21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आनंद बक्शी: ₹150 की पहली कमाई से 'गीतों के बादशाह' तक का अविस्मरणीय सफर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आनंद बक्शी: ₹150 की पहली कमाई से 'गीतों के बादशाह' तक का अविस्मरणीय सफर

सारांश

₹150 की पहली कमाई से 'गीतों के बादशाह' तक — आनंद बक्शी का सफर रावलपिंडी के एक विभाजन-पीड़ित परिवार से शुरू होकर हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े गीतकार तक पहुँचा। फौज छोड़ी, मुंबई की ठोकरें खाईं, और फिर 'जब जब फूल खिले' से लेकर 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' तक — हर दौर में उनके गीत जिंदा रहे।

मुख्य बातें

आनंद बक्शी का जन्म 21 जुलाई 1930 को अविभाजित भारत के रावलपिंडी में हुआ था।
उनकी पहली फिल्मी कमाई ₹150 थी — फिल्म 'भला आदमी' के चार गीतों का मेहनताना।
पहला रिकॉर्ड किया गया गीत: 'धरती के लाल, न कर इतना मलाल' ।
1965 में 'जब जब फूल खिले' ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई।
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल , आर.डी.
बर्मन जैसे संगीतकारों और लता मंगेशकर , किशोर कुमार जैसे गायकों के साथ काम किया।
चार बार फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित; 30 मार्च 2002 को निधन।

हिंदी सिनेमा के महान गीतकार आनंद बक्शी की फिल्मी दुनिया में पहली कमाई महज ₹150 थी — चार गीतों का मेहनताना, जो उन्हें फिल्म 'भला आदमी' के लिए मिला था। लेकिन इसी छोटे से मौके ने उस सफर की नींव रखी, जिसने बक्शी को हिंदी फिल्म संगीत का एक ऐसा नाम बना दिया जिसे भुलाना मुमकिन नहीं। उनके गीत आज भी करोड़ों लोगों की जुबान पर जिंदा हैं।

रावलपिंडी से मुंबई तक: संघर्ष की कहानी

आनंद प्रकाश बख्शी का जन्म 21 जुलाई 1930 को अविभाजित भारत के रावलपिंडी में हुआ था। विभाजन की त्रासदी ने उनके परिवार को भारत आने पर मजबूर किया। बचपन में माँ का निधन और देश के बंटवारे का दर्द — इन दोनों गहरे घावों ने उनकी संवेदनशीलता को गढ़ा, जो बाद में उनके गीतों में झलकी।

बक्शी ने भारतीय सेना में नौकरी की और जबलपुर के सिग्नल कोर में तैनात रहे। सेना में रहते हुए वे कविताएँ लिखते थे, साथियों के बीच रचनाएँ सुनाते थे और नाटकों में भाग लेते थे। कलाकार बनने का सपना उन्हें पहली बार मुंबई ले गया, लेकिन शुरुआती प्रयास में सफलता नहीं मिली और वे निराश होकर वापस सेना में लौट गए।

दूसरी पारी: 1956 में मुंबई की वापसी

1956 में आनंद बक्शी ने एक बार फिर मुंबई का रुख किया — इस बार दृढ़ निश्चय के साथ। उनके पास कविताओं का खजाना था और खुद पर अटूट भरोसा। संघर्ष के उन दिनों में अभिनेता-निर्देशक भगवान दादा ने उन्हें अपनी फिल्म 'भला आदमी' में गीत लिखने का अवसर दिया।

बक्शी ने इस फिल्म के लिए चार गीत लिखे, जिनके बदले उन्हें ₹150 मिले। उनका पहला रिकॉर्ड किया गया गीत था — 'धरती के लाल, न कर इतना मलाल, धरती तेरे लिए, तू धरती के लिए।' यह मामूली-सी शुरुआत ही फिल्मी दुनिया में उनके प्रवेश का द्वार बनी।

मुख्य घटनाक्रम: पहचान और शोहरत का सफर

'भला आदमी' के बाद भी तत्काल काम नहीं मिला, लेकिन बक्शी ने धैर्य नहीं खोया। 1965 में आई फिल्म 'जब जब फूल खिले' ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई। इस फिल्म के गीत — 'परदेसियों से ना अंखियां मिलाना', 'ये समां समां है ये प्यार का' और 'ना ना करते प्यार' — आज भी उतने ही ताजे लगते हैं।

इसके बाद उन्होंने 'आराधना', 'अमर प्रेम', 'कटी पतंग', 'शोले', 'हरे रामा हरे कृष्णा', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'ताल' और 'गदर: एक प्रेम कथा' जैसी दर्जनों कालजयी फिल्मों के लिए गीत लिखे। उनकी विशेषता यही थी कि वे आम बोलचाल की भाषा में गहरे भाव उकेर देते थे।

संगीतकारों और गायकों के साथ जुगलबंदी

अपने लंबे करियर में आनंद बक्शी ने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, आर.डी. बर्मन और कल्याणजी-आनंदजी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया। उनके गीतों को लता मंगेशकर, किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और आशा भोसले जैसे महान गायकों ने अपनी आवाज दी — यह संयोग हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम युग की पहचान बना।

विरासत और अंतिम विदाई

आनंद बक्शी को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए चार बार फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। 30 मार्च 2002 को बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। गौरतलब है कि उनकी जन्मतिथि 21 जुलाई के आसपास हर वर्ष उनके चाहने वाले उन्हें याद करते हैं। ₹150 से शुरू हुआ सफर हजारों गीतों पर जाकर खत्म हुआ — यह हिंदी सिनेमा के सबसे प्रेरणादायक अध्यायों में से एक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विस्थापन और आर्थिक तंगी के बावजूद अपने सपनों से नहीं टूटा। यह ऐसे समय में याद दिलाना जरूरी है जब हिंदी फिल्म संगीत में गीतकार की भूमिका अक्सर संगीतकार या गायक की चमक में दब जाती है। बक्शी ने साबित किया कि आम बोलचाल की भाषा भी शाश्वत साहित्य बन सकती है — 'शोले' से 'दिलवाले दुल्हनिया' तक उनके गीत इसके प्रमाण हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि बक्शी ने सेना की नौकरी छोड़कर दो बार मुंबई का जोखिम उठाया — यह साहस उनके गीतों जितना ही उल्लेखनीय है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आनंद बक्शी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
आनंद बक्शी का जन्म 21 जुलाई 1930 को अविभाजित भारत के रावलपिंडी में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया।
आनंद बक्शी को पहली बार कितने रुपए मिले थे?
आनंद बक्शी को फिल्म 'भला आदमी' के चार गीत लिखने के बदले ₹150 मिले थे — यही उनकी फिल्मी दुनिया में पहली कमाई थी। इस फिल्म में उनका पहला रिकॉर्ड किया गया गीत 'धरती के लाल, न कर इतना मलाल' था।
आनंद बक्शी को बड़ी पहचान किस फिल्म से मिली?
1965 में आई फिल्म 'जब जब फूल खिले' ने आनंद बक्शी को बड़ी पहचान दिलाई। इस फिल्म के गीत 'परदेसियों से ना अंखियां मिलाना' और 'ना ना करते प्यार' आज भी लोकप्रिय हैं।
आनंद बक्शी ने किन प्रमुख फिल्मों के लिए गीत लिखे?
आनंद बक्शी ने 'आराधना', 'शोले', 'कटी पतंग', 'हरे रामा हरे कृष्णा', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'ताल' और 'गदर: एक प्रेम कथा' जैसी दर्जनों फिल्मों के लिए यादगार गीत लिखे। उन्होंने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, आर.डी. बर्मन और कल्याणजी-आनंदजी जैसे संगीतकारों के साथ काम किया।
आनंद बक्शी का निधन कब हुआ और उन्हें कौन-से पुरस्कार मिले?
आनंद बक्शी का निधन 30 मार्च 2002 को बीमारी के कारण हुआ। अपने करियर में उन्हें चार बार फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले