13 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गीतकार योगेश गौड़: लखनऊ से मुंबई तक का सफर, 'रिमझिम गिरे सावन' से अमर हुई आवाज़

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गीतकार योगेश गौड़: लखनऊ से मुंबई तक का सफर, 'रिमझिम गिरे सावन' से अमर हुई आवाज़

सारांश

लखनऊ से 16 साल की उम्र में मुंबई आए योगेश गौड़ ने 'रिमझिम गिरे सावन' और 'जिंदगी कैसी है पहेली' जैसे कालजयी गीत लिखे। 29 मई 2020 को उनके निधन के पाँच वर्ष बाद भी उनकी रचनाएँ हिंदी सिनेमा की अमर धरोहर बनी हुई हैं।

मुख्य बातें

गीतकार योगेश गौड़ का जन्म 19 मार्च 1943 को लखनऊ में हुआ; निधन 29 मई 2020 को बीमारी के कारण।
मात्र 16 वर्ष की आयु में काम की तलाश में लखनऊ से मुंबई आए और फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
'रिमझिम गिरे सावन' , 'जिंदगी कैसी है पहेली' , 'रजनीगंधा फूल तुम्हारे' सहित हज़ारों गीत लिखे।
ऋषिकेश मुखर्जी और बासु चटर्जी जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया।
संगीत में योगदान के लिए दादासाहब फाल्के पुरस्कार और यश भारती पुरस्कार से सम्मानित।

बॉलीवुड के अमर गीतकार योगेश गौड़ का निधन 29 मई 2020 को बीमारी के कारण हुआ था। मात्र 16 वर्ष की आयु में काम की तलाश में लखनऊ से मुंबई आए योगेश ने हिंदी सिनेमा को ऐसे गीत दिए जो आज भी करोड़ों दिलों में गूंजते हैं। उनके जाने के पाँच वर्ष बाद भी 60 और 70 के दशक में लिखे उनके गीत हिंदी संगीत की अमूल्य धरोहर बने हुए हैं।

लखनऊ से मुंबई तक का सफर

19 मार्च 1943 को लखनऊ में जन्मे योगेश गौड़ ने किशोरावस्था में ही फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बनाने का सपना देखा था। 16 साल की उम्र में घर-परिवार छोड़कर वे मुंबई पहुँचे, जहाँ संघर्ष के लंबे दौर के बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी लेखनी की खासियत यह थी कि वे सरल शब्दों में जीवन की जटिल भावनाओं — प्रेम, उदासी, अनिश्चितता और सौंदर्य — को बेहद सहजता से पिरो देते थे।

यादगार गीत जो बन गए पीढ़ियों की धरोहर

योगेश के लिखे 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' और 'जिंदगी कैसी है पहेली' जैसे गीत आज भी श्रोताओं की आँखें नम कर देते हैं। इनके अलावा 'रजनीगंधा फूल तुम्हारे', 'रिमझिम गिरे सावन', 'कई बार यूंही देखा है', 'बड़ी सोनी सोनी है' और 'आये तुम याद मुझे' जैसे गीत भी उनकी अद्वितीय प्रतिभा के प्रमाण हैं। एक दौर ऐसा भी था जब योगेश के गीत के बिना किसी फिल्म का निर्माण अधूरा माना जाता था।

महान निर्देशकों के साथ काम

योगेश ने ऋषिकेश मुखर्जी और बासु चटर्जी जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया, जो मध्यवर्गीय जीवन और मानवीय संवेदनाओं को पर्दे पर उतारने के लिए जाने जाते थे। योगेश की कलम इन फिल्मों की आत्मा बन गई। उन्होंने संगीतकार जोड़ी निखिल-विनय के साथ मिलकर 'बेवफा सनम', 'चोर और चांद', 'दुलारा' और 'इंग्लिश बाबू देसी मेम' जैसी फिल्मों के लिए भी गीत लिखे। फिल्मों के अलावा उन्होंने टेलीविज़न धारावाहिकों के लिए भी लेखन किया।

सम्मान और पुरस्कार

हज़ारों गीत रचने वाले योगेश गौड़ को हिंदी संगीत में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए दादासाहब फाल्के पुरस्कार और यश भारती पुरस्कार से नवाज़ा गया। ये पुरस्कार उनकी उस विरासत की स्वीकृति थे जो उन्होंने दशकों की मेहनत और संवेदनशीलता से गढ़ी थी।

विरासत जो अमर है

योगेश गौड़ के जाने से हिंदी सिनेमा का एक संवेदनशील और काव्यात्मक युग समाप्त हुआ। गौरतलब है कि उनके गीत आज भी सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं और नई पीढ़ी उन्हें उतने ही चाव से सुनती है। उनकी रचनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि सच्ची कविता किसी भी युग की सीमाओं से परे होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि फिल्म की आत्मा होते थे — और यही उन्हें आज के कमर्शियल गीत-लेखन से अलग करता है। ऋषिकेश मुखर्जी की 'मध्यवर्गीय सिनेमा' के साथ उनका तालमेल महज संयोग नहीं था; यह एक साझा दृष्टि थी जो आम इंसान की भावनाओं को केंद्र में रखती थी। दादासाहब फाल्के और यश भारती जैसे पुरस्कार मिले, फिर भी मुख्यधारा की चर्चा में वे अक्सर पार्श्व में रहे — यह हिंदी सिनेमा की उस प्रवृत्ति को दर्शाता है जो गायक और संगीतकार को गीतकार से ऊपर रखती है। उनकी विरासत इस बात की याद दिलाती है कि सरल शब्दों में गहराई उतारना ही असली काव्य-कौशल है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गीतकार योगेश गौड़ कौन थे?
योगेश गौड़ हिंदी सिनेमा के प्रमुख गीतकार थे जिन्होंने 60 और 70 के दशक में 'रिमझिम गिरे सावन', 'जिंदगी कैसी है पहेली' जैसे कालजयी गीत लिखे। उनका जन्म 19 मार्च 1943 को लखनऊ में हुआ था और उन्होंने मात्र 16 वर्ष की आयु में मुंबई आकर अपना करियर शुरू किया।
योगेश गौड़ का निधन कब हुआ?
योगेश गौड़ का निधन 29 मई 2020 को बीमारी के कारण हुआ। उनके जाने से हिंदी सिनेमा के एक काव्यात्मक युग का अंत हो गया।
योगेश गौड़ के सबसे प्रसिद्ध गीत कौन से हैं?
उनके सबसे यादगार गीतों में 'रिमझिम गिरे सावन', 'जिंदगी कैसी है पहेली', 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए', 'रजनीगंधा फूल तुम्हारे' और 'आये तुम याद मुझे' शामिल हैं। ये गीत आज भी श्रोताओं के दिलों में विशेष स्थान रखते हैं।
योगेश गौड़ को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
हिंदी संगीत में अभूतपूर्व योगदान के लिए योगेश गौड़ को दादासाहब फाल्के पुरस्कार और यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ये भारतीय मनोरंजन जगत के सर्वोच्च सम्मानों में गिने जाते हैं।
योगेश गौड़ ने किन निर्देशकों के साथ काम किया?
योगेश गौड़ ने ऋषिकेश मुखर्जी और बासु चटर्जी जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया। उन्होंने संगीतकार जोड़ी निखिल-विनय के साथ 'बेवफा सनम', 'दुलारा' जैसी फिल्मों के गीत भी लिखे और टेलीविज़न धारावाहिकों के लिए भी लेखन किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले