11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अमरीश पुरी: 21 साल की सरकारी नौकरी के बाद बने 'मोगैम्बो', हिंदी सिनेमा के महानतम खलनायक की अनकही कहानी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अमरीश पुरी: 21 साल की सरकारी नौकरी के बाद बने 'मोगैम्बो', हिंदी सिनेमा के महानतम खलनायक की अनकही कहानी

सारांश

21 साल की सरकारी नौकरी, थिएटर का जुनून और ~40 की उम्र में फिल्मी दुनिया में छलांग — अमरीश पुरी की कहानी सिर्फ एक अभिनेता की नहीं, बल्कि उस इंसान की है जिसने देरी को हार नहीं मानी। 'मोगैम्बो खुश हुआ' कहने वाला वह किरदार आज भी भारतीय सिनेमा की सांस्कृतिक स्मृति का अटूट हिस्सा है।

मुख्य बातें

अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को पंजाब के नवांशहर में हुआ था।
फिल्मों में स्क्रीन टेस्ट में असफलता के बाद उन्होंने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में 21 साल तक नौकरी की।
लगभग 40 वर्ष की उम्र में नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक अभिनय में कदम रखा; 1971 में 'रेशमा और शेरा' से फिल्मी पारी शुरू हुई।
1987 की फिल्म 'मिस्टर इंडिया' में मोगैम्बो का किरदार उनकी पहचान का पर्याय बन गया।
हॉलीवुड फिल्म 'इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम' में मोला राम की भूमिका से अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
करियर में 400 से अधिक फिल्में ; 1979 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार ; 12 जनवरी 2005 को निधन।

हिंदी सिनेमा के सबसे दमदार खलनायक अमरीश पुरी का नाम आते ही दर्शकों के ज़ेहन में वह भारी आवाज़ और रौबदार अंदाज़ जीवंत हो उठता है। लेकिन परदे पर जो शख्स इतना भयावह और प्रभावशाली दिखता था, उसका असली सफर संघर्ष, धैर्य और अटूट जुनून की दास्तान है — 21 साल की सरकारी नौकरी से होते हुए 400 से अधिक फिल्मों तक।

नवांशहर से मुंबई तक: सपनों की पहली उड़ान

22 जून 1932 को पंजाब के नवांशहर में जन्मे अमरीश पुरी के परिवार में अभिनय की विरासत पहले से मौजूद थी। उनके बड़े भाई मदन पुरी और चमन पुरी फिल्मी दुनिया में सक्रिय थे, और मशहूर गायक-अभिनेता के. एल. सहगल उनके रिश्तेदार थे। इसके बावजूद युवा अमरीश के लिए फिल्मों में जगह बनाना आसान नहीं रहा। हीरो बनने के सपने के साथ मुंबई आए और स्क्रीन टेस्ट दिया, लेकिन पहली कोशिश में ही निराशा हाथ लगी।

सरकारी नौकरी और थिएटर का दोहरा सफर

स्क्रीन टेस्ट में असफलता के बाद अमरीश पुरी ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में नौकरी शुरू की। लेकिन स्थिर नौकरी के बावजूद उनके भीतर का कलाकार चैन से नहीं बैठा। नौकरी के साथ-साथ वह थिएटर में सक्रिय रहे और प्रख्यात रंगकर्मी सत्यदेव दुबे जैसे दिग्गजों के साथ काम किया। धीरे-धीरे रंगमंच पर उनकी पहचान एक असाधारण कलाकार के रूप में बनती गई। करीब 21 साल तक नौकरी करने के बाद, जब अभिनय में ठोस अवसर मिलने लगे, तो लगभग 40 वर्ष की उम्र में उन्होंने सरकारी नौकरी को अलविदा कह दिया। थिएटर ने ही उनके लिए फिल्मों के दरवाज़े खोले।

समानांतर सिनेमा से मुख्यधारा तक

1971 में फिल्म 'रेशमा और शेरा' से फिल्मी पारी की शुरुआत हुई। इसके बाद श्याम बेनेगल और गोविंद निहलानी जैसे निर्देशकों की फिल्मों ने उनकी अभिनय प्रतिभा को एक नई पहचान दी। 'निशांत', 'मंथन' और 'अर्ध सत्य' में उनके किरदारों को व्यापक सराहना मिली। 1980 में 'हम पांच' के बाद वह मुख्यधारा के खलनायक के रूप में स्थापित होने लगे। 'विधाता', 'नगीना', 'दामिनी', 'फूल और कांटे' और 'मेरी जंग' जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी।

मोगैम्बो: एक किरदार जो इतिहास बन गया

1987 में आई फिल्म 'मिस्टर इंडिया' ने अमरीश पुरी को हिंदी सिनेमा के इतिहास में हमेशा के लिए अमर कर दिया। उनका किरदार मोगैम्बो इतना लोकप्रिय हुआ कि दर्शक उन्हें उनके असली नाम से अधिक इसी नाम से पहचानने लगे। 'मोगैम्बो खुश हुआ' — यह डायलॉग हिंदी सिनेमा के सर्वाधिक यादगार संवादों में शुमार हो गया और आज भी भारतीय सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा है।

विविधता और अंतरराष्ट्रीय पहचान

अमरीश पुरी केवल खलनायक तक सीमित नहीं रहे। 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' में चौधरी बलदेव सिंह के किरदार ने उन्हें एक अलग आयाम दिया। 'परदेस' और 'विरासत' में सख्त पिता की भूमिकाओं ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा को रेखांकित किया। हॉलीवुड फिल्म 'इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम' में मोला राम के किरदार ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई। अपने पूरे करियर में उन्होंने 400 से अधिक फिल्मों में काम किया। थिएटर में उत्कृष्ट योगदान के लिए 1979 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि 'मेरी जंग', 'घातक' और 'विरासत' के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिले।

विरासत जो आज भी जीवित है

12 जनवरी 2005 को रक्त से जुड़ी बीमारी के कारण अमरीश पुरी का निधन हो गया। लेकिन उनकी आवाज़, उनके किरदार और उनकी अदाकारी आज भी दर्शकों के दिलों में उतनी ही ताज़ी है। वह इस बात के प्रमाण हैं कि असली प्रतिभा उम्र और देरी की मोहताज नहीं होती — 40 साल की उम्र में शुरू हुआ फिल्मी सफर हिंदी सिनेमा की सबसे गौरवशाली विरासतों में से एक बन गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

दुरुस्त आए' — लेकिन यह महज प्रेरणादायी कथा नहीं है। यह इस बात का प्रमाण भी है कि थिएटर की ज़मीन पर तपे बिना परदे पर वह गहराई नहीं आती जो दर्शकों को दशकों तक बाँधे रखे। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर 'मोगैम्बो' तक सिमट जाती है, लेकिन असली विरासत 'अर्ध सत्य' और 'मंथन' जैसी समानांतर फिल्मों में है जहाँ उन्होंने अभिनय को कला साबित किया। DDLJ में बलदेव सिंह का किरदार इस बात की याद दिलाता है कि एक 'विलेन' कितनी आसानी से दर्शकों का सबसे प्रिय पात्र बन सकता है — यह लचीलापन ही उन्हें अपने समकालीनों से अलग करता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरीश पुरी ने सरकारी नौकरी क्यों की और कब छोड़ी?
युवा अवस्था में स्क्रीन टेस्ट में असफल होने के बाद अमरीश पुरी ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में नौकरी शुरू की। लगभग 21 साल नौकरी करने के बाद, जब अभिनय में ठोस अवसर मिलने लगे, तो करीब 40 वर्ष की उम्र में उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
'मोगैम्बो खुश हुआ' डायलॉग किस फिल्म से है?
यह डायलॉग 1987 की फिल्म 'मिस्टर इंडिया' से है, जिसमें अमरीश पुरी ने मोगैम्बो का किरदार निभाया था। यह हिंदी सिनेमा के सर्वाधिक यादगार संवादों में शुमार है और आज भी भारतीय सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा है।
अमरीश पुरी ने हॉलीवुड में कौन-सी फिल्म की थी?
अमरीश पुरी ने हॉलीवुड फिल्म 'इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम' में मोला राम का किरदार निभाया, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
अमरीश पुरी को कौन-से प्रमुख पुरस्कार मिले?
थिएटर में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 1979 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। इसके अलावा 'मेरी जंग', 'घातक' और 'विरासत' जैसी फिल्मों के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार भी प्रदान किए गए।
अमरीश पुरी का निधन कब और किस कारण हुआ?
12 जनवरी 2005 को अमरीश पुरी का निधन हुआ। वह रक्त से जुड़ी बीमारी से पीड़ित थे। अपने करियर में उन्होंने 400 से अधिक फिल्मों में काम किया था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले