वहां अपनी उपस्थिति दर्ज की। अचानक रॉबिन ने योगेश से कहा, "योगेश, एक गिलास पानी ले आना।"

योगेश को यह बात अत्यंत अपमानजनक लगी। उन्होंने सोचा कि इतने बड़े लोगों के बीच उन्हें ऐसे काम के लिए कहना उचित नहीं था। उन्होंने बिना कुछ कहे सीधे अपने घर चले गए। कुछ दिनों बाद, रॉबिन ने योगेश से पूछा, "तू कहां चला गया था?" योगेश ने स्पष्ट उत्तर दिया, "क्या मैं पानी पिलाने वाला हूं? मैं आपकी इज्जत करता हूं, आपके साथ चलता हूं, लेकिन सार्वजनिक स्थल पर मुझे ऐसे काम के लिए कहना गलत है।" रॉबिन ने माफी मांगी और कहा कि ऐसा हो गया, वैसा हो गया। योगेश ने कहा कि दोस्ती में छोटी-मोटी बातें हो सकती हैं, लेकिन अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

इस घटना के बाद योगेश और रॉबिन बनर्जी के रिश्ते में तनाव आ गया था, लेकिन बाद में सब कुछ सामान्य हो गया। योगेश ने हृषिकेश मुखर्जी, बसु चटर्जी जैसी बड़ी हस्तियों के साथ काम किया और 'आनंद', 'रजनीगंधा', 'छोटी सी बात' जैसी फिल्मों में क्लासिक गीत दिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे एक छोटी सी बात बड़े रिश्तों में तनाव पैदा कर सकती है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगेश का जन्म कब हुआ था?
योगेश का जन्म 19 मार्च 1943 को लखनऊ में हुआ था।
योगेश ने अपने करियर की शुरुआत किस फिल्म से की?
योगेश ने अपने करियर की शुरुआत 1962 में फिल्म 'सखी रॉबिन' से की थी।
रॉबिन बनर्जी ने योगेश से क्या कहा था?
रॉबिन बनर्जी ने योगेश से मीटिंग में कहा था, 'एक गिलास पानी ले आना।'
योगेश ने रॉबिन के कहने पर क्या प्रतिक्रिया दी?
योगेश को यह अपमानजनक लगा और उन्होंने महफिल छोड़ दी।
क्या योगेश और रॉबिन के रिश्ते में सुधार हुआ?
हाँ, बाद में उनके रिश्ते में सुधार हो गया।
राष्ट्र प्रेस
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