चुनाव आयोग पर कांग्रेस का हमला: पवन खेड़ा ने प्रेस नोट को बताया 'कमज़ोर और विलंबित'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने शनिवार, 26 सितंबर 2026 को भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के हालिया प्रेस नोट पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह नोट 'बेहद कमज़ोर, अपर्याप्त और देर से आया हुआ' है। उनका कहना है कि इस प्रेस नोट ने अनजाने में उन रिपोर्टों को सच साबित कर दिया है जिन पर आयोग ने पहले सवाल उठाए थे, लेकिन कई अहम प्रश्नों के उत्तर अब भी नहीं दिए गए।
फॉर्म 6 विवाद और मतदाताओं का वंचित होना
खेड़ा ने बताया कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने फॉर्म 6 में किए गए बदलावों का विरोध किया था और उनमें से एक ने इन्हें 'अनाधिकृत' व 'अवैध' तक करार दिया था। आयोग का अब कहना है कि पुराना फॉर्म 6 विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) के अंतर्गत उपलब्ध रहेगा, लेकिन खेड़ा ने सवाल उठाया कि यह समाधान उन युवा मतदाताओं की मदद कैसे करेगा जो बिहार और पश्चिम बंगाल में पहले ही मताधिकार से वंचित हो चुके हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि जहाँ विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद बिना SSR के चुनाव संपन्न हो चुके हों, और यदि जनवरी 2024 से SSR आयोजित ही नहीं हुआ, तो पुराने फॉर्म 6 की उपलब्धता का व्यावहारिक अर्थ क्या है?
ECINET समीक्षा समिति पर सवाल
कांग्रेस नेता ने ECINET की समीक्षा के लिए नई समिति के गठन पर भी आपत्ति जताई। आयोग ने कहा है कि एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (DEC) की अध्यक्षता में एक IIT/IIM विशेषज्ञ को शामिल कर नई समिति बनाई जाएगी। खेड़ा ने पूछा कि जब ई-गवर्नेंस की देखरेख के लिए पहले से ही एक परियोजना संचालन समिति (PSC) कार्यरत है — जिसमें सभी DEC और 3 IIT/IIM विशेषज्ञ शामिल हैं — तो इसी ढाँचे की नकल करते हुए नई समिति बनाने का औचित्य क्या है?
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब निर्वाचन आयोग की तकनीकी प्रणालियों की पारदर्शिता को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।
गोवा मामला और व्यापक सवाल
खेड़ा ने गोवा के उस मामले का भी ज़िक्र किया जिसमें आयोग ने दावा किया कि रिपोर्ट आने के बाद 97 में से 81 मतदाताओं ने फॉर्म 6 भर दिया। उन्होंने कहा कि यह आँकड़ा असली सवालों से ध्यान भटकाता है — पहला, इन मतदाताओं को शुरू में ही सूची से क्यों हटाया गया? दूसरा, इसी कारण से पूरे भारत में कितने अन्य मतदाता प्रभावित हुए? और तीसरा, आयोग की उन्हें ढूंढने और पुनः सूची में शामिल करने की क्या ठोस योजना है?
मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा आरोप
कांग्रेस नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे लंबे प्रेस नोटों की आड़ में इस गड़बड़ी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। खेड़ा ने कहा कि उन्हें या तो इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बनना चाहिए, या फिर 'राजद्रोह के मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।'
यह टिप्पणी राजनीतिक रूप से अत्यंत तीखी है और निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता पर चल रहे व्यापक विमर्श को और धारदार बनाती है। कांग्रेस की इस आक्रामक मुद्रा से संसद के शीतकालीन सत्र से पहले इस मुद्दे के और गर्माने के आसार हैं।